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Tuesday, 27 February 2018

बीवी की बहन की मोटी गांड चोदी | Biwi ki Behan ki Moti Gand Chodi : Hindi Sex Story


बीवी की बहन की मोटी गांड चोदी | Biwi ki Behan ki Moti Gand Chodi : Hindi Sex Story


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प्रेषक : रिंकू …
हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम रिंकू है, में पटियाला का रहने वाला हूँ। अभी पिछले मुझे अपने बिजनेस के सिलसिले में दिल्ली जाना पड़ा। मेरी वाईफ की बड़ी सिस्टर इन लॉ मतलब मेरी बड़ी साली वहाँ रहती है, मालविया नगर में। अब में उनके यहाँ जाकर रुका था। मेरी साली का नाम रश्मि है, उनके पति का मोटर पार्ट्स का बिजनेस है। फिर में वहाँ पहुँचा और रात को गपशप करने के बाद हम सब सो गये। उनके फ्लेट में जो गेस्टरूम है, वो मेरी साली के बेडरूम से अटेच्ड है यानी कि एक दरवाजे से गेस्टरूम में और उनके बेडरूम में जाया जा सकता है, जनरली वो लॉक रहता है और उस दरवाजे में एक बड़ा सा पोस्टर लगा हुआ है। आप इस कहानी को एक हिंदी सेक्स स्टोरीस डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं। अब रात को मुझे नींद नहीं आ रही थी तो में अपने रूम में टहल रहा था। तभी अचानक से जब में उस कॉमन दरवाजे के पास पहुँचा तो तब मुझे कुछ आवाज़ें सुनाई दी। तब मैंने दरवाजे पर कान लगाया तो ऐसा लगा कि मेरी साली और उसका पति कुछ बातें कर रहे है, लेकिन थोड़ी देर के बाद उनकी बातों से लगा कि वो लोग सेक्स करने के लिए तैयार हो रहे है।

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अब में कुछ उत्तेजित सा हो गया था और उस नज़ारे को देखने का मौका खोजने लगा था। फिर मैंने उस दरवाजे पर धीरे से अपना एक हाथ फैरा तो ऐसा लगा कि उसमें एक लॉक है। तब मैंने सोचा कि इसमें चाबी का छेद भी जरूर होगा, लेकिन पूरे दरवाजे में पोस्टर लगा था। तब मैंने टेबल से पेन उठाया और चाबी का छेद ढूँढने लगा तो मुझे चाबी का छेद मिल गया। फिर मैंने पेन से धीरे से पोस्टर में एक छेद किया, तो चाबी का छेद सामने दिखा। अब मेरी आँखों में चमक आ गयी थी और उत्तेजना से मेरा लंड खड़ा हो गया था। फिर मैंने अपने रूम की लाईट ऑफ की और चाबी के छेद से अंदर देखने लगा तो सामने का जो नज़ारा था, वो देखते ही मेरा बुरा हाल हो गया था।

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अब मेरी साली और साडू बिल्कुल नंगे थे और मेरा साडू अपनी बीवी के ऊपर चढ़कर उसको चोद रहा था। अब मेरी साली सिसकियाँ भर रही थी और अपने पति से चुदवाने का मज़ा ले रही थी। फिर थोड़ी देर के बाद उसने अपना लंड अपनी बीवी की चूत में से बाहर निकाला और बेड पर खड़ा हो गया। अब मेरी साली अपने घुटनों के बल बैठ गयी थी और अपने पति का लंड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी थी। अब वो दोनों उत्तेजना में आह, उहहह, आह कर रहे थे। अब मेरा लंड बिल्कुल तन चुका था और फिर मैंने भी अपनी शॉर्ट्स उतार दी और नंगा हो गया था। फिर मैंने अपने लंड को हिलाना शुरू किया। फिर थोड़ी देर के बाद मैंने देखा कि मेरी साली उठी और बगल में ड्रेसिंग टेबल पर झुककर खड़ी हो गयी थी। अब उसके पति ने अपना मुँह उसकी गांड में घुसा दिया था और उसकी गांड को चाटने लगा था।

अब रश्मि बड़े मज़े ले रही थी और आह, उहहहह कर रही थी। अब उन दोनों को बिल्कुल भी नहीं पता था कि कोई उनकी इस हरकत को देख रहा है। फिर थोड़ी ही देर में राजीव (रश्मि के पति) ने अपना लंड रश्मि की गांड में घुसा दिया और उसकी गांड मारने लगा था। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा था। तब मैंने मुठ मारना शुरू किया, ये सोचकर कि में अपनी साली की गांड मार रहा हूँ और फिर थोड़ी ही देर के बाद मैंने अपना वीर्य वहीं गिरा दिया और फिर मेरे साडू ने भी अपना वीर्य रश्मि की गांड में निकाल दिया था। फिर अगले दिन सुबह मुझे पता चला कि राजीव को बिजनेस के सिलसिले में जयपुर जाना है और वो अगले दिन वापस आएँगे, यानी उस रात घर में सिर्फ़ में और मेरी साली ही रहने वाले थे। फिर कुछ देर के बाद राजीव अपनी कार से जयपुर के लिए निकल गये। अब मुझे भी काम के लिए करोलबाग जाना था।आप इस कहानी को एक हिंदी सेक्स स्टोरीस डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं। अब मेरी साली नहाने गयी हुई थी और फिर जब वो तैयार होकर मेरे सामने आई तो तब उसको देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। उसके बड़े-बड़े बूब्स और मस्त गांड को देखकर में मदहोश हो रहा था, लेकिन फिर खुद पर कंट्रोल करके में भी तैयार होने के लिए बाथरूम में चला गया।



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अब मुझे और पागल बनाने के लिए मैंने देखा कि रश्मि के अंडरगार्मेंट वहाँ रखे हुए थे। तब मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और फिर में उसकी ब्रा को उठाकर उसे चूसने लगा। तब मुझे ऐसा लगा कि जैसे में रश्मि के बूब्स चूस रहा हूँ। फिर मैंने उसकी पेंटी उठाई और उसे स्मेल करने लगा। अब मुझे एक अजीब सा नशा छा रहा था। फिर मैंने उसकी ब्रा के कप को अपने लंड पर लगाया और मुठ मारने लगा और फिर थोड़ी ही देर में मैंने अपना वीर्य उसकी ब्रा में निकाल दिया और फिर उसकी ब्रा को मैंने पानी से भीगा दिया, ताकि उसे पता ना चले। फिर में नहाकर ब्रेकफास्ट करके काम के लिए निकल गया तो रास्ते में मुझे एक मेडिसिन की शॉप मिली। वहाँ एक पोस्टर लगा हुआ देखा।

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फिर मैंने दुकानदार से उसके बारे में पूछा तो तब उसने बताया कि इसकी एक गोली खाने के बाद कोई भी लड़की पर आधे घंटे में सेक्स का नशा चढ़ जाता है। तब मेरे दिमाग में एक प्लान आया और फिर मैंने वो गोली खरीद ली। फिर रात 9 बजे में अपना काम करके अपनी साली के घर पहुँचा। फिर उसने मुझे डिनर सर्व किया और फिर हम चेंज करके गप्पे मारने लगे। उसने बड़ी पतली सी नाइटी पहन रखी थी। अब में शॉर्ट्स और टी-शर्ट में था। अब हम ड्रॉईग रूम में सोफे पर बैठकर गप्पे मार रहे थे। फिर थोड़ी देर के बाद वो कुछ लेने के लिए उठी और असंतुलन होकर वापस सोफे पर बैठ गयी। तब मैंने पूछा कि क्या हुआ? तो तब रश्मि ने कहा कि मुझे अचानक से कमर में बहुत दर्द होता है, में इस दर्द से बहुत परेशान रहती हूँ। तब तुरंत ही मेरे दिमाग में एक आइडिया आया। फिर मैंने उनसे कहा कि मेरे पास एक आयुर्वेदिक गोली है, उसको खाने से तुरंत असर पड़ेगा और फिर मैंने वो गोली उनको दे दी। तो उसने तुरंत ही पानी के साथ उसे ले लिया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

फिर मैंने कहा कि अब आप बेडरूम में जाकर आराम करिए और अपने दिमाग में कुछ प्लान बनाने लगा, मुझे आज उसे चोदना ही था। फिर थोड़ी देर के बाद में उनके कमरे में गया तो मैंने देखा कि वो लेटी हुई थी। फिर में उनके पास गया और कहा कि मैंने थोड़ी बहुत मसाज की प्रेक्टीस की है। तो तब उन्होंने कहा कि हाँ यह ठीक रहेगा, मुझे कुछ आराम मिल जाएगा। तो तब मैंने कहा कि आप पेट के बल लेट जाइए और फिर में आपकी कमर पर अक्कुप्रेशर के फायदे देता हूँ। अब मेरा निशाना सही लग रहा था। अब वो पेट के बल लेट गयी थी और अब में अपने हाथ से उसकी कमर को सहलाने लगा था, जाहिर सी बात है उन्हें आराम तो मिल ही रहा था और वो सोच रही थी कि में अक्कुप्रेशर का बड़ा जानकार हूँ। फिर कुछ देर के बाद में उनकी कमर और पीठ को सहलाने और दबाने लगा, तो 10-15 मिनट के बाद वो थोड़ा मचलने लगी थी। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब में समझ गया था कि गोली अपना काम कर रही है। फिर तब मैंने भी मौके का फ़ायदा उठाते हुए कहा कि आपको नाइटी उतारनी पड़ेगी, तभी मसाज का फायदा पूरा होगा। तब उसने तुरंत ही लेटे हुए ही अपनी नाइटी उतार दी, उसने ब्लेक कलर की ब्रा और पेंटी पहनी हुई थी। अब मेरा लंड खड़ा हो गया था। फिर मैंने उनकी पीठ को सहलाते हुए उनकी ब्रा के हुक खोल दिए। अब उनकी गोरी और मदमस्त नंगी पीठ मेरे सामने थी। फिर में उनकी पीठ सहलाते हुए नीचे की तरफ आया और उनकी कमर सहलाने के बहाने उसकी पेंटी भी थोड़ी नीचे कर दी। अब गोली के असर से उन्हें भी मज़ा आने लगा था। फिर में खड़ा हुआ और अपनी टी-शर्ट और शॉर्ट्स खोल दिया और नंगा होकर उनकी कमर को सहलाने लगा था। अब मेरा लंड रश्मि की चूत और गांड में घुसने के लिए मचलने लगा था। फिर मैंने उसकी पेंटी को और नीचे उतारा तो तब वो खुद ही डॉगी स्टाइल में झुक गयी और बड़े आराम से अपनी पेंटी उतरवा दी।


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अब उसे गोली लिए हुए 25 मिनट हो गये थे। अब में तैयार था और फिर मैंने उसकी पेंटी पूरी खोल दी और वो अब तक डॉगी पोज़िशन में थी। अब मुझसे कंट्रोल नही हो रहा था और फिर मैंने अपनी जीभ सीधी उसकी चूत पर लगाई और उसको चाटने लगा। रश्मि जो अब तक शांत थी ज़ोर-ज़ोर से आह, उउईई, उउन्न्ह, उउन्न्ह करने लगी थी। अब उन्हें बहुत मजा आने लगा था। अब में उनकी गांड को दबाता और ज़ोर-जोर से उसकी चूत को चाट रहा था। फिर मैंने उन्हें पीठ के बल लेटाया और उनकी चूत को चाटने लगा था। तब वो बोली कि हाँ हाँ रिंकू और चाटो और चाटो मेरी चूत को, बहुत मज़ा आ रहा है, आह। अब उनकी गुलाबी चूत का खट्टा और सेक्सी रस मुझे बड़ा मज़ा दे रहा था। फिर में उनके ऊपर लेट गया और उनके बूब्स को बारी-बारी से चूसने लगा था। अब उनके बड़े बूब्स में लाईट पिंक निप्पल एकदम खड़े हो चुके थे और मुझसे बूब्स चुसवाने में उन्हें बड़ा मज़ा आ रहा था और अब वो सिसकियाँ भर रही थी और चूसो, ज़ोर से चूसो मेरे बूब्स को, आह।

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फिर एक ही झटके में मैंने अपना लंड उनकी चूत में घुसा दिया और उन्हें चोदना शुरू किया। अब मेरा लंड उनकी चूत में अंदर बाहर होने लगा था। अब हम दोनों को खूब मज़ा आ रहा था और वो बोल रही थी हाँ रिंकू और और और चोदो, चोदते रहो, आह, आह, आआ, हाईईईई और चोदो और फिर उसने अपना रस मेरे लंड पर निकाल दिया और शांत हो गयी थी। फिर पिछली रात को उनकी चुदाई (अपने पति के साथ) की तरह में भी बेड पर खड़ा हो गया और रश्मि से कहा कि मेरा लंड चूसो। तब वो तुरंत ही अपने घुटनों के बल बैठ गयी और मेर लंड को अपने मुँह में घुसाकर चूसने लगी थी। अब मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। अब में चिल्ला रहा था आहह, आहह रश्मि और चूसो और अंदर लो, ज़ोर से चूसो और फिर कुछ ही देर के बाद लंड चुसाई के बाद मैंने कहा कि अब में तुम्हारी गांड मारूँगा। तब वो तुरंत ही ड्रेसिंग टेबल के पास जाकर झुककर खड़ी हो गयी। तो तब में अपना मुँह उनकी मस्त गांड के बीच में घुसाकर उनके छेद को चाटने लगा।

अब मुझे उनकी गांड चाटने में मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था और अब वो भी आह, हाईई करने लगी थी। फिर मैंने अपना लंड उनकी गांड में घुसाया और ज़ोर ज़ोर से उनकी गांड मारने लगा था। फिर मैंने पीछे से उनके बूब्स को दबाया और उनकी गांड मारता रहा और वो आह, हाईईईईई करके चिल्लाने लगी। फिर कुछ ही देर के बाद मैंने अपना वीर्य उनकी गांड में निकाल दिया और फिर हम दोनों रात को नंगे ही एक दूसरे से चिपककर सो गये। फिर जब भी मुझे उससे मिलने का कोई मौका मिला तो तब मैंने उसकी खूब जमकर चुदाई की और बहुत मजा किया ।।

धन्यवाद …
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Saturday, 13 January 2018

साली की वर्जिन चूत की सील तोड़ी - saali ki vargin seel todi


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मेरी साली कुवांरी थी तो मैंने ही मेरी साली की चूत का उद्घाटन किया था। अब उसकी शादी हो चुकी है। दोस्तों मेरी साली हीना और उसके पति महेश को एक किराए के मकान की जरूरत थी तो मैंने अपने एरिया के एक मकान किराए पर देने वाले एजेंट से बात की और फिर उनके लिए एक मकान ढूंढा जो कि मेरे घर से कुछ ही दूरी पर था और ऐसा मैंने जानबूझ कर किया था क्योंकि में ये चाहता था कि में जब भी चाहूँ तब हीना के साथ सेक्स कर पाऊं और उसे भी ये बात मालूम थी और वो इस बात से बहुत खुश थी। फिर मकान के किराए का अग्रीमेंट मिलने पर महेश ने मुझे कॉल किया और हम तीनो उनका समान लाने के लिए गये। फिर हमने सारा समान लाकर नये मकान में रख दिया और अपने घर चले गये।
महेश अपनी माँ के घर गया और हीना अपनी माँ के घर.. जाते वक़्त हीना ने मुझे इशारे से कॉल करने के लिए कहा था और मैंने उसे शाम को 5 बजे कॉल किया तो उसने मुझसे कहा कि आज रात को वो मुझसे मिलेगी। में तो बहुत खुश था और उसने मुझसे कहा कि उसने अपनी माँ को बहाना बनाकर कहा है कि आज रात को वो अपनी एक सहेली के साथ उसके घर पर रुकने वाली है क्योंकि उसकी सहेली के घर के सभी लोग किसी काम से बाहर गए हुए है और वो घर पर अकेली बहुत डरती है और ये बात महेश को बिलकुल ना बताए क्योंकि वो मना कर देगा। तभी मुझे भी अपने घर पर कुछ ऐसा ही एक झूठ बोलना था.. जिससे मेरी बात भी सभी लोग मान ले। तभी मैंने अपने घर वालो से कहा कि में अपने दोस्त के घर पर जाकर आता हूँ क्योंकि मेरे दोस्त सुनील की तबीयत बहुत खराब है।फिर में शाम को 7 बजे घर से निकला हीना मुझे नये मकान के पास ही मिलने वाली थी।ये चुदाई कहानियाँ,रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है।  फिर उसके आने के बाद हमने सोचा कि अगर हम साथ साथ मकान पर गये तो पड़ोसी देख लेंगे और वो ये जानते है कि में हीना का पति नहीं हूँ। तभी इस पर हमने एक तरकीब सोची। प्लान के मुताबिक पहले हीना रूम में जाएगी और फिर में चुपचाप अंदर जाऊंगा। तभी हीना आगे चली गयी और में उसके पीछे खड़ा खड़ा सोच रहा था कि रात को अगर मेरी ज़ोर से खासने की आवाज़ कोई सुन लेगा तो पड़ोसियों को मालूम हो जाएगा कि महेश के मकान में कोई है और मुझे इसकी बहुत चिंता हो रही थी.. क्योंकि मुझे बहुत खांसी थी। फिर मैंने मेडिकल पर जाकर खांसी के लिए कोई बहुत ही अच्छी दवाई देने को कहा.. तब उसने मुझे दवाई की बड़ी बॉटल दी। दवाई और एक पानी की बॉटल को लेकर में मकान की तरफ बड़ा और मैंने अपना मोबाईल फोन भी साइलेंट किया था। फिर मकान की सीढ़ियां चढ़ते वक्त भी मैंने देखा कि कोई मुझे ना देख ले। तभी पहली मंज़िल पर ही हीना का मकान था और उसने मकान का दरवाज़ा थोड़ा खोल रखा था.. में तुरंत ही अंदर चुपके से घुस गया। हीना मेरा इंतज़ार ही कर रही थी.. तभी उसने मुझसे देर से आने की वजह पूछी।

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मैंने बताया कि में दुकान पर खांसी की दवा लेने गया था। फिर उसने कहा कि तुम बहुत शातिर हो रूम में अंधेरा ही था लाईट चालू नहीं की थी ताकि पड़ोस वाले ना जान पाए कि अंदर कोई है। फिर हमने बहुत देर तक बातें की इस बीच में उसे बाहों में भरकर लेटा हुआ था और वो मुझे चूम रही थी। धीरे धीरे माहोल बहुत गरम होने लगा। फिर हमने एक दूसरे के सारे कपड़े उतार दिए और एक दूसरे के बदन को चूमने चाटना शुरू किया। हीना का बहुत अच्छा फिगर मेरे अंदर बहुत सेक्स जगा रहा था। हीना की पसंद क्या है उसने मुझे पहले ही सिखाया था और फिर वो धीरे धीरे मेरे पेट पर से होते हुए मेरे लंड को चूमने के लिए आगे बढ़ी। फिर उसने पूरा लंड अपने मुहं में ले लिया और फिर बहुत ज़ोरो से हिला हिलाकर चूसने लगी। चूसने की आवाज़ रूम में गूँज रही थी और तभी उसने अपनी स्पीड कम कर दी और फिर में नीचे से उसकी चूत पर से अपनी जीभ किसी जानवर की तरह चला रहा था.. जिससे वो और पागल हो रही थी और मेरा मुहं अपनी चूत पर ज़ोर ज़ोर से दबा रही थी।मेरी सांसे भी बीच बीच में अटक रही थी। फिर कुछ देर बाद उसने मेरे सर के बालों को ज़ोर से पकड़ा और चूत को मुहं में पूरा घुसाना चाहा और उसका बदन सिकुड़ रहा था.. ये चुदाई कहानियाँ,रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। में समझ गया कि वो अब अमृत बरसाने वाली है और तुरंत ही उसने अपना सारा पानी मेरे मुहं पर गिरा दिया.. इसी समय मुझे खांसी भी आ रही थी लेकिन मैंने वो सारा रस पी लिया.. अब वो बहुत संतुष्ट लग रही थी। तभी मैंने भी उठकर थोड़ी दवाई पी ली और वापस आकर उसके पास लेट गया। हम फिर बातों में खो गये और दवाई पीने की वजह से कब आँख लगी पता ही नहीं चला। रात को करीब 3.30 बजे मुझे कुछ आवाज़ सुनाई दी। मैंने चादर उठाकर देखा तो हीना उठकर बैठी थी उसे बाथरूम जाना था.. लेकिन बाहर जाने में बहुत डर रही थी और उसने मुझे भी उठाया और मुझे टॉयलेट के दरवाज़े के पास खड़ा होने को कहा में सिर्फ़ अंडरवियर में था और वो सिर्फ़ शर्ट पहने थी। वो बिना लाईट जलाए नीचे बैठी और पेशाब करने लगी। उसकी पेशाब करने की आवाज़ से मेरा सोया हुआ लंड जागने लगा और इस वक्त तो मेरा लंड मानो गरम होकर तन रहा था।

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फिर हीना जब बाहर आई तो आगे जाते वक्त उसका हाथ मेरे लंड से छू गया.. इससे उसे भी मेरे सख़्त हुए लंड का एहसास हुआ और वो धीरे से हंस दी। तभी मैंने तुरंत उसे उठाकर नीचे लेटा दिया और किस करने लगा। नीचे मेरा लंड उसके पेट में घुस रहा था। किस करते करते वो अचानक मेरे सीने के नीचे जाकर मेरे लंड को पकड़कर चूसने लगी। मैंने भी फिर से उसकी चूत को चाटना शुरू किया.. वो अभी अभी पेशाब करके आई थी.. इसीलिए एक अलग ही नमकीन सा स्वाद आ रहा था। दोस्तों उस वक्त हम बिल्कुल मदहोश हो रहे थे। फिर मैंने उसको सीधा लेटाया और साली को मेरे लंड को अपने हाथों से पकड़ कर चूत में डालने को कहा.. तभी उसने ठीक से अपने दोनों पैरो को फैला लिया और मेरे लंड को अपने एक हाथ से पकड़कर दो तीन बार हिलाया और लंड को धीरे धीरे चूत के अंदर सरकाने लगी और उस समय लंड की चमड़ी भी धीरे धीरे उसकी चूत के अन्दर से चिपक कर पीछे सरक रही थी। वो एक ज़बरदस्त अहसास था। फिर जब लंड पूरा चूत में अपनी जगह पर आ गया तो उसके बाद झटको का सिलसिला शुरू हुआ।फिर उस अंधेरे रूम में छप छप की मादक आवाज़े गूँज रही थी और हम दोनों का पसीना पानी की तरह निकल रहा था। ये चुदाई कहानियाँ,रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। तभी में उसकी जीभ को पूरी तरह अपने मुहं में लेने की कोशिश कर रहा था.. नीचे से हीना भी अपनी चूत को उठा उठाकर मेरे पेट के नीचे पटक रही थी और लंड आरी के जैसे उसकी चूत में आगे पीछे चल रहा था इसलिए कुछ ही देर में उसकी चूत बहुत ढीली हो गयी थी और हीना को भी ये एहसास हुआ तो उसने लंड को चूत से निकालकर उसके पीछे वाले छेद में डालना चाहा तो वो थोड़ा टाईट था। फिर मैंने अपने हाथों से उसकी चूत का थोड़ा जूस लेकर उसकी गांड के छेद पर लगाया तो थोड़ा चिकनापन आ गया। उसके बाद अपनी दो उंगली घुसाकर उसे और ढीला किया।

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फिर हीना ने लंड को गांड के अंदर घुसाने की भरपूर कोशिश की और धीरे धीरे लंड उसके छेद में जा रहा था और वो दर्द महसूस कर रही थी.. लेकिन उसने रोका नहीं और जब वो आधे से ज़्यादा अंदर गया तभी मैंने धीरे धीरे अंदर और बाहर करना शुरू किया मुझे भी बहुत जलन हो रही थी.. लेकिन हीना ने मुझे कमर से बहुत टाईट पकड़ कर रखा। मेरा लंड अंदर ही था और उसने मुझे अपने नीचे लिया और खुद ऊपर सवार हो गयी.. वाह मुझे जैसे जन्नत मिल गई थी। अब उसने घुड़सवारी शुरू की और इस तरह उसके मुहं से सिसकियाँ निकलने लगी। अब मेरे लंड पर बहुत प्रेशर आ रहा था.. उसने अपना एक बूब्स मेरे मुहं में डाल दिया और में उसे चूसने लगा उसकी रफ़्तार तेज़ हो रही थी। थोड़ी देर बाद में समझ गया कि हीना जूस निकालने वाली है। वो और तेज़ हो गयी और अचानक मेरे लंड पर जैसे किसी ने गरम आमलेट पलट दिया हो.. मुझे ऐसा लगा।फिर वो जल्दी से नीचे आकर लंड चूसने लगी। ये चुदाई कहानियाँ,गंदी कहानियां डॉट कॉम पर पड़ रहे है। मेरा भी अब पिचकारी मारने का टाईम आया था.. वो भी ये समझ चुकी थी और वो लंड को दोनों हाथों से पकड़ कर हिलाते हिलाते चूस रही थी। तभी उसके सर के बाल मैंने खींच कर पकड़ लिए। अब उसने पूरा लंड जड़ तक मुहं में ले लिया और निगलने लगी जल्दी से मैंने उसके मुहं में सारा वीर्य निकाल दिया और वो सारा पी गयी और लंड को किसी भूखी बिल्ली के जैसे चाट चाटकर साफ कर दिया। हमें ऐसा लग रहा था कि सातवां आसमान छू कर हम अभी अभी ज़मीन पर आए है। फिर हम एक दूसरे को चाटते चूमते सो गए | मैंने अपनी बहन को कैसे मदद की? | और फिर दीदी की जेठानी की चुदाई

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Tuesday, 9 January 2018

जीजा साली की सेक्स कहानि


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Kamukta Sex Story Pathak यह सेक्स कहानी आज से लगभग 4 साल पहले की है। वो नवम्बर का महीना था और ठंड भी पड़ना शुरू हो गई थी और मेरी पत्नी प्रॅगनेंट थी उसका सातवां महीना चल रहा था। फिर मेरी पत्नी ज़्यादा काम नहीं कर पाती थी। तभी मैंने उसकी मदद के लिये अपनी साली को बुला लिया। दोस्तों मेरी साली का नाम कामिनी है वो बहुत सुंदर और सेक्सी लड़की है उसकी उम्र 22 साल की है और चूचियाँ 32″ और कमर 28″ गांड 30″ के आसपास है और वो मुझसे बहुत मज़ाक करती है। फिर मैंने शुरू शुरू में कोई खास ध्यान नहीं दिया लेकिन बहुत दिन से चुदाई नहीं करने के कारण मुझे बहुत अजीब सा लगता था। फिर रात में जब लंड खड़ा होता तो में बाथरूम में जाकर साली का नाम लेकर मुठ मार लेता था।
फिर मेरा मन अब साली को चोदने का करता था लेकिन डर लगता था कि अगर उसने विरोध किया और मेरी पत्नी को पता चल गया तो मेरा हंसता खेलता परिवार उजड़ जाएगा। लेकिन चुदाई करने के लिए कुछ तो पहल करनी ही थी। फिर इसलिए एक दिन मौका देखकर जब मेरी पत्नी आँगन में धूप सेक रही थी और रूम में साली अकेली थी। तभी मैंने पीछे से हाथ लगाया और उसकी कमर पर अपना एक हाथ फैरने लगा। तभी वो अचानक से चौंक गई और कहने लगी कि आप यह क्या कर रहे हो? फिर मैंने उसे कहा कि बस तुम्हे छूकर देख रहा हूँ कि तुम्हारे अंदर कितना करंट है। तभी वो एक शैतानी हंसी हंस पड़ी। फिर में समझ चुका था कि हंसी तो फंसी लेकिन शुरू शुरू में तो उसने बहुत नाटक किया लेकिन जब में उसे रोज मौका देखकर चूमने लगा।अब उसने विरोध करना छोड़ दिया था और शायद उसे मज़ा आता था। लेकिन चुम्मा लेने से लंड की प्यास नहीं बुझती है फिर यही हाल मेरे साथ भी था। ये चुदाई कहानियाँ,रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। फिर मेरी साली अपनी बहन यानी की मेरी पत्नी के साथ ही सोती थी और फिर में उसके पलंग के पास में चौकी पर सोता था.. पत्नी मेरी तरफ मुहं करके और साली दूसरी तरफ सोती थी और ऐसे में कुछ भी करना बहुत मुश्किल था। फिर एक दिन सुबह उठकर जब मेरी पत्नी बाथरूम गई थी तभी मैंने मौका देखकर थोड़ी हिम्मत जुटाई और अपनी चौकी से उठकर पलंग पर चला गया और साली के पास में लेट गया लेकिन शायद वो नींद में थी इसलिए उसे पता नहीं चला। फिर मेरे पास समय कम और एक बहुत मौका अच्छा था। तभी मैंने उसकी चूचियों पर हाथ रख दिया और फिर उसे धीरे धीरे दबाने लगा.. इससे उसकी नींद अचानक खुल गई और फिर मेरी डर के मारे बहुत हालत खराब हो गई.. मुझे ऊपर से नीचे तक पसीना छूट गया। लेकिन उसने केवल मेरा हाथ पकड़ा था और वो कुछ बोली नहीं। तभी इससे मेरी हिम्मत और बड़ गई और फिर मैंने अपना हाथ छुड़ाकर उसकी चूचियों पर रख दिया और फिर बड़े आराम से उन्हें दबाने लगा लेकिन कुछ देर बाद मुझे लगा कि मेरी पत्नी बाथरूम से वापस आ गई है। तभी में तुरंत जल्दी से अपने बिस्तर पर आ गया। फिर करीब एक सप्ताह तक रोज मैंने ऐसा ही किया फिर मेरी प्यास रोज और बड़ती ही जा रही थी।

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फिर करीब एक सप्ताह के बाद सुबह रोज की तरह जब मेरी पत्नी बाथरूम में गई। तभी में साली के पास उसके पलंग पर आ गया और फिर चूचियाँ दबाते दबाते मैंने एकदम से अपना एक हाथ उसकी सलवार के अंदर घुसा दिया किस्मत से मेरा हाथ एकदम से उसकी पेंटी के भी अंदर घुस गया और मेरा हाथ सीधे जाकर उसकी चूत पर पड़ा। फिर में उसकी चूत को धीरे धीरे सहलाने लगा और वो बीना हिले चुपचाप पड़ी रही उसने कोई विरोध नहीं किया। तभी मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी चूत में डाल दी। तभी वो अचानक से पूरी हिल गई और मुझे अंदाजा हो गया कि वो चुदाई के लिये तैयार है। फिर मैंने अपनी पत्नी के डर से ऊँगली को बाहर किया और उसे चूमने लगा। फिर मैंने उसे करीब पांच मिनट तक चूमा और छोड़ दिया और सही मौके की तलाश में लगा रहा।फिर जब भी वो मुझे देखती हमेशा एक अच्छी सी मुस्कान देकर मुझे चुदाई के लिये न्यौता दे कर चली जाती और में अंदर ही अंदर जलकर राख होता रहता था और भगवान से कहता कि वो दिन.. ये चुदाई कहानियाँ,रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। ना जाने कब आएगा? तभी एक दिन मेरी किस्मत चमक उठी और मुझे जिस मौके की तलाश थी वो आज मुझे मिल गया। मेरी पत्नी डॉक्टर के पास जाँच के लिये मेरी माँ के साथ चली गई मैंने माँ को कहा कि में भी चलूं लेकिन माँ ने मना कर दिया और कहा कि तू क्यों परेशान होता है? और फिर घर पर कामिनी भी अकेली कैसे रहेगी? फिर में माँ की इस बात से सहमत था। फिर मैंने डॉक्टर से एक दिन पहले बात की थी और मेरी पत्नी का नंबर लगा दिया था। फिर उस दिन मुझे पता था कि आज घर पर करीब तीन, चार घंटो के लिये बस हम दोनों थे में और मेरी साली और कोई नहीं फिर क्या था.. आज तो बस मेरी चाँदी ही चाँदी थी। फिर करीब सुबह के दस बजे मैंने.. माँ और मेरी पत्नी को घर के बाहर से विदा किया और फिर में दरवाजा अंदर से बंद करके अंदर चला आया और सीधा अपने कमरे में गया और वहाँ से मैंने एक कंडोम का पैकेट लिया और अपनी ज़ेब में रख लिया।

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फिर में सीधा किचन में गया जहाँ पर कामिनी काम में व्यस्त थी। तभी मैंने उसे अचानक पीछे से पकड़ लिया और उसकी गर्दन पर चूमने लगा और उसके बूब्स को दबाने लगा लेकिन उसने कोई भी विरोध नहीं किया। फिर मैंने किचन में ही उसके बूब्स दबाने शुरू कर दिए और उसने अपना हाथ आगे बड़ा कर मेरा लंड पकड़ लिया और सहलाने लगी। तभी मैंने उससे कहा कि चलो अब हम चुदाई पलंग पर करते है। फिर मैंने पलंग पर लेटा दिया और लेटते ही मैंने उसे पकड़ कर उसके होंठो को अपने होंठो से दबा लिया और फिर उसे चूमने लगा। फिर पांच मिनट किस करने के बाद में नीचे हुआ और उसके बूब्स को कुर्ती के ऊपर से दबाने लगा। तभी कामिनी की सांसे तेज होती जा रही थी। ये चुदाई कहानियाँ,रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। फिर उसने मुझे अपने ऊपर खींच लिया और में उसके ऊपर था और उसके बूब्स दबा रहा था और फिर उसकी गर्दन पर अपनी जीभ से चाट रहा था।तभी में ऊपर से हटा और फिर उसे बैठाकर उसकी कुर्ती को उतार दिया। उसने ब्रा नहीं पहनी थी। फिर जैसे ही मैंने कुर्ती उतारी उसके गोर गोर 32 के बूब्स मेरे सामने आ गए। में पागल सा होने लगा और कामिनी को नीचे दबाकर उसके बूब्स पर टूट पड़ा। फिर एक हाथ से उसके सीधे बूब्स को और जोर से और फिर दूसरे बूब्स को मेरे मुहं में लेकर चूस रहा था और हल्के हल्के दबा रहा था। फिर मेरे हर बार दबाने के साथ कामिनी का जोश बढ़ता जा रहा था और जोर से उनको चूसने और मसलने लगा। कामिनी को भी मजा आने लगा और उसके मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी।फिर मैंने उसकी चूचियों को जी भर कर चूसा और चूसते-चूसते ही में एक हाथ से उसकी चूत पर ले गया और सलवार के ऊपर से ही उसकी चूत सहलाने लगा। फिर थोड़ा फिर में धीरे-धीरे उसकी सलवार में हाथ डाल कर पेंटी के अन्दर अपना हाथ ले गया और उसकी चूत को सहलाने लगा। सच में कामिनी की चूत बहुत ही सेक्सी और कोमल थी.. में तो बस मदहोश हो गया था। फिर में धीरे धीरे उसकी चिकनी चूत को सहलाने लगा। तभी उसकी चूत बहुत गीली हो चुकी थी और वो मुझे कहने लगी थी अब और बर्दाश्त नहीं होता प्लीज लंड डालो ना।

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तभी में समझ गया कि अब ये पूरी तरह से गरम हो चुकी है। फिर मैंने जल्दी से उसकी सलवार का नाड़ा खोलकर उसे उतार दिया और फिर पेंटी के ऊपर से ही उसको चूमने लगा। फिर मैंने अब मौका गंवाए बिना उसकी पेंटी को भी उतार फेंका। फिर में जल्दी से नीचे आया और फिर अपने दोनों पैर फैलाकर लेट गया और उसे अपने ऊपर खींच लिया। तभी वो समझ गई और मेरे लंड को हाथ में लेकर ऊपर नीचे करने लगी। फिर जैसे ही उसने हिलाना शुरू किया मुझे करंट के झटके लगने लगे क्योंकि पहली बार किसी दूसरी लड़की के हाथ में मेरा लंड था। फिर में लंड धीरे से उसकी चूत में घुसाने लगा लेकिन उसकी चूत बहुत टाईट थी।तभी मैंने धीरे से एक धक्का दिया लंड चूत के अंदर चला गया। फिर उसकी चूत से खून बहने लगा था और कामिनी आँखें बंद किये सिसकारियां भर रही थी। तभी मुझे सही मौका मिला और अचानक मैंने एक जोर का झटका दिया और अपना पूरा 8 इंच का लंड उसकी चूत की गहराइयों में डाल दिया। ये चुदाई कहानियाँ,रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। तभी वो बहुत जोर से चीखी और जोर से तड़पने लगी वो दर्द से छटपटाने लगी और कहने लगी कि प्लीज मुझे छोड़ दो और फिर वो जोर जोर से रोने लगी। फिर पाँच मिनट तक में सिर्फ़ उसके बूब्स को चूसता रहा और उसके पूरे शरीर पर हाथ फैरता रहा। तभी धीरे धीरे उसका दर्द कम हुआ और तभी थोड़ी देर में उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी हिल हिल कर चुदाई का मज़ा लेने लगी। फिर करीब 15 मिनट तक में उसे बिना रुके चोदता रहा और इतनी देर में उसकी चूत गीली हो गई और उसका दर्द कम हो गया और वो बहुत मज़े लेकर चुदवाने लगी। फिर वो भी नीचे से गांड हिलाकर मेरा साथ दे रही थी और बोल रही थी अह्ह्ह ईईइ और जोर से मुझे चोदते रहो और जोर से चोदो मुझे। तभी वो एकदम से अकड़ गई और झड़ गई। फिर में अपने लंड को अंदर बाहर करता रहा कुछ देर बाद उसे भी मज़ा आने लगा और वो भी मेरा साथ देने लगी। फिर में उसे जोर जोर से चोदता रहा। फिर करीब दस मिनट बाद में उसकी चूत में झड़ गया और मैंने पूरा वीर्य कामिनी की चूत में डाल दिया। फिर मुझे कोई डर नहीं था क्योंकि मैंने पहले से ही लंड पर कंडोम चड़ा लिया था।

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दोस्तों फिर चार घंटो में मैंने करीब उसकी दो बार चुदाई की फिर जब भी मुझे चुदाई का मौका मिलता तो में कामिनी की चुदाई करता और अपने लंड को शांत करता। दोस्तों मैंने कभी भी कामिनी को बिना कंडोम के नहीं चोदा क्योंकि उसकी अभी शादी नहीं हुई थी और कभी भी मेरी पत्नी को भी पता नहीं चला

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Wednesday, 6 December 2017

Sali ne Khud Choot Chudvane ki Pahal Ki - Hindi Sex Story

दोस्तो, पूर्व में प्रकाशित ‘चपरासिन की फुद्दी चोदकर माँ बनाया‘ और ‘ऑफिसर की बीवी की फुद्दी चोदी‘ बहुत सारे पाठकों को पसंद आई और ढेर सारे इमेल्स भी मिले, उसके लिए धन्यवाद।
दोस्तो, आज मैं अपनी साली की चुदाई का किस्सा लेकर आया हूँ कि किस तरह मैंने अपनी साली को कुतिया बना के चोदा जो अभी महीने भर पहले की बात है।
दोस्तो, यूँ तो सब कहते हैं कि साली आधी घरवाली होती है और यह भी कहते हैं कि जिस तरह पेट की भूख मिटाना जरूरी है, उसी तरह तन की भूख मिटाना भी जरूरी होता है।
यह किस्सा भी कुछ इसी तरह का है दोस्तो…
मैं शादीशुदा हूँ तो मेरी बीवी ने मुझे उसके बारे में बताया था।
वो मेरे दूर के रिश्ते में मामा ससुर की लड़की है, नाम है रिंकी, उसकी शादी को अभी पूरा एक साल भी नहीं हुआ कि उसका रिश्ता बिगड़ गया और कोर्ट में केस चल रहा है और वो पिछले 6 महीने से अपने मायके में है।
मैंने मेरी बीवी को कहा- यार जो हुआ वो बहुत बुरा हुआ। रिंकी के ऊपर क्या बीती होगी वो ही जानती है।
हालाँकि मैंने कभी मैंने उसको देखा नहीं था।
फिर मैं और मेरी बीवी महीने भर पहले अपनी बुआ सास के बच्चों की शादी में गये थे।
वहाँ रिंकी भी आई हुई थी, जिसका हम दोनों को पता नहीं था कि शादी में वो भी आएगी।
मेरे फूफा ससुरजी ने मेहमानों के रुकने के लिए अच्छी व्यवस्था की हुई थी, उन्होंने एक पूरी धर्मशाला किराये पर की हुई थी, जिसमें करीब बीस कमरे थे, हम दोनों को भी एक अलग कमरा दिया।
मैं सफ़र से थका हुआ था तो फ्रेश होकर मैं वहाँ शामियाने के नीचे कुर्सी लगाकर बैठ गया और अपना मोबाइल निकाल कर गेम खेलने लग गया।
करीब आधे घंटे बाद एक लड़की मेरे पास आई और मुझसे बोली, जीजाजी…
मैंने उसे देखा तो तो मैं तो उसे देखता ही रह गया।
क्या तारीफ करूँ दोस्तों उसकी… वो तो अपने आप में खूबसूरती की मिसाल थी।
बड़ी बड़ी काली आँखें, भरा भरा गदराया बदन, 36-32-36 के भरे भरे उसके मम्मे थे जिन्हें देखते ही मेरे मुँह में पानी आ गया कि अभी इन्हें मसल कर इनका दूध पी जाऊँ, और होंठ तो गुलाब की पंखुड़ियों के जैसे पतले थे जिन्हें एक बार चूसो तो छोड़ने का मन न करे।
खैर, फिर मैंने अपने आप को कण्ट्रोल करते हुए उससे उसका परिचय पूछा तो मुझे देखते हुए मुस्कुरा रही थी।
मैंने उससे पूछा- क्या हुआ?
तो वो बोली कुछ नहीं और वो हंसने लगी।
शायद वो मेरे मन की स्थिति जान चुकी थी, वो बोली- मेरा नाम रिंकी है और मैं आपके मामा ससुर की लड़की हूँ।
फिर मैं बोला- ओह तो आप है रिंकी, हाँ आपकी दीदी ने बताया था आपके बारे में।
मैंने उससे पूछा- मैंने तो आपको पहले कभी देखा नहीं तो अपने मुझे कैसे पहचाना?
वो बोली- इससे पहले जब आप दिनेश (छोटे मामा ससुर का लड़का) की शादी में आये थे तो मैंने आपको वहाँ देखा था लेकिन हम मिल नहीं पाए थे।
मैं बोला- कोई बात नहीं, अब मिल लिए न।
वो बोली- जीजाजी बहुत तारीफ सुनी आपकी।
मैं बोला- वो क्या?
उसने कहा- आप किस तरह दीदी का पूरा पूरा ख्याल रखते हो, उनकी हर विश पूरी करते हो, उन्हें किसी तरह की कोई कमी महसूस होने देते। वो बहुत खुश है आपके साथ। परिवार में सब आपकी तारीफ करते नहीं थकते। मेरी बहुत इच्छा थी आपसे मिलने की।
मैं बोला- साली जी, वो तो हर पति का कर्तव्य है और वैसे भी बीवी की सेवा नहीं करेंगे तो मेवा कैसे मिलेगा।
मेरे इस जवाब से वो थोड़ी शरमा गई।
मैं बोला- चलो आपको शरमाना भी आता है।
वो बोली- जीजाजी, सचमुच दीदी बड़ी लकी है जो आप उसे मिले।
इतने में मेरी बीवी वहाँ आ गई और बोली- मिल लिए रिंकी से?
मैंने कहा- मैं तो इसे जानता तक नहीं था, इसी ने पहचाना मुझे।
फिर हम काफी देर तक वहाँ बैठकर बातें करते रहे लेकिन मेरा पूरा ध्यान रिंकी पर था।
मैं बार बार उसे और उसके वक्ष उभारों को देख रहा था।
वो भी समझ चुकी थी कि जीजाजी की नज़र कहाँ है और वो मुझे हल्की हल्की मुस्कान दे रही थी।
मैं भी मन ही मन बड़ा खुश हो रहा था।
फिर हम शाम को निकासी में मिलने को कह कर अपने अपने कमरे में चले गये।
शाम को निकासी में जाने के लिए सब तैयार होकर नीचे धर्मशाला के चौक में इकट्ठे हो रहे थे लेकिन मेरी नज़र तो सिर्फ रिंकी को खोज रही थी।
काफी देर के बाद वो भी आई, क्या क़यामत लग रही थी दोस्तो, वो नील रंग की साड़ी में और ब्लाउज तो काफी खुला था जिस कारण उसके मम्मों की गहराई बिल्कुल साफ दिखाई दे रही थी।
रिंकी के मम्मों को देख कर तो मुझे पता नहीं क्या हुआ जो मैं उन्हें ही ललचाई नजरों से देख रहा था।
रिंकी मुस्कुराते हुए बोली- जीजाजी, क्या हुआ?
एकदम से मैं बोला- कुछ नहीं कुछ नहीं।
वो हंसते हुए भाग गई और मैं उसे देखता रह गया।
थोड़ी देर के बाद निकासी धर्मशाला से लड़की वाले के घधर्मशाला से लड़की वाले के घर के लिए रवाना हुई, चूँकि लड़की भी वहीं की थी।
सब नाच रहे थे, मैं भी नाच रहा था लेकिन मेरा पूरा ध्यान रिंकी पर था।
मैं नाचते हुए उसे देख रहा था और वो मेरी पत्नी के साथ नाचने में मगन थी।
फिर तो मैं अपनी मस्ती में नाचने में मशगूल हो गया।
आधे घंटे के बाद मेरी बीवी मेरे पास आई और साइड में ले गई जहाँ रिंकी उल्टियाँ कर रही थी।
मैंने भी पूछा- क्या हुआ?
वो बोली- घबराहट के कारण ऐसा हुआ।
रिंकी ने कहा- जीजाजी मुझे तो आप धर्मशाला में छोड़ आओ, मेरी तबियत बिगड़ रही है।
मेरी पत्नी ने कहा- आप इसे हॉस्पिटल दिखा कर इसे इसके कमरे पर छोड़ आओ।
मैंने कहा- ठीक है।
फिर वो वहाँ से चली गई।
उसके जाने के बाद रिंकी ने कहा- जीजा जी, मुझे हॉस्पिटल नहीं जाना, आप मुझे सीधा रूम पर छोड़ दो।
मैंने कहा- ठीक है, चलो।
फिर भी नजदीक के मेडिकल से एक दवा ली और पैदल ही धर्मशाला पहुँच गये।
वहाँ वेटर को चाय की बोलकर रिंकी को लेकर उसके रूम में पहुँचा।
उसको टेबलेट खिलाई और थोड़ी देर के बाद वेटर आया और चाय देकर चला गया।
मैं उठा और दरवाजा बंद करके वापस उसके पास आकर बैठा और बोला- अब कैसा फील हो रहा है?
वो बोली- अब ठीक है।
मैंने उससे पूछा- क्या हुआ था जो तुम उलटियाँ कर रही थी?
मैं फिर बोला- कहीं पेट में कुछ गड़बड़ तो नहीं है?
रिंकी बोली- मैं कुछ समझी नहीं जीजाजी।
मैं बोला- मतलब यह सालीजी कि यह गर्भ का मामला तो नहीं है न?
वो हंसते हुए बोली- नहीं जीजाजी, ऐसी कोई बात नहीं है, और मेरे नसीब में औलाद का सुख ही नहीं है।
मैंने उससे उसके पति के बारे में पूछा तो वो रोने लगी और कहने लगी- वो पति तो सिर्फ नाम के हैं, वो तो ज्यादा टाइम अपनी भाभी के साथ बिताते हैं। मेरे पास तो सिर्फ सोने के लिए आते हैं और हर दिन गर्भनिरोधक गोली खिला देते हैं ताकि मैं माँ नहीं बन सकूँ।
फिर एक दिन रात में मैंने उन दोनों को सेक्स करते हुए देख लिया और मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और मैंने अपने मम्मी पापा को सब कुछ बता दिया। तब से मैं अपने मायके में रह रही हूँ और पापा ने मेरी ससुराल वालों पे केस दायर कर दिया।
ऐसा कह कर वो रोने लगी।
मैंने खेद जताते हुए उसे चुप कराया और उसके करीब जाकर बैठ गया।
हिम्मत करके मैंने उसके हाथ को अपने हाथों में लिया और उसे सहलाते हुए उसे समझाने लगा कि जो हुआ उसे वो भूल जाये और एक नए सिरे से अपनी जिन्दगी की शुरुआत करे और इसमें मैं तुम्हारी हर प्रकार से हेल्प करूँगा।
ऐसा कहते हुए मैं सिर्फ उसे ही निहार रहा था, तभी वो रोते हुए मेरे गले से लग गई और धन्यवाद देते हुए बोली- जीजाजी भगवान करे कि अबकी बार भगवान् मुझे आप जैसा साथी दे।
मैंने उससे कहा कि वो चिंता न करे, अबकी बार उसके लिए लड़का मैं देखूँगा।
वो थैंक्स कहते हुए मुझसे लिपट गई।
उसके ऐसा करने से मेरा लंड खड़ा हो गया जब उसके उरोज़ मेरे सीने से चिपक के दब गए।
मैंने भी उसे दबाते हुए अपनी बाँहों में भर लिया।
अलग होते हुए वो मुझसे बोली- जीजा जी, आपसे कुछ मांगूं तो आप मुझे देंगे?
मैंने उसे वादा देते हुए हामी भरी तो रिंकी बोली- जीजाजी क्या आप मुझे दीदी के हिस्से में से थोड़ा प्यार मुझे देंगे…?
और बड़ी मासूमियत के साथ मुझे देखने लगी।
मैंने भी थोड़ा सोचा और फिर उसे गले से लगा लिया।
उसकी आँखों में देखते हुए मैंने अपने होंठों को उसके लरजते हुए होंठों से मिला दिया और उसके होंठों का रसपान करने लगा।
हम दोनों बड़ी तल्लीनता के साथ एक दूसरे के होंठों को चूस रहे थे।
उसके लबों को चूसते हुए मेरा एक हाथ रेंगते हुए उसके एक स्तन को मसलने लगा।
करीब 8-10 मिनट के बाद हम अलग हुए और एक दूसरे को देखने लगे।
मैंने उसके शरीर से साड़ी को उतारा और ब्लाउज के ऊपर से ही उसके मम्मों को बड़ी बेरहमी के साथ मसलने लगा तो वो कसमसाने लगी और कहने लगी- सी..सी… ओह… जीजाजी मसलो इन्हें, खूब दबाव इन्हें…
फिर मैंने उसके ब्लाउज को भी उतार दिया, उसने काली रंग की ब्रा पहन रखी थी।
उसके गोरे तन पर काली ब्रा उसके चूचों को ढके हुए थी।
मैंने उसके शरीर से उसे भी उतार दिया।
रिंकी के नंगे बोबों को देखते ही मैं पागल हो गया और पागलों की तरह उन्हें जोर जोर से मसलने लगा।
फिर मैं उसकी एक निप्पल को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा और दूसरे को बड़े प्यार से दबाने लगा।
रिंकी भी मस्ती में आते हुए अपने मुँह से ‘सी..सी.. आह..आह्ह… उह्ह…उह्ह..’ की आवाज़ें करने लगी और अपने होंठों को दांतों से दबाते हुए मचलने लगी।
इसी दौरान मैंने उसके पेटीकोट का नाड़ा खोलकर उसके पेटीकोट को भी उतार दिया।
अब उसके शरीर पर सिर्फ अंडरवियर थी जो उसकी गुलाबी चूत को ढके हुए थी।
मैं बारी बारी से उसके चूचों को चूस रहा था और दबा दबा के मसल रहा था।
रिंकी अपनी मस्ती में पागल होते हुए ‘ओह जीजाजी… ओह जीरिंकी मज़े में चुदते हुए ‘उह्ह.. उह्ह.. उह्ह… हाय… हाय… आह.. आह… और चोदो… और.. और… और… आह… आह… आह…’ और पता नहीं जाने क्या क्या बक रही थी।
अब मैं लास्ट स्टेज पर पहुँच गया था, मैं बोला- रिंकी मेरा पानी छुटने वाला है अन्दर छोड़ूँ या फिर बाहर?
वो बोली- जीजा जी मुझे आपके लंड का पानी और पीना है।
फिर मैं जोर जोर से शॉट मारने लगा।
लगभग 2 मिनट के बाद मेरे लंड ने पानी छोड़ दिया तो रिंकी गप्प से मुँह में लेकर लंड को चूसने लगी और आखरी बूंद तक चूसती रही।
थोड़ी देर के बाद जब हम नार्मल हुए तो हमने हमारे कपड़े पहने।
तभी रिंकी मेरे पास आई और मुझे किस करते हुए मुझे थैंक्स बोला और कहा- यह मेरी लाइफ का सबसे यादगार लम्हा रहेगा जीजाजी। मैं इसे कभी नहीं भूलूँगी।
और इतना कहते हुए मुझे गले से लगा लिया।
दोस्तो, यह हकीकत है, बस आप पाठकों के मनोरंजन के उद्देश्य से आपसे शेयर कर रहा हूँ।
आपको मेरा नया अनुभव कैसा लगा, मेल जरूर करें!
sharmamannu542@gmail.com
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Thursday, 30 November 2017

जीजू से किचन में चुदवाया - Jiju Se Kitchen me Chudvaya | Hindi Sex Story

दोस्तो, आज आपके लिए पेश है जीजा साली चूत चुदाई की एक मस्त कहानी!
मेरी एक पाठिका ने मुझे अपनी शादी से पहले अपने जीजा से सेक्स की बात बताई, इसके अलावा उसने अपने कुछ विचार, कुछ बहुत ही निजी बातें शेयर की, जो मैं एक कहानी के रूप में आपके सामने पेश कर रहा हूँ।
इस कहानी का मेरी उस पाठिका के जीवन से कोई लेना देना नहीं है, यह कहानी सिर्फ एक सोच पर आधारित काल्पनिक कहानी है, हाँ इतना ज़रूर है कि इसमें मसाला थोड़ा ज़्यादा डाला है ताकि आपको पढ़ने में मज़ा ज़्यादा आए।
दोस्तो, मेरा नाम महक है और मैं 28 साल की हूँ, शादीशुदा, हूँ एक छोटी सी बेटी है।
बात काफी पुरानी है, दरअसल हम दो जुड़वाँ बहनें हैं, खुशबू मुझसे सिर्फ 2 मिनट बड़ी है, हम दोनों की शक्ल, सूरत, जिस्म के आकार बिल्कुल एक से हैं। यानि हम दोनों इतनी मिलती जुलती हैं कि अक्सर हमारे माँ बाप भी हमें पहचानने में धोखा खा जाते हैं।
मगर जिस बात का हम दोनों में फर्क था वो थी हमारी नेचर, मतलब यह कि जहाँ खुशबू बहुत नर्म स्वभाव की है, मुझमें उदंडता और जलन की भावना कुछ ज़्यादा ही है।न जाने क्यों मगर मैं हमेश ही खुशबू से जलती हूँ। जैसे जैसे मैं बड़ी हो रही थी, मुझमें जलन बढ़ती जा रही थी। हम दोनों एक साथ जवान हो रही थी, दोनों को पहली महवारी भी एक ही दिन आई, दोनों एक ही दिन ब्रा पहननी शुरू की, क्योंकि हम बिल्कुल एक जैसी थी, इसलिए एक दूसरे के कपड़े भी पहन लेती थी, मगर न जाने मुझे क्यों लगता था कि खुशबू मुझसे बेहतर है।
जबकि कोई भी आम इंसान हम दोनों में कोई फर्क नहीं ढूंढ पाता था, सिवाए इसके कि मेरी जांघ पे एक छोटा सा काला निशान था, जो सिर्फ पेंटी उतारने पे ही दिखता था।
स्कूल पास करके हम दोनों कॉलेज में आई। वहीं पे हमें अमित मिला, मगर उसने भी मेरी बजाए खुशबू को ही प्रपोज़ किया, इसने तो मुझे अंदर तक जला डाला। इसी जलन की वजह से मैं भी यह महसूस करने लगी थी कि मैं भी अमित से प्यार करने लगी हूँ, मुझे यह लगता था कि अगर मैंने अमित को हासिल नहीं किया तो पता नहीं क्या हो जाएगा।
और इसी वजह से मैं एक बार डेट पर अमित के साथ खुशबू बन कर चली गई। डेट पे हमने मूवी देखी, मूवी देखते हुये अमित ने मुझे किस किया और मेरी शर्ट में हाथ डाल कर मेरे नए नए जवान हुये बूब्स को भी दबाया।यह मेरी ज़िंदगी का पहला किस था और अपनी लाइफ में पहली बार किसी लड़के ने मेरी शर्ट के अंदर हाथ डाल कर मेरे बूब्स मसले थे।
जब मूवी देख कर हम बाहर आए तो अमित बोला- ओ के महक, फिर कब मिलोगी?
मुझे बड़ी हैरानी हुई कि इसने मुझे कैसे पहचान लिया।
मुझे हैरान देख कर वो बोला- तुम सोच रही होगी कि मैंने तुम्हें कैसे पहचान लिया? बहुत आसान है, खुशबू ने कभी भी मुझे छूने नहीं दिया, हमने एक दूसरे से प्रोमिस किया था कि जो भी करेंगे वो शादी के बाद करेंगे, अगर तुम खुशबू होती तो तुम्हें प्रोमिस याद होता।
‘मतलब तुमने सब कुछ जानते हुये जानबूझ कर वो सब मेरे साथ किया?’ मैंने पूछा।
‘तो हर्ज़ क्या है, तुम भी तो मेरी साली हो, आधी घर वाली हो, थोड़ा बहुत हक़ तो तुम पर भी बनता है।’ कह कर वो हंस दिया।
उसके बाद मैं अपने घर आ गई, बेशक उसके बाद हमें ऐसा कोई मौका नहीं मिला, और मैंने देखा कि खुशबू भी हम दोनों को लेकर ज़्यादा ही अलर्ट हो गई है, शायद उसको अमित ने बता दिया या उसे ही शक हो गया। मगर न जाने क्यों मैं भी अमित से प्यार करने लगी, मैं चाहती थी कि अमित खुशबू को छोड़ कर मेरे से प्यार करे, जब भी मौका मिलता तो मैं अमित से खूब हंसी मज़ाक और फ्लर्ट करती, मगर खुशबू हम पे बहुत नज़र रखती।यह मेरी ज़िंदगी का पहला किस था और अपनी लाइफ में पहली बार किसी लड़के ने मेरी शर्ट के अंदर हाथ डाल कर मेरे बूब्स मसले थे।
जब मूवी देख कर हम बाहर आए तो अमित बोला- ओ के महक, फिर कब मिलोगी?
मुझे बड़ी हैरानी हुई कि इसने मुझे कैसे पहचान लिया।
मुझे हैरान देख कर वो बोला- तुम सोच रही होगी कि मैंने तुम्हें कैसे पहचान लिया? बहुत आसान है, खुशबू ने कभी भी मुझे छूने नहीं दिया, हमने एक दूसरे से प्रोमिस किया था कि जो भी करेंगे वो शादी के बाद करेंगे, अगर तुम खुशबू होती तो तुम्हें प्रोमिस याद होता।
‘मतलब तुमने सब कुछ जानते हुये जानबूझ कर वो सब मेरे साथ किया?’ मैंने पूछा।
‘तो हर्ज़ क्या है, तुम भी तो मेरी साली हो, आधी घर वाली हो, थोड़ा बहुत हक़ तो तुम पर भी बनता है।’ कह कर वो हंस दिया।
उसके बाद मैं अपने घर आ गई, बेशक उसके बाद हमें ऐसा कोई मौका नहीं मिला, और मैंने देखा कि खुशबू भी हम दोनों को लेकर ज़्यादा ही अलर्ट हो गई है, शायद उसको अमित ने बता दिया या उसे ही शक हो गया। मगर न जाने क्यों मैं भी अमित से प्यार करने लगी, मैं चाहती थी कि अमित खुशबू को छोड़ कर मेरे से प्यार करे, जब भी मौका मिलता तो मैं अमित से खूब हंसी मज़ाक और फ्लर्ट करती, मगर खुशबू हम पे बहुत नज़र रखती।यह मेरी ज़िंदगी का पहला किस था और अपनी लाइफ में पहली बार किसी लड़के ने मेरी शर्ट के अंदर हाथ डाल कर मेरे बूब्स मसले थे।
जब मूवी देख कर हम बाहर आए तो अमित बोला- ओ के महक, फिर कब मिलोगी?
मुझे बड़ी हैरानी हुई कि इसने मुझे कैसे पहचान लिया।
मुझे हैरान देख कर वो बोला- तुम सोच रही होगी कि मैंने तुम्हें कैसे पहचान लिया? बहुत आसान है, खुशबू ने कभी भी मुझे छूने नहीं दिया, हमने एक दूसरे से प्रोमिस किया था कि जो भी करेंगे वो शादी के बाद करेंगे, अगर तुम खुशबू होती तो तुम्हें प्रोमिस याद होता।
‘मतलब तुमने सब कुछ जानते हुये जानबूझ कर वो सब मेरे साथ किया?’ मैंने पूछा।
‘तो हर्ज़ क्या है, तुम भी तो मेरी साली हो, आधी घर वाली हो, थोड़ा बहुत हक़ तो तुम पर भी बनता है।’ कह कर वो हंस दिया।
उसके बाद मैं अपने घर आ गई, बेशक उसके बाद हमें ऐसा कोई मौका नहीं मिला, और मैंने देखा कि खुशबू भी हम दोनों को लेकर ज़्यादा ही अलर्ट हो गई है, शायद उसको अमित ने बता दिया या उसे ही शक हो गया। मगर न जाने क्यों मैं भी अमित से प्यार करने लगी, मैं चाहती थी कि अमित खुशबू को छोड़ कर मेरे से प्यार करे, जब भी मौका मिलता तो मैं अमित से खूब हंसी मज़ाक और फ्लर्ट करती, मगर खुशबू हम पे बहुत नज़र रखती।यह मेरी ज़िंदगी का पहला किस था और अपनी लाइफ में पहली बार किसी लड़के ने मेरी शर्ट के अंदर हाथ डाल कर मेरे बूब्स मसले थे।
जब मूवी देख कर हम बाहर आए तो अमित बोला- ओ के महक, फिर कब मिलोगी?
मुझे बड़ी हैरानी हुई कि इसने मुझे कैसे पहचान लिया।
मुझे हैरान देख कर वो बोला- तुम सोच रही होगी कि मैंने तुम्हें कैसे पहचान लिया? बहुत आसान है, खुशबू ने कभी भी मुझे छूने नहीं दिया, हमने एक दूसरे से प्रोमिस किया था कि जो भी करेंगे वो शादी के बाद करेंगे, अगर तुम खुशबू होती तो तुम्हें प्रोमिस याद होता।
‘मतलब तुमने सब कुछ जानते हुये जानबूझ कर वो सब मेरे साथ किया?’ मैंने पूछा।
‘तो हर्ज़ क्या है, तुम भी तो मेरी साली हो, आधी घर वाली हो, थोड़ा बहुत हक़ तो तुम पर भी बनता है।’ कह कर वो हंस दिया।
उसके बाद मैं अपने घर आ गई, बेशक उसके बाद हमें ऐसा कोई मौका नहीं मिला, और मैंने देखा कि खुशबू भी हम दोनों को लेकर ज़्यादा ही अलर्ट हो गई है, शायद उसको अमित ने बता दिया या उसे ही शक हो गया। मगर न जाने क्यों मैं भी अमित से प्यार करने लगी, मैं चाहती थी कि अमित खुशबू को छोड़ कर मेरे से प्यार करे, जब भी मौका मिलता तो मैं अमित से खूब हंसी मज़ाक और फ्लर्ट करती, मगर खुशबू हम पे बहुत नज़र रखती।यह मेरी ज़िंदगी का पहला किस था और अपनी लाइफ में पहली बार किसी लड़के ने मेरी शर्ट के अंदर हाथ डाल कर मेरे बूब्स मसले थे।
जब मूवी देख कर हम बाहर आए तो अमित बोला- ओ के महक, फिर कब मिलोगी?
मुझे बड़ी हैरानी हुई कि इसने मुझे कैसे पहचान लिया।
मुझे हैरान देख कर वो बोला- तुम सोच रही होगी कि मैंने तुम्हें कैसे पहचान लिया? बहुत आसान है, खुशबू ने कभी भी मुझे छूने नहीं दिया, हमने एक दूसरे से प्रोमिस किया था कि जो भी करेंगे वो शादी के बाद करेंगे, अगर तुम खुशबू होती तो तुम्हें प्रोमिस याद होता।
‘मतलब तुमने सब कुछ जानते हुये जानबूझ कर वो सब मेरे साथ किया?’ मैंने पूछा।
‘तो हर्ज़ क्या है, तुम भी तो मेरी साली हो, आधी घर वाली हो, थोड़ा बहुत हक़ तो तुम पर भी बनता है।’ कह कर वो हंस दिया।
उसके बाद मैं अपने घर आ गई, बेशक उसके बाद हमें ऐसा कोई मौका नहीं मिला, और मैंने देखा कि खुशबू भी हम दोनों को लेकर ज़्यादा ही अलर्ट हो गई है, शायद उसको अमित ने बता दिया या उसे ही शक हो गया। मगर न जाने क्यों मैं भी अमित से प्यार करने लगी, मैं चाहती थी कि अमित खुशबू को छोड़ कर मेरे से प्यार करे, जब भी मौका मिलता तो मैं अमित से खूब हंसी मज़ाक और फ्लर्ट करती, मगर खुशबू हम पे बहुत नज़र रखती यह मेरी ज़िंदगी का पहला किस था और अपनी लाइफ में पहली बार किसी लड़के ने मेरी शर्ट के अंदर हाथ डाल कर मेरे बूब्स मसले थे।
जब मूवी देख कर हम बाहर आए तो अमित बोला- ओ के महक, फिर कब मिलोगी?
मुझे बड़ी हैरानी हुई कि इसने मुझे कैसे पहचान लिया।
मुझे हैरान देख कर वो बोला- तुम सोच रही होगी कि मैंने तुम्हें कैसे पहचान लिया? बहुत आसान है, खुशबू ने कभी भी मुझे छूने नहीं दिया, हमने एक दूसरे से प्रोमिस किया था कि जो भी करेंगे वो शादी के बाद करेंगे, अगर तुम खुशबू होती तो तुम्हें प्रोमिस याद होता।
‘मतलब तुमने सब कुछ जानते हुये जानबूझ कर वो सब मेरे साथ किया?’ मैंने पूछा।
‘तो हर्ज़ क्या है, तुम भी तो मेरी साली हो, आधी घर वाली हो, थोड़ा बहुत हक़ तो तुम पर भी बनता है।’ कह कर वो हंस दिया।
उसके बाद मैं अपने घर आ गई, बेशक उसके बाद हमें ऐसा कोई मौका नहीं मिला, और मैंने देखा कि खुशबू भी हम दोनों को लेकर ज़्यादा ही अलर्ट हो गई है, शायद उसको अमित ने बता दिया या उसे ही शक हो गया। मगर न जाने क्यों मैं भी अमित से प्यार करने लगी, मैं चाहती थी कि अमित खुशबू को छोड़ कर मेरे से प्यार करे, जब भी मौका मिलता तो मैं अमित से खूब हंसी मज़ाक और फ्लर्ट करती, मगर खुशबू हम पे बहुत नज़र रखती।वक़्त बीतता गया, अमित को बहुत अच्छी जॉब मिल गई, नौकरी मिलते ही अमित और खुशबू की शादी भी हो गई।
मगर मैं जानती हूँ कि दोनों की शादी में सबसे ज़्यादा दुखी मैं थी। मगर खुशबू की शादी के बाद हमारी प्रेम कहानी भी चल निकली। जीजू जब भी हमारे घर आते किसी न किसी बहाने से मुझसे अकेले ज़रूर मिलते और उन लम्हों में वो अक्सर मुझे चूम लेते, मुझे बाहों में भर लेते, कभी कभी तो बूब्स भी दबा देते, मैं मना करती तो कहते- कौन सा पहली बार दबा रहा हूँ, उस दिन सिनेमा में भी तो दबाये थे।
मैं भी हंस कर टाल देती, मगर इससे जीजू की हिम्मत और बढ़ती गई, और फिर तो मौका मिलते ही वो मेरे चूतड़ सहलाने और मेरी योनि को छूने तक जाने लगे।
क्योंकि मैं भी जीजू से प्यार करती थी तो मैंने कभी कोई सख्त विरोध नहीं किया।
सच कहूँ तो मैं खुद उनसे सेक्स करना चाहती थी।
क्योंकि मैं दिल से अमित से प्यार करती थी, इसलिए मैंने कभी किसी लड़के को अपने पास नहीं आने दिया।फिर खुशबू प्रेग्नेंट हो गई, उन्हीं दिनों एक बहुत बड़ी बात हो गई, हुआ यूं कि एक दिन मम्मी पापा किसी के कीर्तन पे गए थे, दीदी अपने कमरे में आराम कर रही थी और मैं किचन में कुछ पका रही थी, तभी अमित जीजू किचन में आए और न जाने क्या हुआ, बातें करते करते उन्होंने मुझे पीछे से बाहों में भर लिया, मुझे थोड़ा अजीब लगा, मगर बुरा नहीं लगा।
बाहों में भरने तक तो ठीक था, मगर मैंने महसूस किया के जीजू तो पीछे से अपना लिंग मेरे हिप्स की दरार से सटा कर धीरे धीरे से घिसा रहे थे।
मुझे बड़ी झुरझुरी सी हुई अपने सारे बदन में!
क्योंकि मैं महसूस कर रही थी कि जो नर्म सी चीज़ पहले मेरे हिप्स के साथ लगी थी वो अब नर्म से सख्त होती जा रही थी और उसका साइज़ भी बढ़ रहा थामैंने जीजू को हटाने के लिए कहा- क्या करते हो जीजू, पीछे हट कर खड़े हो।
‘क्यों, क्या मैं अपनी बीवी के साथ सट कर खड़ा नहीं हो सकता?’ जीजू ने मेरी कमर के गिर्द अपनी बाहों का घेरा और टाईट कर दिया और अपना लिंग और अच्छी तरह से मेरे हिप्स के बीच में सेट कर दिया।
सच कहूँ तो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था एक मोटा लंबा लिंग मेरे हिप्स के बीचों बीच था, उस वक़्त मैंने सिर्फ एक टी शर्ट पहनी
थी, बिना ब्रा के और एक लोअर पहना था मगर चड्डी नहीं पहनी थी। इसलिए जीजू के बदन का उनके लंड का स्पर्श मैं बहुत अच्छे से महसूस कर रही थी।
मेरी तरफ से कोई खास विरोध न देख कर जीजू ने मेरी कमर से अपनी बाहों का घेरा ढीला किया और अपने दोनों हाथों में मेरे दोनों बूब्स पकड़ लिए।
मैं तो एकदम से घबरा गई- अई… जीजू, क्या कर रहे हो?
मगर वो तो शायद सेक्स में डूब चुके थे, उन्होंने अपना लोअर नीचे किया, अपना तना हुआ लंड बाहर निकाला और मेरी दोनों टाँगों के बीच में घुसा दिया।
मैंने इस बात की कल्पना भी नहीं की थी, मैं तो छिटक कर एक दम से दूर जा खड़ी हुई- जीजू आपका दिमाग खराब हो गया है, यह क्या कर रहे हो?मैंने अपना गुस्सा ज़ाहिर किया।
मगर उन पर तो कोई असर ही नहीं था, उन्होंने मेरे सामने ही किचन अपना लोअर और टी शर्ट उतार दिये और मेरे सामने बिल्कुल नंगे हो गए- सच कहता हूँ महक, मैं तुम से बहुत प्यार करता हूँ, प्लीज़ लव मी, मैं तुम्हें बहुत प्यार करूंगा, बड़े अच्छे से चोदूँगा, लव मी डियर!
मैंने अपनी ज़िंदगी में पहली बार किसी मर्द को बिल्कुल नंगा देखा था, मैं तो सुन्न हो गई, मेरे मुख से कोई आवाज़ नहीं निकल रही थी। जीजू मेरे पास आए, मेरा हाथ पकड़ा और मुझे वापिस वहीं खड़ा कर दिया, जहां गैस के पास मैं नाश्ता बना रही थी।
मेरा दिल बड़े ज़ोर ज़ोर से धड़क रहा था, समझ मे नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ, क्या कहूँ, बेशक मैं अमित से बहुत प्यार करती थी, मगर ऐसे एकदम से उसके साथ सेक्स करना, मैं कोई फैसला नहीं ले पा रही थी, कि इस अवसर को जाने दूँ या पकड़ लूँ।
मैं गैस के पास चुपचाप से खड़ी थी तो जीजू ने फिर से आकार अपना लंड मेरे चूतड़ों पर घिसाया। मैंने कुछ नहीं कहा तो जीजू ने मेरा लोअर को पकड़ के थोड़ा सा नीचे को किया, मैं फिर भी शांत खड़ी रही तो जीजू ने धीरे धीरे मेरे रीएक्शन को देखते हुए, मेरा लोअर घुटने तक नीचे उतार दिया, मेरी टी शर्ट थोड़ी सी ऊपर उठाई और अबकि बार अपना नंगा लंड मेरे नंगे चूतड़ों की दरार से लगा दिया।मुझे बहुत ही अजब सा एहसास हुआ, जब मैंने अपने चूतड़ थोड़े से भींचे तो उनका लंड मेरे हिप्स की दरार में फंस गया। जीजू ने मेरी जांघ पे हाथ फेरते हुए नीचे घुटने तक ले गए और मेरा घुटना मोड़ कर ऊपर उठाया और किचन के शेल्फ पे रख दिया और मुझे थोड़ा सा आगे को धकेल दिया।
उसके बाद अपने लंड को नीचे से मेरी चूत पे सेट किया और आगे को धकेला।
मेरी चूत तो पहले ही शर्म से पानी पानी हुई पड़ी थी, सो उनके लंड का अगला गुलाबी हिस्सा मेरी चूत में जैसे ही अंदर को घुसा, मेरे सारे बदन में दर्द की एक लहर दौड़ गई, मैं उचक के ऊपर को उठ गई और उनका लंड मेरी चूत में घुसने से पहले ही बाहर निकल गया।
‘क्या हुआ, पहले कभी किया नहीं क्या?’ जीजू ने पूछा।
मैंने ना में सर हिलाया।
‘तब तो तुम्हारे साथ बड़े आराम से और प्यार से करना पड़ेगा… क्या तुम मेरा साथ दोगी?’ कह कर जीजू ने अपना लंड मेरी दोनों जांघों के बीच में ही घुसा दिया जो आगे से ठीक मेरी चूत के नीचे से सामने को निकल आया।वो पीछे से अपनी कमर आगे पीछे हिला रहे थे और उनके लंड का गुलाबी टोपा मेरी चूत के होंठों को सहलाता हुआ कभी बाहर आता तो कभी छुप जाता।
जीजू ने अपने दोनों हाथ मेरी टी शर्ट में डाल लिए और मेरे दोनों बूब्स को पकड़ कर सहलाया, दबाया, और उनके निप्पलों को भी मसला।
सच में मुझे बहुत आनन्द आ रहा था। मैंने अपना सिर पीछे को गिरा दिया जो जीजू के कंधे पे जा टिका। जीजू ने एक हाथ से मेरा चेहरा अपनी तरफ घुमाया और मेरे दोनों होंठ अपने होंठ में लेकर चूसने लगे।
मैंने आँखें बंद कर ली और इस हसीन लम्हे का भरपूर मज़ा लेने लगी।
जीजू ने अपने दायें हाथ की बीच वाली वाली उंगली से मेरी चूत के दाने को सहलाया।
‘उफ़्फ़…’ क्या मज़ा आ रहा था।
जीजू ने मुझे अपनी तरफ घुमाया और इस बार अपना तना हुआ लंड मेरे दोनों हाथों में पकड़ा दिया। मैं उनके लंड को सहलाने लगी। जीजू ने मुझे कमर से उठा कर ऊपर शेल्फ पर ही बैठा दिया और मेरा लोअर उतार फेंका। मेरी दोनों टाँगे चौड़ी की और अपना लंड फिर से मेरी चूत पे रख दिया।
इस बारहमारा पोज़ बिल्कुल सही था, जब उन्होंने अपना लंड अंदर धकेला तो बिना किसी रोक टोक उनके लंड का गुलाबी टोपा मेरे अंदर घुस गया।
मेरे मुख से हल्की सी एक चीख निकली मगर मैंने उसे अपने मुंह में ही दबा लिया।
जीजू ने और ज़ोर लगाया और ज़ोर ज़ोर से धकेल कर अपना सारा लंड मेरे अंदर डाल दिया। मुझे ऐसे लग रहा था जैसे किसी ने मुझे बीच में से चीर दिया हो।
मगर जीजू पर तो जैसे नशा छाया था, वो बार अपना लंड बाहर निकाल रहे थे और फिर से अंदर डाल रहे थे। जहाँ उनके इस काम से मुझे दर्द हो रहा था, वही अपने पहले सेक्स का आनन्द भी आ रहा था।
जीजू करते रहे, करते रहे, और फिर काफी देर बाद मेरे अंदर अपना गर्म गाढ़ा वीर्य छोड़ दिया, जो मेरी छोटी सी चूत से टपक कर बाहर शेल्फ पे गिर रहा था।जीजू ने मेरे होंठों को किस किया, मैंने भी उनका पूरा साथ दिया- जानेमन, अब तुम कली से फूल बन गई हो, लड़की से औरत बन गई हो, जवानी का पहला सेक्स मुबारक हो!
कह कर वो पलटे अपने कपड़े पहने और मुझे किचन की शेल्फ पर वैसे ही नंगी बैठी छोड़ कर बाहर चले गए।
2-3 मिनट बैठी मैं सोचती रही, यह आज क्या हुआ, क्या सही हुआ या गलत हुआ। फिर मैंने उठ कर अपने कपड़े पहने, शेल्फ से जीजू का वीर्य साफ किया, अपने हाथ धोकर नाश्ता बनाया, सबको दिया, जीजू को भी दिया, मगर उनके चेहरे पे एक विजयी मुस्कान थी।
बाद में उन्होंने मुझे बताया- जानती हो एक ही लड़की का दो बार कौमार्य भंग करने का कैसा मज़ा आता है, जैसे तुम्हें और खुशबू को चोद कर मुझे मिला है।
बाद में मेरी भी शादी हो गई, बच्चे हो गए मगर मैं आज भी अपने जीजू अमित से प्यार करती हूँ, आज भी जब भी हमें मौका मिलता है, हम सेक्स करते हैं।
जीजू कहते हैं- अगर सिर्फ कपड़ों को छोड़ दिया जाए तो मुझे लगता है है जैसे मैं एक ही लड़की को चोद रहा हूँ, पर फिर भी तुम दोनों को चोदने का एक्सपिरीयन्स बिल्कुल अलग है। बिस्तर से बाहर तुम दोनों बहनें एक सी हो, मगर बिस्तर में तुम दोनों में ज़मीन आसमान का फर्क है।
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Sunday, 12 November 2017

हम दोनों बहनो को जीजा ने चोदा रजाई के अंदर - Indian Sex Story | antarvasna

हम दोनों बहनो को जीजा ने चोदा रजाई के अंदर - Indian Sex Story | antarvasna कविता दीदी भी सही थी क्यों की किसी का पति अगर कही मुह मारे तो गुस्सा आएगा ही. पर हम दोनों बहनो को मजा आने लगा था.

जीजू बड़े ही हॉट है, जब वो मेरी चूतड़ पे चुट्टी काटते थे तो दर्द तो होता था पर उस दर्द का एहसास अलग ही होता था, लगता था कभी वो मेरी पेंटी में भी हाथ डालते, पर माँ का स्ट्रिक्ट पहरा होता था शायद मेरी माँ को पता था की दूल्हा हरामी है, कही मेरी बेटी पर हाथ ना साफ़ कर दे, इस वजह से उनका हाथ मेरी ब्रा के अंदर तक तो आराम से जाता था जब जब मौक़ा मिलता था, www.ahindisexstories.com
मैं अब आपको बताती हु, की कब ऐसा मौक़ा आया था की हम दोनों बहन चुद गए थे जीजा जी से, एक दिन की बात है, जीजा जी कोलकाता आये थे किसी काम से, दीदी और जीजा जी दिल्ली में रहते है, तो दुर्गापुर आ गए हम दोनों से मिलने के लिए, शाम को ७ बजे पहुंचे थे, usi दिन मम्मी और पापा दोनों भिलाई के लिए निकल गए थे क्यों की वह मेरे लिए लड़का देखने जाना था शादी के लिए, और वो एक दिन बाद आते, जीजा जी को जैसे ही पता चला की मम्मी आज ही गई है, तो वो बहुत ही खुश हो गए, ख़ुशी तो हमदोनो को भी हुई क्यों की हम दोनों भी कही से भी काम नहीं थे हम दोनों की जवानी लपलपा रही थी. आप ये कहानी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम पे पढ़ रहे है.
रात को ८ बजे का शो देखने गए पास ही में सिनेमा हाल था, बीच में जीजू थे अगल बगल हम दोनों बहने चूचियाँ तो वही से दबानी शुरू हो गई थी, वो ढाई घंटे में तो दोनों के चूत से गरम गरम पानी निकलने लगा था, मन तो कर रहा था जीजू के पेंट का ज़िप खोल कर वही लंड को मुह में ले लू, या तो उनके गोद में बैठ के पूरा का पूरा लंड अपने चूत में डाल लू, पर कोई बात नहीं हमलोग ग्यारह बजे तक घर आ गए खाना तो बाहर ही खा लिए थे, अब हमलोग को सोना था, तो सोये कहा कहा रजाई एक ही बाहर थी, बाकि ट्रंक में था, माँ चाभी ले के चली गई थी, ठण्ड की रात थी, तो हमलोग एक ही रजाई में सो गए, बीच में जीजू और साइड में हम दोनों,
जीजू पहले मेरी छोटी बहन के तरफ घूम कर सो गए थोड़ी देर बाद प्रिया के मुह से आअह आआअह आआअह आअअअह्अअअअह् की आवाज निकलने लगी, मैंने तुरंत ही रजाई हटा दी देखि की प्रिया टॉप लेस्स थी उसकी बड़ी बड़ी दोनों चूचियाँ खुली हुई थी और जीजू निप्पल को मसल रहे रहे, थे, उसके बाद मैं जीजू को बोली ये गलत है जीजू, मैं बड़ी हु, पहले मुझे ऐसा करो, तो प्रिया बोली दीदी देखो मुझे जोश आ गया है मजा मत किरकिरा करो, तो जीजू ने कहा देखो रात अपनी है, और कोई घर में है नहीं क्यों ना खूब मजे करे, और दोनों को एक साथ चुदाई करें.
ठण्ड ज्यादा थी, फिर से रजाई के अंदर चले गए और फिर मैंने अपना पूरा कपड़ा उतार दिया, प्रिया भी सारे कपडे उतार दी, फिर क्या था जीजू के कपडे हम दोनों मिलकर एक एक कर उतार दिए, हम तीनो अब एक ही रजाई में नंगे थे, और हम तीनो एक दूसरे को किश कर रहे था, जीजू मेरी चूचियाँ दबाते और कभी पीते कभी पीरा का निप्पल दबाते कभी पीते, उसके बाद तो वो प्रिया के ऊपर चढ़ गए और प्रिया के दोनों पैर को अलग अलग कर के, लंड चूत के बीच में रख के, कस के धक्का मारा, तब भी चूत के अंदर लंड नहीं गया, पर प्रिया की जान निकलने लगी काफी दर्द होने लगा वो रोने लगी, फिर मैंने प्रिया को सहलाया और प्रिया के चूची को भी सहलाया और जीजू ने फिर से तरय किया और लंड पूरा चूत के अंदर डाल दिया, अब जीजू जोर जोर से प्रिया को चोदने लगे.
मैंने अपना चूत जीजा से चटवाने लगी, वो प्रिया को चोद रहे थे और मेरी चूत को चाट रहे था और मैं प्रिया के बूब को दबा रही थी, उसके बाद मैं लेट गई और जीजू मेरे ऊपर चढ़ गए, वो मेरी चूत में ऊँगली डालने लगे और एक हाथ से चूची को मसलने लगे, मैं आह आह कर रही थी, प्रिया जीजू के गांड में अपनी चूची सटा रही थी, फिर जीजू अपना लंड मेरे चूत में डाल दिया, और चोदने लगे, क्या बताऊँ यारों कभी वो मुझे चोदते कभी प्रिया को चोदते, रात भर यही चुदाई का खेल चलता रहा.


रात भर एक रजाई के अंदर हम दोनों बहनो की चूत को फाड़ दिया था जीजू ने, उसके बाद सुबह से उनको निकलना था, वो एक बार फिर हम दोनों बहनो को चोदा और फिर चले गए www.ahindisexstories.com

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