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Tuesday, 30 January 2018

मम्मी को प्रिंसीपल ने चोदा || Mummy ko Principal ne chod diya || GarmaGaram Kahaniya

मम्मी को प्रिंसीपल ने चोदा
प्रेषक : विकास …
हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम विकास है और आज में आप सभी Gandi kahaniya  के चाहने वालों को मेरी मम्मी उनका नाम सरिता है, उनकी मेरे स्कूल में हुई सच्ची चुदाई की कहानी के बारे में बताने के लिए आया हूँ, क्योंकि उस दिन इस चुदाई को देखकर मुझे अपनी माँ का असली रूप नजर आया और इसलिए अब मेरे विचार अपनी माँ के लिए बिल्कुल बदल गए है। दोस्तों मुझे उम्मीद है कि यह आप सभी को जरुर पसंद आएगी और वैसे में भी अब तक बहुत सारी सेक्सी कहानियों को पढ़कर उनके मज़े ले चुका हूँ और मेरी यह कहानी भी उन्ही कहानियों की तरह बहुत मज़ेदार है। दोस्तों जब में पढ़ता था, तब उन्ही दिनों मेरे पापा की एक बीमारी की वजह से म्रत्यु हो गयी और वो एक प्राइवेट स्कूल में टीचर थे। फिर कुछ महीनों के बाद हमारे स्कूल के प्रधानाध्यापक ने मेरे घर की परेशानियों को देखकर समझते हुए मेरी मम्मी को लाइब्रेरियन की नौकरी पर हमारे स्कूल में लगवा दिया था। अब उसकी वजह से मेरी और मेरी मम्मी की पैसों की वो समस्या खत्म हो गयी थी, जिसकी वजह से हम दोनों कुछ समय से बड़े परेशान थे और जब मेरे पापा ने हमारा साथ छोड़ा तब मेरी माँ दिखने में जवान थी।
फिर करीब दो महीने तक तो मेरी मम्मी मेरे साथ ही स्कूल जाती और वो वापस भी आ जाती थी, लेकिन फिर समय बीत जाने के साथ साथ ही अब मेरी मम्मी एक सप्ताह में दो से तीन बार स्कूल बंद होने के बाद भी पुस्तकालय में ही रुककर काम किया करती थी और में अकेला अपने घर आ जाता था और मम्मी करीब दो तीन घंटो के बाद ही आती थी। फिर उस दिन भी में स्कूल से अपने घर आ चुका था और मेरी मम्मी स्कूल में ही रुक गयी थी। दोस्तों हमारा घर मेरे स्कूल से बीस मिनट की पैदल दूरी पर था और फिर अपने घर पहुंचकर मुझे अचानक से याद आया कि घर की चाबी मम्मी के ही पास है। फिर में मम्मी से चाबी लेने के लिए वापस स्कूल की तरफ चल पड़ा और फिर स्कूल पहुंचकर मैंने देखा कि स्कूल का मुख्य दरवाज़ा बंद था और दरवाजे पर खड़ा चौकीदार भी चला गया था। अब में उस दरवाजे के साथ वाली दीवार को कुदकर अपने स्कूल के अंदर चला गया और फिर में पुस्तकालय की तरफ चल दिया। फिर जैसे ही में पुस्तकालय के पास पहुँचा, उसी समय मुझे अपनी मम्मी की हंसने की आवाज सुनाई देने लगी थी और में तुरंत वहीं पर रुक गया। फिर मैंने छूकर महसूस किया कि पुस्तकालय का दरवाजा भी अंदर से बंद था, लेकिन वहां की एक खिड़की थोड़ी सी खुली हुई थी।
फिर मैंने उस खिड़की से अंदर झांककर देखा और उसके बाद में तो एकदम हैरान बड़ा चकित रह गया, क्योंकि मैंने देखा कि उस समय अंदर मेरी मम्मी बिल्कुल नंगी खड़ी हुई थी। दोस्तों वो अपने दोनों बूब्स को अपने हाथों से दबा रही थी और सामने वाले सोफे पर मेरे प्रधानाध्यापक जिसका नाम राकेश था वो भी नंगा सोफे पर बैठकर अपने लंड को एक हाथ से सहला रहा था और उसका लंड भी पूरा तनकर छ: इंच लंबा लग रहा था। अब मैंने देखा कि मम्मी उसके पास जाकर ज़मीन पर नीचे बैठकर उसके लंड को अपने एक हाथ से सहलाने लगी थी। फिर कुछ देर बाद राकेश ने मम्मी के सर को पकड़कर अपने खड़े लंड की तरफ झुका दिया और मम्मी ने भी तुरंत वो इशारा समझकर उसके लंड को अपने मुहं में ले लिया और वो अपने मुहं से उसके लंड पर ऊपर नीचे करने लगी और राकेश जोश में आकर लगातार अपने मुहं से मस्ती भरी आवाज़े निकाल रहा था और वो मम्मी के कन्धो पर हाथ फेर रहा था और मम्मी अपने एक हाथ से अपने बड़े आकार के लटकते हुए बूब्स को मसल रही थी। दोस्तों मैंने देखा कि वो सब करते हुए वो दोनों बहुत जोश मज़े से उस काम को खुश होकर कर रहे थे।
अब मेरी मम्मी उस लंड को लोलीपोप की तरह चूस रही थी और बीच बीच में वो लंड को पूरा मुहं से बाहर निकालकर उसके टोपे पर अपनी जीभ को फेर रही थी, जैसे वो आईसक्रीम को अपनी जीभ से चाट रही हो। दोस्तों में पहली बार अपनी सतीसावित्री माँ का वो बदला हुआ रूप देखकर बड़ा चकित था और मुझे अपनी आँखों पर कुछ देर तक बिल्कुल भी विश्वास नहीं हुआ, क्योंकि मेरी माँ किसी अनुभवी रंडी की तरह बड़ी ही खुश होकर वो सब काम कर रही थी। अब राकेश उस मस्ती में बिल्कुल पागल हो गया और उसने मम्मी के चेहरे को अपने दोनों हाथों में पकड़ा और फिर अपने कूल्हों को उठा उठाकर वो मम्मी के मुहं को किसी चूत की तरह धक्के देकर चोदने लगा था। दोस्तों उसका लंड मेरी मम्मी के मुहं में पूरा अंदर जाकर मुझे उनके गले तक नजर आ रहा था, जिसकी वजह से मेरी माँ की सांसे रुकने लगी और उनकी आँखों से आंसू बाहर आने लगे थे और वो कुछ देर ऐसे ही मम्मी के मुहं में अपने लंड को अंदर बाहर करता रहा। फिर कुछ देर बाद मम्मी खड़ी हो गयी, जिसकी वजह से राकेश का लंड उनके मुहं से बाहर आ गया वो मम्मी के मुहं के थुक की वजह से पूरा चमक रहा था। अब मम्मी सोफे पर चड़कर कुतिया की तरह अपने हाथों पैरों पर बैठकर उसकी तरफ देखकर उसके सामने अपने कूल्हों को हिलाने लगी थी।


फिर राकेश मेरी माँ की तरफ मुस्कुराते हुए खड़ा हुआ और फिर वो मम्मी के पीछे आ गया और अब उसने मम्मी के कूल्हों पर दो थप्पड़ मारे जिसकी वजह से कूल्हे और भी ज़ोर से हिलने लगे और मम्मी ने दर्द की वजह से हल्की से आह भरने लगी। अब राकेश ने अपने दोनों हाथों से मम्मी के दोनों मोटे मोटे कूल्हों को पूरा फैला दिया और फिर उसने अपनी कमर को आगे की तरफ एक ज़ोर का झटका दे दिया, जिसकी वजह से उसका लंबा मोटा लंड मम्मी की चूत में चला गया। दोस्तों उस तेज धक्के की वजह से हुए दर्द से मम्मी की हल्की सी दर्द भरी चीख निकल गयी ऊईईइ आह्ह्ह माँ मर गई प्लीज थोड़ा धीरे करो, क्या में कहीं भागी जा रही हूँ जो इतना जल्दी कर रहे हो? फिर उसने बिना कुछ कहे एक और तेज धक्का लगा दिया, जिसकी वजह से उसका पूरा लंड मम्मी की चूत में चला गया और मम्मी दर्द की वजह से करहाने लगी, लेकिन राकेश ने बिना ध्यान दिए अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया। दोस्तों वो अब मम्मी से कहने लगा कि मेरी जान अब तो तुम्हारी चूत को मेरे लंड की आदत हो जानी चाहिए, इतनी बार लेने के बाद भी तुम्हारा यह नाटक नखरा पहले जैसा ही है। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।
अब माँ ने सिसकियाँ लेते हुए कहा कि वो सब ठीक है, लेकिन अगर तुम धीरे धीरे आराम से अंदर बाहर करोगे, तब मुझे दर्द का पता भी नहीं चलेगा। अब वो कहने लगा कि हाँ ठीक है मुझे माफ करना में दोबारा यह गलती नहीं करूंगा और वो धीरे धीरे धक्के देने लगा था, जिसकी वजह से अब उसका लंड बड़े आराम से चूत के अंदर बाहर होने लगा था और मम्मी भी जोश में आकर मस्ती भरी आवाज़े निकाल रही थी और वो अपने कूल्हों को राकेश के हर एक धक्के के साथ आगे पीछे करते हुए अपनी चुदाई करवाने लगी थी। अब राकेश ने अपने एक हाथ को आगे बढ़ाकर मम्मी के लटकते हुए बूब्स को मसलना शुरू कर दिया था और अब राकेश मम्मी की चूत में अपने लंड से झटके बड़ी तेज़ी के साथ पूरे जोश में आकर मस्त चुदाई के मज़े ले रहा था। अब उसकी वजह से दर्द से मम्मी के मुहं से आह्ह्ह्ह ऊउईईईई की आवाज निकल रही थी, लेकिन मम्मी फिर भी पूरा पूरा साथ दे रही थी और उनको धक्के खाने में दर्द के साथ ही बड़ा मज़ा भी आ रहा था। उनके चेहरे से साफ झलक रहा था कि वो लंड को अपने अंदर लेकर कितना खुश थी।
फिर दस मिनट तक मम्मी को वैसे ही कभी तेज और कभी हल्के धक्के देकर चुदाई करने के बाद राकेश ने अपना लंड मेरी माँ की चूत से बाहर निकाल लिया था। अब वो खड़ा हो गया था और मम्मी तुरंत ही सोफे से नीचे उतरकर नीचे बैठकर उसके लंड को अपने मुहं में भरकर बड़े ही आराम से एक अनुभवी रंडी की तरह लंड को चूसने लगी थी। फिर राकेश ने मम्मी के सर को कसकर पकड़ा और फिर वो ज़ोर ज़ोर से झटके मारने लगा था और कुछ देर बाद ही उसका पूरा शरीर तनाव में आ गया था, शायद वो अब झड़ने लगा था। अब मम्मी उसके लंड से निकल रहे वीर्य को चूसकर गटक रही थी और मम्मी का मुहं वीर्य से पूरा भर चुका था, इसलिए वीर्य बाहर भी निकलने लगा था। दोस्तों अगले दो मिनट तक वो दोनों उसी तरह से मज़े ले रहे थे और मम्मी ने कुछ देर बाद लंड को जब अपने मुहं से बाहर निकाला तब मैंने देखा कि वो लंड अब तक मुरझा चुका था और वो मम्मी के चूसने चाटने की वजह से बड़ा चमक भी रहा था। अब मम्मी उठकर खड़ी हो गयी और वो दोनों एक दूसरे को एक पल देखने के बाद चूमने लगे थे। फिर उसके बाद उन दोनों ने अपने कपड़े पहने और वो सोफे पर बैठ गये।
अब राकेश मेरी माँ से कहने लगा कि सरिता कल हमारे स्कूल के फाउंडर हरीश पहली बार यहाँ पर आ रहे और अगर तुमने कल उनको भी इस तरह से खुश कर दिया, तो तुम समझो की तुम्हारी नौकरी हमेशा के लिए यहीं पर पक्की हो जाएगी। अब मम्मी कहने लगी कि मैंने अपनी इस नौकरी के लिए तुमसे पहली बार अपनी चुदाई करवाई है और आज में इस पद पर हूँ और अगर मुझसे उसके भी आगे बढ़ने का मौका मिलेगा और उसके लिए मुझे हरीश से भी चुदाई करवानी पड़ी तो में खुश होकर वो भी काम जरुर करना पसंद करूंगी। अब राकेश मेरी माँ का जवाब सुनकर खुश होकर कहने लगा कि हाँ तो फिर ठीक है कल तुम्हारे घर पर रात को में उसको अपने साथ लेकर आ जाऊंगा और हमारे आने से पहले ही तुम विकास को सुला देना। फिर मम्मी ने भी खुश होकर कहा कि हाँ ठीक है में सभी काम पूरा करके तुम्हारा इंतजार करूंगी और इतना कहकर वो एक दूसरे के गले से लगकर चूमते हुए प्यार करने लगे और फिर में उन दोनों की वो बातें सुनकर वहां से हटकर वापस अपने घर आ गया और आते समय पूरे रास्ते में चुदाई का जो खेल मैंने कुछ देर पहले देखा था, उसके बारे में सोचने लगा और फिर अगले दिन होने वाली उस चुदाई को कैसे देखना है? में अब मन ही मन उसके इंतज़ाम के बारे में भी सोचने लगा था।
दोस्तों यह था मेरी चुदक्कड़ माँ की चुदाई का सच जिसको देखकर मेरे होश अपने ठिकाने पर नहीं थे मेरी माँ की पहली चुदाई को देखकर मुझे पता चला कि जो भी ऊपर से जैसा नजर आता है वो अंदर से कुछ अलग निकलता है। दोस्तों मुझे उम्मीद है कि सभी पढ़ने वालो को यह सेक्स अनुभव जरुर पसंद आया होगा ।।
धन्यवाद …
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Thursday, 9 November 2017

स्कूल में मैंने माँ की चुदाई प्रिंसीपल से होते देखी

में मैंने बताया कि मुझे पता चल गया था कि मेरी मम्मी हर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को स्कूल में छुट्टी के बाद बच्चों की पढा़ई के बहाने चुदाई करती है।
और मम्मी के बारे भी बताया कि उनका रंग गोरा, आँखों एवं बालों का रंग काला और बूब्ज़ काफी बड़े-बड़े और गोल हैं। उनकी फिगर का नाप 36डी-28-36 है और कद 5 फीट 6 इंच है। मम्मी की जांघें भरी हुई और बदन में कसावट है। मम्मी के बूब्ज़ और गांड बाहर को उभरे हुए तथा पेट समतल है। मम्मी की नाभि गहरी और बदन बहुत सेक्सी है।
सोमवार की चुदाई देखने के बाद मैं समझ चुकी थी कि मेरी मम्मी सिर्फ शराफत का नाटक करती है असल में बहुत बड़ी चुदक्कड़ छिनाल औरत है।
बुधवार को मैं जैसे ही घर आई, जल्दी से कपड़े बदल कर साईकिल उठा कर मम्मी के स्कूल की तरफ हो गई। मैंने साईकिल छुपा दी और अंदर देखा, वहाँ मम्मी की स्कूटी नहीं थी और मैं जल्दी से जाकर वहीं छुप गई।
मेरे छिपने के 2 मिनट बाद ही रूम का दरवाजा खुला और लाईट जली, मुझे लगा मम्मी होगी लेकिन जब मैंने देखा तो स्कूल का प्रिंसीपल था।
मैं समझ गई कि आज मम्मी की चूत चुदाई प्रिंसीपल से होगी।
प्रिंसीपल का नाम सुनील था और उसकी आयु करीब 40 साल होगी। उसका रंग गोरा और चेहरा क्लीन शेव था। उसका कद करीब 5 फीट 7 इंच और दिखने में काफी सुंदर था। उसका जिस्म बहुत फिट और बाल देखकर लगता था कि डाई किए हुए हैं।
तभी मम्मी आ गई और बाहर से ही बोली- पानी पीकर आती हूँ।
मैं वाटर कूलर के पीछे छुप गई ताकि मम्मी न देख न ले।
मम्मी ने सलवार कमीज पहन रखी थी, मम्मी पानी पीकर एक बोतल में पानी भरा और चली गई लेकिन 10 मिनट तक रूम में नहीं गई और मैं वहीं बैठी अंदर देखती रही।
प्रिंसीपल ने जेब से चार सिगरेट निकाली और एक एक करके उनका तंबाकू निकाल कर उनमें कुछ मिला कर दोबारा सिगरेट में भर दिया।
तब मुझे मालूम नहीं था कि उसमें क्या डाला है लेकिन अब मालूम है वो चरस थी।
मम्मी जैसे ही रूम में घुसी, मैंने मम्मी को ध्यान से देखा। मम्मी ने लाल रंग की लिपस्टिक लगाई हुई थी और बाल खुले हुए थे। मम्मी ने छोटी सी काले रंग की स्कर्ट और छोटा सा गहरे गले का टॉप पहना हुआ था जिससे मम्मी की भरी हुई जांघें, चिकना पेट और टॉप के गले से आधी चुची दिख रही थी, मम्मी काले रंग के ऊंची एड़ी के सैंडिल पहने हुई थी।
मम्मी ने अंदर आते ही कहा- कैसी लग रही हूँ जान?
प्रिंसीपल ने मम्मी को देख कर कहा- बहुत सेक्सी लग रही हो!
फिर मम्मी घूम गई और गांड प्रिंसीपल की तरफ घुमा ली। ऊंची एड़ी से मम्मी की गांड और भी उभरी आई थी।
मम्मी ने फिर कहा- अब?
तो प्रिंसीपल बोला- सच में तुम सनी नहीं सनी लियोनी लग रही हो।
मम्मी बड़े सेक्सी तरीके से गांड हिलाते हुए प्रिंसीपल की तरफ आने लगी और मुझे भी मम्मी किसी पोर्न स्टार जैसी लग रही थी। मैं सोच रही थी मम्मी ऐसे कपड़े कहाँ से लाती हैं और कहाँ रखती हैं।
मम्मी प्रिंसीपल के पास पहुंच कर उसकी गोद में बैठ गई। प्रिंसीपल ने मम्मी से पूछा- सनी डार्लिंग सामान ले आई?
मम्मी बोली- ऐसे नहीं… अच्छे से पूछो!
प्रिंसीपल बोला- बोल न गश्ती गोली लाई? जो खुद खाकर मुझसे मां चुदवाती है और मैं खाकर तेरी बहन चोदता हूँ।
मम्मी भी उसी अंदाज़ में बोली- हाँ बहन के लौड़े… लाई हूँ और पूरा पत्ता लाई हूँ ब्रा में हाथ डालकर निकाल ले बहनचोद!
प्रिंसीपल ने मम्मी के टॉप में हाथ डालकर गोलियों का पत्ता निकाल लिया और बोला- सनी डार्लिंग, जब तू गाली देकर बात करती है तो बिल्कुल रंडी लगती है, तुझे चोदने का जोश दोगुना हो जाता है।

मम्मी बोली- सुनील, जब तू गाली देकर बात करता है तो तुझ पर बहुत प्यार आता है।
मम्मी ने पानी की बोतल उठाई और प्रिंसीपल ने पत्ता खोलकर दो गोली निकाल लीं। प्रिंसीपल ने अपने हाथ से मम्मी को और मम्मी ने प्रिंसीपल को गोली खिलाई।
मम्मी फिर से प्रिंसीपल की गोद में बैठ गई और बोली- सुनील, साले भड़वे सिगरेट में सामान भर लिया या नहीं?
तो प्रिंसीपल बोला- भर लिया मां की लौडी़, जब तू कपड़े बदलने गई थी तभी भर लिया था।
मम्मी बोली- फिर जलाई क्यूँ नहीं हराम के अभी तक? तेरे हाथ से बनी सिगरेट पीने के बाद जो नशा होता है वो अलग ही है। जो नशा तेरे साथ पीने में आता है घर में खुद बनाकर छुप कर पीने से नहीं होता।
उस दिन मुझे मम्मी की नई बात मालूम हुई कि मम्मी रोज शराब सिगरेट और चरस का नशा करती है।
मैं सोच रही थी आगे न जाने क्या क्या राज़ खुलेंगे और नया राज़ उसी वक्त खुल गया।
प्रिंसीपल ने अपनी जेब से लाल रंग के कैप्सूल का पत्ता निकाला और बोला- पहले ये खा ले हरामजादी, नहीं फिर मांगेगी।
मम्मी ने पांच कैप्सूल निकाल कर प्रिंसीपल को खिला दिए और पांच खुद खा गई।
कैप्सूल खाने के बाद मम्मी बोली- साले दल्ले, तू खुद तो ये नशा करता है और मुझे भी ये नशा लगा दिया। वैसे इस नशे का सरूर बहुत है और चुदाई का मजा आ जाता है।
प्रिंसीपल बोला- तू चुदाई से पहले खुद ही मांगती है, मैं कौन सा तुझे जबरदस्ती खिलाता हूँ, चल अब जल्दी से मां चुदवा और सिगरेट जला!
मम्मी ने सिगरेट उठाई और जला कर कश खींच लिया। मम्मी ने अपने हाथों से सिगरेट प्रिंसीपल के होंठों के बीच दे दी।
प्रिंसीपल ने कश लगाकर धुआं छोड़ते हुए और मम्मी की जांघों को सहलाते हुए पूछा- सनी डार्लिंग, तेरी बेटी कैसी है। जिस दिन मैं तेरे घर गया था उस देखा था उसको! साली मस्त माल लगती है, अभी से साली की चुची इतनी बड़ी हैं, दो साल में तेरे जितनी बड़ी हो जाएंगी।
मम्मी कश लगा कर सिगरेट प्रिंसीपल को देते हुई बोली- हाँ, उम्र के हिसाब से उसकी चुची और गांड काफी बड़ी हैं लेकिन बहनचोद तू उसके बारे क्यों पूछ रहा है?
प्रिंसीपल बोला- नहीं यूं ही!
मम्मी अचानक हंसने लगी, प्रिंसीपल ने कहा- क्या हुआ?जो बात मम्मी बोली मुझे यकीन नहीं हुआ, मम्मी बोली- साले हरामी, मैं जानती हूँ सब, मैंने उसी दिन तुझे देख लिया था कि तू अर्श की चुची और गांड को ललचाई नजरों से देख रहा था।
प्रिंसीपल बोला- तू साली एक नंबर की हरामखोर है और तेरी बेटी भी पूरी रंडी लगती है। अगर मेरा बस चलता तुझे और तेरी बेटी को अपनी रखैल बना लेता। मुझे लगता है तेरी बेटी चुदने लायक हो गई है।
मम्मी बोली- सब्र रख बहन के लौड़े… मुझे मालूम है मेरी बेटी के बारे में… मेरी जैसी रंडी ही निकलेगी और अगर तेरी किस्मत में हुआ तो चोद लेना।
ऐसे बातें करते करते वो दो सिगरेट पी गए और नशा उनके सिर चढ़ कर बोलने लगा।
तभी मम्मी ने कहा- आज डांस करने का मूड हो रहा है।
प्रिंसीपल ने कहा- तूने मेरे मुंह की बात छीन ली… तो हो जाए!

प्रिंसीपल ने लैपटॉप पर गाना लगा दिया और मम्मी बांहें ऊपर करके कमर लचका लचका कर डांस करने लगी, प्रिंसीपल उठ कर मम्मी के पास चला गया और मम्मी के गाल पर चूम लिया, उसने मम्मी की कमर में हाथ डाल लिए तथा मम्मी ने उसके कंधों पर हाथ रखे और डांस करने लगे।
गाना खत्म होने तक दोनों ने चिपक कर डांस किया।
प्रिंसीपल ने पूछा- क्यों री रंडी की औलाद, एक और गाना लगा दूं?
मम्मी बोली- रहने दे बहनचोद, अब बिना गाने के बारी बारी डांस करते हुए कपड़े निकालेंगे।
प्रिंसीपल बोला- ठीक है, बहुत मजा आएगा।
मम्मी ने प्रिंसीपल को कहा- चल कुत्ते की औलाद, पहले तू उतार!
प्रिंसीपल बहुत अच्छा डांस कर रहा था औऱ पहले उसने अपने जूते निकाल कर फेंक दिए, फिर वो बड़े सेक्सी अंदाज़ में कमर हिलाते हुए शर्ट के बटन खोलने लगा।
उसने ऐसे करते हुए अपनी शर्ट और बनियान उतार कर मम्मी पर फेंक दी मम्मी ने चूम कर साईड पर रख दी।
मैं उसकी सुडौल बांहें और चौड़ी छाती देख कर पागल सी हो गई, दिल कर रहा था अंदर जाकर उसकी छाती को चूम चूम कर अपने होंठों की प्यास बुझा लूं।
अब वो अपनी जींस खोलने लगा और मम्मी के बिल्कुल पास आ गया। मम्मी ने उसकी छाती पर हाथ घुमाया और बारी बारी दोनों निप्पलों को चूम लिया।
प्रिंसीपल ने पीछे होकर अपनी जींस निकालकर मम्मी पर फेंक दी और अब सिर्फ अंडरवियर में था। उसके लंड से अंडरवियर में तंबू बना हुआ था और बहुत लंबा लग रहा था।
उसने अपना अंडरवियर उतार कर मम्मी की तरफ उछाल दिया। मम्मी ने बड़े सेक्सी तरीके से अंडरवियर को सूंघने के बाद चूम लिया।
मैंने प्रिंसीपल का लंड देखा वो मेरी कल्पना से भी लंबा, मोटा और जानदार था।
वो मम्मी के पास आया और मम्मी ने उसके लंड को चूम लिया। मेरा दिल कर रहा था मैं प्रिंसीपल के लंड को जी भर के चूस लूं और उससे चुदाई करवा लूं!
मेरी चूत भी गीली हो गई थी।
प्रिंसीपल सोफे पर बैठ गया और मम्मी को बोला- चल छिनाल, अब तेरी बारी, दिखा अपने सेक्सी बदन का जलवा! लेकिन सैंडिल मत निकालना… तेरी उभरी हुई गांड बहुत कामुक लग रही है।
मम्मी उठकर डांस करने लगी। मम्मी बहुत कामुक लग रही और बड़े कामुक तरीके से गांड हिला कर डांस करने लगी। मम्मी ने अपना टॉप निकालकर फेंक दिया और अपनी कमर को गोल गोल घुमा कर डांस करने लगी।
तभी मम्मी ने अपनी स्कर्ट की हुक खोलकर निकाल दी, अब मम्मी लाल ब्रा, लाल पैंटी और काले सैंडिल में थी।
मम्मी डांस करते-करते प्रिंसीपल के पास गई और उसकी तरफ गांड कर ली। प्रिंसीपल ने मम्मी की गांड पर चपत लगाई और ब्रा की हुक खोल दी।
मम्मी ने पीछे होकर बड़े स्टाइल से ब्रा निकालकर प्रिंसीपल के कान पर लटका दिया और फिर पैंटी निकालकर प्रिंसीपल को लंड पर लपेट दी।
प्रिंसीपल ने मम्मी के ब्रा और पैंटी को चूमा और टेबल पर रख दिया।
मम्मी अब बिल्कुल नंगी काले सैंडिल में चुची और गांड को हिलाते हुए शरारती मुस्कान चेहरे पर लाकर डांस कर रही थी।
मम्मी ने डांस करना बंद कर दिया और प्रिंसीपल को उंगली से इशारा कर के पास बुलाया।
जैसे ही प्रिंसीपल मम्मी के पास पहुंचा मम्मी उससे कसकर लिपट गई। मम्मी की बड़ी-बड़ी चुची प्रिंसीपल की छाती में गड़ गई और प्रिंसीपल का लंड मम्मी की चूत पर ठोकर मारने लगा।
दोनों ने एक-दूसरे को बाहों में कस कर भींच लिया, वो दोनों ऐसे आपस में चिपके हुए थे कि उनके बीच हवा भी नहीं निकल सकती थी।
कुछ देर ऐसे चिपके रहने के बाद वो एक-दूसरे की पीठ सहलाने लगे और मम्मी ने अपने होंठों को प्रिंसीपल के होंठों से मिला दिया। दोनों एक दूसरे के होंठों का रसपान करने लगे। एक दूसरे को चूमते वक्त मम्मी प्रिंसीपल की पीठ सहला रही थी और प्रिंसीपल मम्मी के उभरे हुए चूतड़ दबा रहा था।
इसी बीच मम्मी हिल हिल कर अपनी चुची प्रिंसीपल की छाती से रगड़ रही थी।
पहले तो आराम से एक-दूसरे को चूम रहे थे और फिर बहुत जोर से चूमने लगे। वो एक दूसरे होंठों को मुंह लेकर जोर से चूसते और हल्का हल्का दांतों से काटने लगे। वो एक दूसरे के मुंह में जीभ डालकर घुमाने और चूसने लगे।
इसी बीच प्रिंसीपल अपनी दो उंगली मम्मी की गांड के छेद में घुसा कर धीरे-धीरे हिलाने लगा। मम्मी का जोश और बढ़ गया और वो और जोर से चूमने लगी।
वो इतने जोर शोर से एक दूसरे को चूम रहे थे कि रूम से पुच्च पुच्च की आवाज़ आने लगी। मम्मी और प्रिंसीपल एक दूसरे के गालों, कानों और गर्दन के नीचे चूमते हुए गर्म हो रहे थे।
प्रिंसीपल कुर्सी पर बैठ गया और मम्मी उसके सामने खड़ी हो गई। मम्मी ने झुककर प्रिंसीपल के होंठों को चूमा और फिर उसके खड़े लंड पर चुम्मा लेकर सीधा खड़ी हो गई।
प्रिंसीपल ने मम्मी की तनी हुई चुची को हाथों में पकड़ कर दबाना चालू कर दिया और मम्मी उसके बालों में हाथ घुमाने लगी।
प्रिंसीपल बहुत जोर से मम्मी के स्तन मसल रहा था और मम्मी के हल्के भूरे निप्पलों को भी खींच देता। मम्मी बहुत मजे से अपने स्तन मसलवा रही थी और जब प्रिंसीपल मम्मी के निप्पलों को पकड़ कर खींच लेता तब मम्मी बहुत ही कामुक आहह भरते हुए प्रिंसीपल के बालों को भींच लेती।
अब प्रिंसीपल मम्मी के बूब्ज़ को चूसने लगा और वो बहुत जोर से मम्मी के बूब्ज़ मुंह में भरकर खींच लेता। जब वो मम्मी के बूब्ज़ खींच कर छोड़ता तो फच्च की आवाज़ आती।
प्रिंसीपल मम्मी के निप्पलों को भी बहुत जोर जोर से चूसने लगा और एकदम बेरहम हो गया। वो मम्मी को बूब्ज़ को बहुत बेरहमी से चूसने लगा और निप्पलों पर दांत गड़ाने लगा। जितना वो बेरहम हो रहा था उतना ही मम्मी को मजा आ रहा था और उतनी ही कामुक आहें मम्मी के मुंह से निकल रही थीं।
अब प्रिंसीपल मम्मी के पेट को चाटने लगा और गहरी नाभि में जीभ डालकर घुमाने लगा। प्रिंसीपल ने मम्मी की टांगें खोल दीं और पेट चूमते चूमते हाथ से मम्मी की चूत मसलने लगा। मम्मी बहुत ही कामुक आवाज़ें निकालती हुई मचलने लगी।
मचलते मचलते मम्मी अचानक बोली- वैसे तो शक्ल से तू अपने बाप की औलाद नहीं लगता लेकिन जिस तरह से मेरे बूब्ज़ चूसता है, पेट को चूमते हुए चूत मसलता है और मुझे चोदता है उससे तू उसी की औलाद लगता है।
मम्मी फिर बोली- तेरा लंड भी तेरे बाप जितना ही लंबा और मोटा है।
प्रिंसीपल ने मम्मी के पेट चूमना छोड़ कर पूछा- तुझे कैसे मालूम?
मम्मी हंसती हुई बोली- जब मेरी परीक्षा में उस स्कूल में ड्यूटी लगी थी यहाँ तेरा बाप टीचर था और तूने ही मिलवाया था। तब उसने मुझे कई बार चोदा था।
प्रिंसीपल बोला- लगता है मुझे वही औरत मिलती है जो मेरे बाप से भी चुद जाती है। पहले मेरी बीवी और अब तुम… मेरा बाप मेरी बीवी को तो रोज रोज चोदता है। पहले मैंने सोचा कि मेरी मां के बाद मेरा बाप अकेला रहा है अगर मेरी बीवी को कभी कभी चोद लेगा तो क्या जाता है। अब हम तीनों एक बिस्तर पर सोते हैं और बाप बेटा मिलकर उसको चोदते हैं, बहुत मजा आता है। सनी डार्लिंग लेकिन उतना नहीं जितना तुझे चोद कर आता है।
प्रिंसीपल ने मम्मी को बैड पर चलने को बोला और खुद बैड लेट गया। मम्मी उसके ऊपर 69 अवस्था में आ गई। मम्मी की चूत प्रिंसीपल के होंठों के पास थी और प्रिंसीपल का लंड मम्मी के होंठों के पास!
मम्मी ने अपनी गांड नीचे कर के चूत प्रिंसीपल के मुंह पर लगा दी और मुंह खोलकर प्रिंसीपल का लंड अपने मुंह में भर लिया।
प्रिंसीपल अपनी जीभ मम्मी की चूत में डालकर चाटने लगा और मम्मी अपनी गर्दन ऊपर-नीचे करके प्रिंसीपल का लंड चूसने लगी। प्रिंसीपल बहुत जोर से मम्मी की चूत चाट रहा था और मम्मी बहुत तेज़ी से लंड चूस रही थी।
मम्मी प्रिंसीपल का लंड गले की गहराई में लेकर चूस रही थी। उनकी गति इतनी थी को बहुत जोर जोर से सपड़ सपड़ और गपप गपप की आवाज़ें आने लगी।
अचानक मम्मी को बहुत जोश आ गया और वो प्रिंसीपल के चेहरे पर बहुत जोर से चूत मसलने लगी। कुछ देर बाद उसी अवस्था में प्रिंसीपल ने मम्मी को नीचे ले लिया और मम्मी के मुंह में गांड उठा उठाकर अपना लंड पेलने लगा।
जब प्रिंसीपल मम्मी के मुंह में झटका मारता तो पूरा लंड मम्मी के मुंह से होता हुआ उनके गले में उतर जाता। प्रिंसीपल कुछ देर मम्मी के गले में लंड फंसा कर रखता और बाहर खींच लेता।
मम्मी लंबा सांस लेती और फिर झटके से लंड मम्मी के गले की गहराई में होता।
कुछ देर बाद प्रिंसीपल ने पूछा- सनी डार्लिंग, कहाँ से शुरू करें?
मम्मी बोली- हर बार चूत से शुरू करते हैं, आज गांड से करते हैं।
मम्मी टेबल पर हाथ रखकर झुककर खड़ी हो गई, प्रिंसीपल ने मम्मी की गांड के छेद पर और अपने लंड पर तेल लगा लिया, अपना लंड मम्मी की गांड के छेद पर रखा तो मम्मी बोली- धक्का इतनी जोर से मारना कि लंड एक बार में ही गांड फाड़कर अंदर घुस जाए।
प्रिंसीपल अपना लंड मम्मी की गांड पर रगड़ते हुए बोला- यही तेरी अदा मार डालती है। बाकी सब धीरे धीरे करने को बोलती हैं और तू एक बार में घुसाने को बोलती है। तभी तुझे चोदने में सबसे ज्यादा मजा आता है।
उसने बहुत जोरदार शॉट मारा और एक बार में ही प्रिंसीपल का लंबा मोटा लंड मम्मी की गांड में समा गया।
मम्मी के मुंह से बहुत जोरदार चीख निकली और प्रिंसीपल मम्मी की गांड में अपना लंड तेज़ी से अंदर-बाहर करने लगा। मम्मी बहुत जोर से चिल्ला रही थी, बोल रही थी- फाड़ दे मेरी गांड… आहह आआहहह बहुत मजा आ रहा है जानू और जोर से फाड़ साली को! बहुत लंड खाती है।
मम्मी के चिल्लाने से प्रिंसीपल का जोश और बढ़ गया और वो ज्यादा तेज़ी से और ज्यादा जोरदार शॉट से मम्मी की गांड चोदने लगा। मम्मी अपनी गांड गोल गोल घुमा कर गांड चुदाई का मजा लेने लगी।
प्रिंसीपल ने मम्मी की गांड से लंड निकालकर चूत के छेद पर टिका दिया और जोरदार शॉट से मम्मी की चूत में पेल दिया। मम्मी की चीखने चिल्लाने का दौर प्रिंसीपल के धक्का मारने से फिर शुरू हो गया। प्रिंसीपल ने मम्मी को बालों से पकड़ लिया और पीछे से मम्मी की चूत जोर जोर से चोदने लगा।
मम्मी भी अपनी गांड को तेज़ी से आगे पीछे करके चुद रही थी। पूरा रूम मम्मी एवं प्रिंसीपल की कामुक आंहों और फच्च… फच्च… की आवाजों से गूंज रहा था। मम्मी के बूब्ज़ भी धक्कों की गति से उछल-कूद कर रहे थे, बालों से पकड़ कर पीछे से मम्मी की चूत चुदाई ऐसे लग रही थी जैसे मम्मी घोडी़ हो और प्रिंसीपल उनकी सवारी कर रहा हो।
प्रिंसीपल और मम्मी बहुत जोरदार चुदाई कर रहे थे और मैं अपनी चूत में दो ऊंगलियां डाले हुए हिला रही थी।
प्रिंसीपल ने मम्मी को बैड पर उल्टा लेटाकर पेट के नीचे तकिया रख दिया और मम्मी के गांड की फांकें खोलकर लंड गांड के छेद पर रख दिया, उसने हाथ बैड पर रखकर जोर से अपनी गांड नीचे धकेल दी और लंड मम्मी की गांड में समा गया। प्रिंसीपल मम्मी की गांड में लंड पेलने लगा और मम्मी भी अपनी गांड ऊपर-नीचे कर के गांड में लंड अंदर-बाहर करने लगी।
मेरी गांड में भी खुजली होने लगी और मैं एक उंगली गांड की तरफ की।
तभी मुझे वहाँ आधी जली हुई मोटी मोमबत्ती दिखाई दी जो कम से कम डेढ़ इंच मोटी होगी और मैंने अच्छे से साफ करके थूक लगा कर गांड में ले लिया।
इधर प्रिंसीपल मम्मी की गांड बहुत जोर से बजा रहा था, उसने मम्मी को सीधा किया और मम्मी की टांगें चौड़ी कर लीं। उसने मम्मी के ऊपर आ कर मम्मी की चूत मे लंड पेल दिया और जबरदस्त शॉट मार कर मम्मी की चूत चोदने लगा।
मम्मी भी नीचे से गांड पटक पटक कर चुदाई करवाने लगी और मम्मी ने प्रिंसीपल के गले में बांहें डालकर उसके होंठों से अपने होंठ मिला दिए, प्रिंसीपल ऊपर से मम्मी के होंठ चूसते हुए उछल उछल कर मम्मी की चूत चुदाई कर रहा था और मम्मी नीचे से उसके होंठ चूसते हुए गांड उठा उठाकर चुदाई करवा रही थी।
वो दोनों बैड से उतर गए और मम्मी मम्मी दीवार के पास चली गई। मम्मी अपने बूब्ज़ दीवार से सटा कर अपनी गांड की फांकें अपन।गांड चुदाई का आनन्द ले रही थी।
अब प्रिंसीपल ने मम्मी की गांड से लंड निकालकर मम्मी को घुमा दिया। प्रिंसीपल ने अपनी एक बाजू मम्मी की टांग में डालकर मम्मी की टांग ऊपर उठा ली और मम्मी दीवार के सहारे खड़ी हो गई।

प्रिंसीपल ने ऐसे खड़े-खड़े मम्मी के होंठों पर होंठ रखकर मम्मी की चूत में लंड पेल दिया। मम्मी ने प्रिंसीपल के होंठ चूसते हुए उसके गले में बांहें डाल लीं। प्रिंसीपल जोर जोर से मम्मी की चूत बजाने लगा और मम्मी उसके होंठों को चूसते हुए जोर जोर से प्रिंसीपल की पीठ मसलने लगी।
एकाएक प्रिंसीपल की धक्के मारने की गति बहुत तेज़ हो गई और मम्मी भी बहुत तेज़ी से एवं ऊंची कामुक चीखें मारने लगी। मम्मी ने बहुत जोर से प्रिंसीपल की पीठ को बाहों में भींच लिया और बहुत जोर से गांड हिलाते हुए जोरदार चीख के साथ हाथ ढीले छोड़ दिए।
तभी प्रिंसीपल ने मम्मी की चूत से लंड निकाला और मम्मी नीचे बैठ गई। मम्मी ने लपक कर प्रिंसीपल का लंड मुंह में ले लिया और प्रिंसीपल मम्मी के मुंह में झटके मारने लगा।
8-10 प्रिंसीपल का जिस्म अकड़ने लगा और उसने मम्मी का सिर पकड़ कर लंड मम्मी के गले में उतार दिया। अब उसकी गांड धीरे धीरे चल रही थी और आहह आआहह करते हुए उसका जिस्म भी ढीला पड़ गया।
उसने मम्मी के मुंह से लंड निकाल लिया और उसके लंड से अभी भी कुछ वीर्य टपक रहा था। मम्मी ने जीभ से चाट कर वो भी साफ कर दिया और दोनों सोफे पर बैठ गए।
दोनों ही हाँफ रहे थे और पसीने से दोनों भीग चुके थे।
प्रिंसीपल ने मम्मी से कहा- यार सनी, तेरे साथ चुदाई की वासना बुझा कर जो संतुष्टि मिलती है वो अपनी बीवी या किसी और औरत से नहीं मिलती। सच में यार, तू बहुत गर्म है और परले सिरे की चुदक्कड़ रंडी है।
दोनों ने एक-दूसरे को चूमा और टॉवेल से पसीने को साफ करने लगे।
मैं वहाँ से निकल आई और मम्मी से पहले घर पहुंच गई।
शुक्रवार को मम्मी ने क्या गुल खिलाये, वो अगली कहानी में
प्रिंसीपल मम्मी के पीछे खड़ा हो गया और पीछे से मम्मी के बूब्ज़ पकड़ कर मम्मी की गांड के छेद पर लंड रख दिया। उसने अपनी गांड को थोडा़ पीछे खींच कर जोर से आगे को धक्का मारा और लंड मम्मी की गांड में गुम सा हो गया।
प्रिंसीपल पीछे से मम्मी के बूब्ज़ दबाते हुए मम्मी की गर्दन को चूमते हुए मम्मी की गांड चोदने लगा और मम्मी भी दीवार पर हाथ रखकर अपनी गांड आगे-पीछे कर के गांड चुदाई का आनन्द ले रही थी।
अब प्रिंसीपल ने मम्मी की गांड से लंड निकालकर मम्मी को घुमा दिया। प्रिंसीपल ने अपनी एक बाजू मम्मी की टांग में डालकर मम्मी की टांग ऊपर उठा ली और मम्मी दीवार के सहारे खड़ी हो गई।
प्रिंसीपल ने ऐसे खड़े-खड़े मम्मी के होंठों पर होंठ रखकर मम्मी की चूत में लंड पेल दिया। मम्मी ने प्रिंसीपल के होंठ चूसते हुए उसके गले में बांहें डाल लीं। प्रिंसीपल जोर जोर से मम्मी की चूत बजाने लगा और मम्मी उसके होंठों को चूसते हुए जोर जोर से प्रिंसीपल की पीठ मसलने लगी।
एकाएक प्रिंसीपल की धक्के मारने की गति बहुत तेज़ हो गई और मम्मी भी बहुत तेज़ी से एवं ऊंची कामुक चीखें मारने लगी। मम्मी ने बहुत जोर से प्रिंसीपल की पीठ को बाहों में भींच लिया और बहुत जोर से गांड हिलाते हुए जोरदार चीख के साथ हाथ ढीले छोड़ दिए।
तभी प्रिंसीपल ने मम्मी की चूत से लंड निकाला और मम्मी नीचे बैठ गई। मम्मी ने लपक कर प्रिंसीपल का लंड मुंह में ले लिया और प्रिंसीपल मम्मी के मुंह में झटके मारने लगा।
8-10 प्रिंसीपल का जिस्म अकड़ने लगा और उसने मम्मी का सिर पकड़ कर लंड मम्मी के गले में उतार दिया। अब उसकी गांड धीरे धीरे चल रही थी और आहह आआहह करते हुए उसका जिस्म भी ढीला पड़ गया।
उसने मम्मी के मुंह से लंड निकाल लिया और उसके लंड से अभी भी कुछ वीर्य टपक रहा था। मम्मी ने जीभ से चाट कर वो भी साफ कर दिया और दोनों सोफे पर बैठ गए।
दोनों ही हाँफ रहे थे और पसीने से दोनों भीग चुके थे।
प्रिंसीपल ने मम्मी से कहा- यार सनी, तेरे साथ चुदाई की वासना बुझा कर जो संतुष्टि मिलती है वो अपनी बीवी या किसी और औरत से नहीं मिलती। सच में यार, तू बहुत गर्म है और परले सिरे की चुदक्कड़ रंडी है।
दोनों ने एक-दूसरे को चूमा और टॉवेल से पसीने को साफ करने लगे।
मैं वहाँ से निकल आई और मम्मी से पहले घर पहुंच गई।
शुक्रवार को मम्मी ने क्या गुल खिलाये, वो अगली कहानी में!
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Tuesday, 7 November 2017

जिंदगी का सबसे यादगार दिन -Hindi Sex Stories

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हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम कुसुम है। में कॉलेज में Ist ईयर में पढ़ती हूँ। मेरा फिगर 34-28-34 है और मेरे घर में मेरे मम्मी पापा और भैया है। मेरी उम्र 19 साल की है, रंग गोरा, चूची गोल है। मैंने पहले लिखा था कि कैसे कॉलेज टूर पर मेरी और हेमा की राजेश, संदीप और जितेन्द्र ने खूब चुदाई की। अब हम दोनों उन तीनों की बिना शादिशुदा वाईफ की तरह रह रही थी। अब हम दोनों उनसे पूरी तरह से खुल गयी थी और अब हम पूरी तरह से गंदी भाषा का उपयोग करते थे। उन तीनों ने पूरे टूर पर हम दोनों को नाम लेकर नहीं बुलाया था और वो गाली से ही बुलाते थे। अब हमें भी मज़ा आता था, अब हम टूर से वापस आ गये थे और अब हमारी कॉलेज में ही मुलाक़ते होती थी। अब जब भी उन तीनों में से किसी को मौका मिलता था, तो वो हमारी चुदाई कर लेते थे। अब जितेन्द्र भी हमारे ग्रूप में शामिल हो गया था, मुझे जितेन्द्र के साथ ही ज्यादा मज़ा आता था। अब एक बार हम पाँचो कैंटीन में बैठे थे, जब सर्दी बहुत थी।
राजेश : हरामजादियों तुम्हारी चूत मारे बहुत दिन हो गये है।
हेमा : कॉलेज में तो नाम लेकर बोला करो।
संदीप : रंडियों के नाम नहीं होते है।
में : हम तो तुम्हारी रंडिया है।
जितेन्द्र : कुसुम, जब तुम्हारी चूत में लंड होता है तो तब तो बड़ी बोलती है कि में रंडी हूँ, हरामजादी हूँ।
में : हाँ यार तब पता नहीं मुझे क्या हो जाता है? मेरा मन करता है कोई मुझे गालियां दे, मुझे मारे, मुझे सच में ही कुतिया बना दे।
जितेन्द्र : चलो आज तुम अपनी सेक्स की इच्छा बताओं।
हेमा : कोई खास नहीं, बस मेरी चूत चूसे और कुछ खास नहीं।
जितेन्द्र : तुम्हारी कुसुम?
में : यार वैसे तो कोई खास नहीं, लेकिन कभी–कभी में जब बहुत गर्म होती हूँ तो मेरी बड़ी इच्छा होती है कि 3-4 लंड मेरी खूब चुदाई करे, मुझको गालियाँ दे, जो में कहूँ उसका उल्टा करे, मुझे सेक्स में रुला दे।
हेमा : चाहे वो अंजान हो?
में : यार मुझे करना थोड़े ही है, में तो इच्छा बता रही हूँ।
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फिर हम बस ऐसे ही बातें करते रहे और वो तीनों हमें छेड़ते रहे और हम भी मज़े लेते रहे। फिर जितेन्द्र चला गया और हम भी क्लास में चले गये। फिर 3-4 दिन बीत गये और फिर जितेन्द्र की कॉल आई और बोला कि आज घर कोई नहीं है, तुम आ जाओ, तो मैंने कहा कि ठीक है में हेमा को लेकर आ जाऊंगी, तुम राजेश और संदीप को फोन कर दो। तो वो बोला कि नहीं आज तुम अकेली आओ और हाँ 2-3 घंटे के लिए घर पर बोलकर आना। फिर मैंने कहा कि क्या बात है? इरादा तो ठीक है ना। तो वो बोला कि 1 बजे में घर पर इंतजार करूँगा। तो तभी में ठीक 1 बजे अपनी स्कूटी से उसकी कोठी पर पहुँच गयी। फिर में अंदर चली गयी, उसकी कोठी बहुत बड़ी थी। फिर वो मुझे अपने बेडरूम में ले गया, उसका बेडरूम क्या था? इतना शानदार मैंने कभी सपने में भी नहीं देखा था, बहुत बड़ा बेड और चारो तरफ शीशे और बेड के बिल्कुल ऊपर गोल शीशा था।
फिर मैंने पूछा कि ये तुम्हारा बेडरूम है। तो वो बोला कि नहीं जान ये रंडीखाना है, इस बेड पर मेरे पापा से मेरी मम्मी चुदती है या मेरी गर्लफ्रेंड मुझसे और आज तुम्हारी बारी है। तो में मुस्कराने लगी और बोली कि ओके, आई एम रेडी जानू, आओं चले। तो तभी वो बोला कि अभी नहीं, अभी तुम्हारे लिए सर्प्राइज है। तो में चौक पड़ी क्या? तो उसने फोन मिलाया और बोला कि आ जाओ। तो में बोली कि कौन आ रहा है? तो वो बोला कि जान आज तुम्हारी इच्छा पूरी करनी है। फिर मैंने पूछा कि कौनसी इच्छा? तो वो बोला कि गाली वाली, तुम्हें रुलाने वाली। दोस्तों में डर गयी और बोली कि नहीं यार वो तो मैंने ऐसे ही कहा था। तभी वो बोला कि नहीं आज तो तुझे रंडी बना दूँगा। तभी इतने में डोरबेल बजी, तो उसने गेट खोला। अब 2 लड़के 32-33 साल के उसके साथ अंदर आ गये थे, उसने पहले ही उनको मेरी इच्छा के बारे में बता दिया था।
फिर वो बोला कि इनसे मिलो ये राज और दूसरा समीर है, वो दोनों लंबे और साँवले थे। फिर वो आते ही बोले कि तो ये है वो हरामजादी, ये तो बड़ी नाज़ुक सी है। तभी जितेन्द्र बोला कि ये बहुत दमदार है, ये हम तीनों दोस्तों की बीवी है, आज ये पांचाली बन जाएगी। तभी में बोली कि जितेन्द्र नहीं, में ऐसी लड़की नहीं हूँ, प्लीज मुझे जाने दो, में फिर आ जाऊंगी। तो तभी जितेन्द्र बोला कि इस कमरे से कोई भी लड़की चुदे बिना बाहर नहीं जा सकती है।
फिर में बोली कि लेकिन में इन्हें नहीं जानती यार नो-नो। फिर समीर ने चैन खोलकर अपना लंड बाहर निकाला और बोला कि रंडी इससे जान पहचान रखती है, उसका लंड 8 इंच लंबा और 4 इंच मोटा होगा। फिर जितेन्द्र बोला कि साली कुत्तियाँ नखरे करती है, टूर पर तो बड़े मज़े ले रही थी। फिर राज ने मुझे पकड़ा और किस करने लगा और मेरा मुँह खोलकर मेरी जीभ चूसने लगा। अब जितेन्द्र भी पीछे से मुझसे चिपक गया था और पीछे से मेरी चूची दबाने लगा था। अब समीर मेरी जांघे सहला रहा था। फिर राज ने मुझे छोड़ा और मेरी टी-शर्ट उतारने लगा। अब समीर मेरी जींस उतार रहा था। अब में पिंक ब्रा और रेड पेंटी में थी। अब जितेन्द्र ने मेरी ब्रा का हुक खोल दिया था। अब मेरी गोल मटोल चूचीयां नंगी हो गयी थी। तभी राज के मुँह से वाऊ निकला और उसने अपने लिप्स मेरी चूची पर रख दिए और जितेन्द्र ने मेरा दूसरा निप्पल अपने लिप्स में दबा लिया। मेरे मुँह से सिसकी निकली आआअ क्या कर रहे हो? अब समीर ने मेरी पेंटी उतार दी थी और मेरी चूत को अपने हाथों से मसलने लगा था। अब में एयाया, उूउउ कर रही थी।
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फिर जितेन्द्र ने मुझे गोदी में उठाया और बेड पर पटक दिया। अब वो तीनों बेड पर चढ़ गये थे। फिर समीर ने मेरे बाल पकड़कर मुझे घुटनों के बल बैठा दिया। अब जितेन्द्र और समीर के लंड मेरी आँखों के सामने थे। अब में चुपचाप देख रही थी। फिर समीर अपना लंड हिलाते हुए बोला कि हरामजादी, साली, कुतिया इनको क्या तेरी माँ आकर चूसेगी? तो मैंने कहा कि माँ की गाली मत दो। तो तभी जितेन्द्र बोला कि इसकी चूत में जब लंड जाता है तो तब इसकी चाहे माँ चोद लेना, ये खुद ही बोलेगी, ये पहले ऐसे ही बोलती है। अब में उनके लंड पर किस करने लग गयी थी। फिर मैंने अपना मुँह खोला और समीर का लंड अपने मुँह में ले लिया और जितेन्द्र का लंड अपने एक हाथ में पकड़कर हिला रही थी। तभी इतने में मेरी गांड पर एक ज़ोर का थप्पड़ पड़ा, तो तभी मेरे मुँह से उउई माँ निकला। तभी राज बोला कि बहनचोद अपनी टांगे खोल। फिर मैंने अपनी दोनों टांगे खोल दी, तो राज ने अपने होंठ मेरी चूत पर रख दिए और चूसने लगा। दोस्तों ये कहानी आप GandiKhaniya डॉट कॉम पर पड़ रहे है।
अब मेरी चूत में चीटियाँ रेंगने लगी थी, अब वो कभी मेरी चूत की फाँको को अपने दातों से काटने लगता, तो मेरे मुँह से आआआअ और खा जाओ, बहुत तंग करती है ये निकलता। अब समीर मेरे बाल पकड़कर मेरे मुँह में धक्के दे रहा था। अब जितेन्द्र ने अपना लंड मेरे हाथों में दे रखा था और अपने हाथों से मेरी चूचीयाँ मसल रहा था। अब मेरा हाल बुरा था, अब मेरे अंदर आग लगी हुई थी। फिर जितेन्द्र बोला कि हरामजादी अपने आपको शीशे में देख, कितनी मस्त लग रही है? तो मैंने देखा तो में सही में सेक्स की भूखी लड़की लग रही थी। तभी राज बोला कि रंडी के सामने लंड होता है तो वो मस्त हो जाती है, इस कुत्तिया के सामने तो 3 लंड है। अब वो तीनों मुझे चूस रहे थे और गालियाँ दे रहे थे। अब मेरी चूत झड़ चुकी थी, अब में बेकाबू हो गयी थी।
फिर में उनसे बोली कि यार अब कर भी लो। तभी जितेन्द्र बोला कि साली को लंड चाहिए, बोल साली क्या चाहिए? अब में बहुत गर्म हो गयी थी। फिर में बोली कि लंड चाहिए। फिर जितेन्द्र बेड पर लेट गया, अब उसका 10 इंच का काला मोटा लंड छत की तरफ तना हुआ था। फिर समीर और राज ने मुझे उठाया और उसके लंड पर बैठा दिया, मेरी चूत गीली थी। फिर समीर बोला कि राज ये रंडी एक बार में पूरा लंड अपनी चूत में ले लेगी, बोल हरामजादी। अब में जोश में थी तो में बोली कि हाँ। तभी उन्होंने मेरे कंधे सख्ती से पकड़े और बोले कि रेडी। तभी में बोली कि हाँ, तो उन दोनों ने मेरी कमर ज़ोर से नीचे दबाई और नीचे से जितेन्द्र ने अपने चूतड़ ऊपर उछाले तो उसका पूरा लंड मेरी चूत में फंस गया। तभी मेरे मुँह से ज़ोर की चीख निकली आईईईईइ माँ, आआआआआआआ बचाओ, उउईईई में मर गइईईईई माँ, आआआ। अब वो दोनों ताली बजाने लगे थे और बोले कि वाह ये तो पूरा ले गयी, ये तो पूरी रंडी है। अब मेरी आँखों में आँसू आ गये थे।
फिर जितेन्द्र बोला कि देख तेरी इच्छा पूरी हुई ना, सेक्स में रुला दिया ना। अब राज मेरी चूची पर काट रहा था और समीर मेरे गालों पर अपना लंड घुमा रहा था। अब मुझे थोड़ा आराम आने लगा था। अब में धीरे-धीरे ऊपर नीचे होने लगी थी। अब मेरे मुँह से आअ, आह, उहहहहह निकल रहा था। अब समीर ने अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया था और जितेन्द्र ने मुझे अपने ऊपर गिरा लिया था। अब मेरी चूची उसकी छाती से चिपक गयी थी। अब में समझ गयी थी कि ये मेरी गांड में अपना लंड डालेंगे। तभी में बोली कि नहीं गांड में नहीं और अब में उठने लगी थी। तो तभी जितेन्द्र ने मुझे अपनी बाँहों में कस लिया। फिर राज ने मेरे चूतड़ अलग किए और मेरी गांड के छेद पर अपना लंड लगाया, तो में ना-ना करती रही।
फिर उसने कसकर एक धक्का मारा तो उसका आधा लंड मेरी गांड को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया। तो तभी में चीखी ओह माँ, आआअ तेरी बेटी मररर गईईईईई, हाईई प्लीज निकाल लो, लेकिन अब मेरी कौन सुनता? अब उसने एक और धक्के में अपना लंड अंदर जड़ तक पहुँचा दिया था। तभी में बोली कि आज बच्ची को मारोगे क्या? तो तभी समीर बोला कि बहन की लोड़ी 2-2 लंड खा गयी, तू कहाँ से बच्ची है? और अपना लंड मेरे मुँह में दे दिया। अब मेरे तीनों छेदों में लंड था, अब मेरे चूतड़ों पर बीच- बीच में जितेन्द्र और राज थप्पड़ मारते और समीर मेरे बाल पकड़कर मेरे गले तक अपना लंड डाल देता था। फिर समीर ने अपने दोनों हाथों से मेरा सिर पकड़ा और मेरे मुँह में झड़ने लगा तो मैंने बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उसने मेरे गाल पर थप्पड़ मारा और बोला कि रंडी पी इसे, तो में उसका पूरा रस पी गयी। अब मेरा गाल लाल हो गया था। अब वो मेरी गांड में और चूत में कस-कसकर चोद रहे थे। अब में 2 बार झड़ चुकी थी, लेकिन वो दोनों पता नहीं क्या खाकर आए थे? अभी तक लगे हुए थे।
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अब में फिर से झड़ने के करीब थी तो तभी में बोली कि ज़ोर-ज़ोर से करो ना और अब में सामने शीशे में खुद को देख रही थी। अब मेरे मुँह से एम्म, आआआअ, ज़ोर से, ज़ोर से चोदो निकल रहा था। तो तभी जितेन्द्र बोला कि एक बार वैसे ही बोल जैसे जयपुर में बोली थी बोल कुतिया। फिर में मस्ती में चीखने लगी कि इस रंडी की चूत फाड़ दो, अपनी हरामजादी को इतना चोदो कि बार-बार तुम्हारे लंड की हरामजादी बने, अपनी कुत्तिया की चूत पर कोई तरस मत खाओ, ये मुझे बहुत तंग करती है, इस मादरचोद रंडी को अपने बच्चे की कुँवारी माँ बना दो, जोर-जोर से चोदो, ज़ोर-ज़ोर से चोदो। अब वो अपनी पूरी स्पीड से लगे हुए थे और में अपने आपको गालियाँ दे रही थी, हाँ में हरामजादी हूँ। अब वो दोनों मेरे चूतडों पर थप्पड़ मार थे। अब में झड़ चुकी थी, तो तभी समीर ने अपना लंड बाहर निकाला और मुझे जितेन्द्र के ऊपर से खड़ा कर दिया और फिर मुझे बेड पर लेटा दिया और मेरे ऊपर अपना वीर्य मेरे मुँह पर, बालों पर गिरा दिया।
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फिर समीर बोला कि मुझको इतना मज़ा पहली बार आया है, मज़ा आ गया। तभी जितेन्द्र बोला कि अभी और भी मजा आएगा। फिर में उठी और बोली कि में नहाकर आती हूँ। तभी जितेन्द्र ने मुझे गोदी में लिया और बाथरूम में बाथ टब में बैठा दिया और बोला कि दोस्तों इस रंडी को अपने पेशाब से नहलाओ। तो में चौक गयी और बोली कि ये क्या है? जितेन्द्र में सचमुच की रंडी नहीं हूँ, लेकिन अब वो तीनों मेरे आस पास खड़े हो गये थे और मुझ पर पेशाब करने लगे थे, उनका पेशाब नमकीन सा था। फिर उन तीनों ने पेशाब करके अपने लंड मुझे चुसाए और साफ करवाए और नहलाकर वापस लाए और फिर शाम के 6 बजे तक मुझे बदल-बदलकर चोदते रहे। फिर में अनगिनत बार झड़ी और फिर वो दिन मेरी जिंदगी का सबसे यादगार दिन बन गया ।।

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Saturday, 11 May 2013

bathroom Me Aunty Ki Chudai ki kahani || Indian sex story stories || antarvasna

Hi dosto , this is harshall from Mumbai. I am a graduate and working in an MNC in Mumbai. Introducing myself I am a 23yrs old guy with 5.9" height and fit body. Ab story pe aata hu ye un dino ki baat hai jab mai 12th pass ho gaya tha. Mujhe BMS karna tha jiska admission ho gaya tha but college 4 mahine baad chalu hona tha. To maine ek international call centre me apply kiya aur luckily mera selection ho gaya. i was in a US process. Hum US ke logo ko phone par Dish Tv bechte the starting me hamari training thi. Mere hi batch me ek ulhas nagar ki Aunty thi, jo ki 26 years ki thi wo dikhne me fatang item thi koi bhi use ek baar dekh le to lund hilaye bina nahi reh payega uska figure 36 34 38 tha aur 34 size ke uske bobe the. humari training ke dauran wo hamesha mere pass hi baithti thi. Ek din wo kafhi sad thi maine pucha kya hua aunty to usne kaha kuch nahi yaar aisi hi jab maine jor laga ke pucha ki muje batao mai tumari sari problems solve kar dunga. fath se usne kaha meri problem to tere uncle bhi nahi solve kar paye tu kya kar payega. Tab jake meri tubelight jagi. Mai shocked reh gaya. Us din se maine thoda thoda chance marna shuru kar diya. Kabhi hath pe hath rakh deta to kabhi pair par pair rakh deta aur wo kuch nahi bolti.

Usne mujhe bataya ki uska husband ek real estate builder hai saturday ke din jab hamari chutti rehti thi. humari salary credit nahi hone ke karan hum dono office aaye the thodi der baad wo washroom jana chati thi joki 1st floor par tha hum dono nikal pade waha koi nahi tha. Maine socha ye mauka acha hai. maine kaha maine kabhi ladies washroom dekha nahi hai mai bhi chalta hu ande usne haa keh diya mai koi moka dund raha tha. wo face wash karne ke liye jhuki aur maine jhat se thoda pani lekar uske bobe par uda diya. mai uske bobe par lage pani ko saaf karne ke liye unhe touch kiya phir turant piche hat gaya aur sorry bola par usne kaha jab tune kiya hai to tu hi saaf kar. mai to pagal huye jaa raha tha. Maine dhire se uski boobs aur gand par hath ferna shuru kar diya. phir maine uske hoto se apne hoth laga kar french kiss shuru kar diya. unke hoth itne mulayam the ki kya batau maine uske muh me apne jibh dal kar sara pani pi gaya uske baad usne mere lund par apna hath rakha aur masalne lagi. usne meri jean ka huk khola aur mere lund jo bahar aane ke liye tadap raha tha, usne jath se bahar nikal diya. vo usko dekhte hi reh gayi. Mera lund 6" lumba aur 2.5" mota hai uske muh se nikal gaya ke harshal yaar tera lund to bahut hi lamba hai. tere unkle ka to isse adha bhi nahi hai. isi liye mai itna tadapti hu, sala madarchod mujhe khush bhi nahi rakhta isi liye bahar chudwana padta hai maine pucha ki aunty aapne abhi tak kitne lund liye hai. Usne jawab diya ki shadi ke pehle 2 baar aur shadi ke baad to tu pehla hi hai. usne yellow colour ki saree pehni thi. maine uske blouse ke button khol diye aur bra ko bhi utar pheka ab usne nange boobs mere samne the. mai pagalo ki tarah un par tut pada maine uske boobs chus chus kar laal kar diye. Mai dhire dhire neche gaya aur mai uski nabhi par kiss karta raha. uska petticoat dheela karke maine uski panty aur saree ek saath hi uthar di phir thoda aur niche jaakar uski chut par kiss kar diya. ye karte hi wo to mano pagal hi ho gayi usne mere baal pakad kar mera muh uski chut me dhakel diya aur issi tarah mujhe uske chut ka swad hua. maine karib 10 min uski chut chati aur wo jhad gayi. Phir maine use western toilet ki seat par bithaya aur uske muh me mera lund de mara. wo to bacho ki tarah use chusne lagi mai to jaise sathwe aasman par tha. Thodi der baad muje laga koi aa jayega is liye maine usse common area me lakar niche jamin par hi sula diya aur uski tange faila di phir maine uske chut ki

deewar par apne lund ka supoda rakh diya aur pucha kya aunty kya khayal hai, usne kaha mere raja ab raha nahi jata ab chod de mujhe bana le apni rakhail bana de maine der na karte ek hi jhatke me aadha lund uski chut me ghused diya. Wo chila uthi maine uska muh daba diya aur fata fhat apne lund ko chut me aage piche karne laga. Dheere dheere meri speed aur uski aawaje dono badne lagi phir 10-15min ke baad mai jhad ne wala tha is duran wo 2 baar jhad chuki thi. maine usse pucha ki aunty mai jhadne wala hu usne kaha ki ander hi kar de kyu ke ye chut bahut mahino se tript nahi huyi hai mai uske ander hi jhad gaya. aur uspar gir gaya phir 5 minutes hum ek dusare par soye rahe phir uth kar humne wash karke kapde pehen liye aur nikal pade. Maine pucha aunty kaisa raha. usne kaha yaar mai bata nahi sakti mai kitni khush hu aur to param anand mil gaya. uske baad maine kayi baar uske ghar ja ja kar usse choda. agar aap ko meri story acchi lagi to comments kare


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