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Thursday, 15 February 2018

शादीशुदा बहन मेरे लंड पर फिदा | Shadishuda behan mere Lund par Fida - Hindi Sex Stories

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आप इस कहानी को एक हिंदी सेक्स स्टोरीस डॉट  कॉम पर पढ़ रहे हैं।
प्रेषक : विजय …
हैल्लो दोस्तों, मेरा नाम विजय है और मेरी उम्र 24 साल, लम्बाई 5.8 है। में दिखने में ठीक लगता हूँ और में एक मध्यमवर्गीय परिवार से हूँ। दोस्तों में भी आप सभी की तरह बहुत समय से एक हिंदी सेक्स स्टोरीस डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों को पढ़कर मज़े लेता आ रहा हूँ और मुझे सभी सेक्सी कहानियाँ बहुत पसंद आती है। फिर एक बार मैंने मन में विचार बनाया कि में भी अपनी उस सच्ची घटना जो मेरे साथ घटित हुई उसको आप सभी के लिए लिखकर पेश करूं और आज मैंने उसको लिख लिया है और भेज रहा हूँ उम्मीद करता हूँ कि सभी पढ़ने वालों को यह जरुर पसंद आएगी। दोस्तों यह कहानी तब की है जब में अपनी स्कूल की पढ़ाई कर रहा था और मेरे उन दिनों 10th के पेपर पूरे होने के बाद में अपनी मौसी के घर अपनी छुट्टियाँ बिताने के लिए गया था। दोस्तों मेरी मौसी एक गाँव में रहती है और उस गाँव में उनका एक बड़ा सा घर है और जब में वहां पर पहुंचा, तब घर में मेरी मौसी और मौसा जी थे। दोस्तों वैसे मेरी मौसी को दो बेटियाँ है और वो दोनों शादीशुदा है, जिसमे से एक का नाम वर्षा है और दूसरी बेटी का नाम नंदनी है दोनों बेटियों की शादी हो जाने की वजह से अब मेरी मौसी-मौसाजी उसके कोई भी लड़का ना होने की वजह से उस इतने बड़े घर में अलेके ही रहते है।

दोस्तों मेरी वर्षा दीदी की उम्र करीब 27 साल है और नंदनी दीदी की उम्र 24 साल है और मेरे साथ जो घटना घटी वो मेरी वर्षा दीदी के साथ घटी। दोस्तों जब में अपनी मौसी के घर गया था, उस समय मेरी वर्षा दीदी भी वहीं अपनी माँ के घर आई हुई थी। फिर मेरे वहां पर पहुंचते ही वो सभी लोग मुझे देखकर बहुत खुश हुए, क्योंकि पिछले तीन साल से में अपनी स्कूल की छुट्टियों में वहीं पर जाता था। फिर में भी मेरी वर्षा दीदी को वहां पर देखकर बहुत खुश था, क्योंकि वो मुझे उनके घर पहली बार मिली थी और उनके शादी हो जाने के बाद हम दोनों एक दूसरे को बहुत कमी से मिले थे। फिर में अपनी मौसी के घर पहुंचकर मुहं हाथ धोकर उस लंबे सफर की थकान को दूर करके हल्का हो गया और उसके बाद में टीवी देखने लगा था। फिर थोड़ी ही देर के बाद वर्षा दीदी ने मुझे आवाज देकर अपने पास बुला लिया और में हाँ में अभी आ रहा हूँ कहकर तुरंत ही उनके कमरे में चला गया, क्योंकि उनका वो कमरा ऊपर था और फिर उस कमरे में जाते समय मैंने देखा कि मेरी मौसी अपना कुछ सामान एक बेग में जमा रही थी।आप इस कहानी को एक हिंदी सेक्स स्टोरीस डॉट  कॉम पर पढ़ रहे हैं।

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अब में मन ही मन में सोचने लगा कि यह क्यों अपना सामान जमा रही है? फिर मैंने अपनी दीदी के पास जाकर उनसे पूछा कि मौसी बेग में सामान क्यों जमा रही है? तब वर्षा दीदी ने मुझे बताया कि वो दोनों एक सप्ताह के लिए यात्रा पर बाहर जा रहे है। दोस्तों माफ करना में अपनी दीदी के बारे में आप सभी को बताना तो भूल ही गया और अब बता देता हूँ। मेरी दीदी थोड़ी लंबी और गोरी है, उसके बूब्स आकार में इतने बड़े नहीं थे, लेकिन उनकी वो गांड बहुत मस्त उभरी हुई थी और उनको एक बेटी भी है और वो शादीशुदा और एक बच्चे की माँ होने के बाद भी किसी कुंवारी लड़की जैसी नजर आती थी। अब में अपनी दीदी के कमरे में जाकर उनकी बेटी के साथ खेलने लगा और वो कुछ देर बाद नीचे चली गयी, फिर वर्षा दीदी ने हम सभी के लिए खाना बनाया और खाना खाने के बाद हम सभी बैठे हुए बातें कर रहे थे। फिर उन सभी ने मेरे घर का हालचल मुझसे पूछा और फिर मौसी ने मुझसे कहा कि में अपनी दीदी के साथ यहीं पर ही रहूँ, क्योंकि जल्दी सुबह ही वो लोग ट्रेन से बाहर जाने वाले है तुम्हे यहाँ आया देखकर हमारी आधी चिंता खत्म हो गई और अब हम आराम से जा सकते है, क्योंकि घर की हमे पीछे से कोई भी चिंता अब नहीं होगी।

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फिर हम सभी लोग बातें खत्म करके सोने के लिए चले गये और उसी समय जब में जा रहा था, तभी दीदी ने मुझसे कहा कि में उनके साथ ही कमरे में सो जाऊं। अब मैंने उनको तुरंत हाँ कर दिया और में साथ ऊपर वाले उनके कमरे में सोने चला गया, रात को बहुत देर तक हम दोनों बैठकर इधर उधर की बातें कर रहे थे। फिर मैंने कुछ देर बाद दीदी से उनके पति के बारे पूछा, लेकिन वो मेरे मुहं से अपने पति के बारे में सुनते ही तुरंत ही उदास हो गयी और वो अब बिल्कुल चुप हो गयी जैसे उनको कोई सांप सूंघ गया हो, उनके चेहरे से वो मुझे थोड़ी सी नाराज़ भी लगी। फिर मैंने कहा कि मुझे माफ करे मेरा आपका दिल दुखाने का इरादा बिल्कुल भी नहीं था और अब में पलंग पर लेट गया, लेकिन वो तो अब रोने लगी थी और वो कहने लगी कि उन दोनों पति-पत्नी का झगड़ा हो गया है। अब वो मुझसे कहने लगी कि हमारे बीच यह झगड़ा उनको बेटी होने की वजह से हुआ है, क्योंकि उनके पति और सास को मुझसे एक बेटा चाहिए था, लेकिन पहली बार ही बेटी होने की वजह से हमारे बीच झगड़ा हुआ था और इस वजह से वो अपनी माँ के घर वापस चली आई। अब वो अपनी बात को खत्म करके दोबारा रोने लगी थी, उनको रोता देख मुझे उनके ऊपर दया आ गई।आप इस कहानी को एक हिंदी सेक्स स्टोरीस डॉट  कॉम पर पढ़ रहे हैं।

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फिर मैंने उनको पानी लाकर दे दिया और में उनको चुप करवाने लगा था, कुछ देर के बाद हम दोनों सो गये। फिर दूसरे दिन सुबह जब में उठा तब मैंने देखा कि मेरी मौसी और मौसाजी अब तक जा चुके थे और मेरी दीदी उस समय रसोई में काम कर रही थी। फिर कुछ देर बाद हम दोनों ने साथ में बैठकर नाश्ता किया और उसके बाद हम दोनों वापस ऊपर वाले कमरे में चले गये और तभी मुन्नी रोने लगी। अब में उसको चुप करवाने के लिए उसको अपनी गोद में उठाकर उसके साथ खेलने लगा, लेकिन वो चुप ना होकर अब और भी ज़ोर से रोने लगी थी। फिर दीदी ने उसको मेरे पास से अपनी गोद में ले लिया और उन्होंने मुझसे कहा कि मुन्नी को भूख लगी है इसलिए वो इतना रो रही है, उसका दूध पीने का समय हो चुका है, इसलिए उसको अब दूध पिलाना पड़ेगा और तब जाकर ही वो चुप होगी। दोस्तों उस समय मेरी दीदी ने गाउन पहना हुआ था और फिर दीदी ने तुरंत नीचे बैठकर मेरे ही सामने अपने गाउन के ऊपर के दो तीन बटन को खोलकर अपना एक बूब्स उस खुले हिस्से से बाहर निकालकर मुन्नी के मुहं में अपने एक निप्पल को दे दिया।

अब मुन्नी उस निप्पल को अपने मुहं में लेकर चूसने लगी थी और में बस वही सब बड़े ध्यान से देख रहा था, क्योंकि मैंने पहली बार किसी को इतना पास से बच्चे को दूध पिलाते हुए और किसी के गोरे गोल बूब्स को अपनी आँखों से देखा था, इसलिए में बड़ा चकित था। फिर कुछ देर बाद दीदी ने मेरी तरफ अपनी नजर को उठाकर देखा और दीदी ने मुझसे पूछा कि तुम ऐसे क्या घूरकर देख रहे हो? अब में उनके मुहं से यह सवाल सुनकर शरमा गया। फिर तुरंत ही मैंने अपनी नजर को नीचे झुका लिया था और में उनको कहने लगा कि कुछ नहीं और फिर में उस कमरे से बाहर जाने लगा था। फिर दीदी ने उसी समय मुझसे कहा कि तुम यहीं रहो, तुम्हे कहीं नहीं जाना और में उनकी यह बात सुनकर वापस बैठ गया और उस समय मैंने अपनी झुकी नजर से चोरी छिपे देखा कि दीदी ने आज अपने उस गाउन के अंदर ब्रा नहीं पहनी थी। अब मेरी दीदी के बूब्स को मुन्नी बड़े मज़े से चूस रही थी और कुछ देर दूध पीने के बाद मुन्नी बिल्कुल शांत हो गयी और शायद वो पेट भरने की वजह से चुप थी। फिर दीदी ने मुझसे कहा कि तुम बैठकर कुछ देर इसके साथ खेलो, तब तक में नहा लेती हूँ और फिर वो मुझे अपनी बेटी के पास छोड़कर नहाने चली गयी और में मुन्नी के साथ खेलने मस्ती करने लगा था।

फिर दीदी थोड़ी देर के बाद नहाकर बाथरूम से बाहर आ गई और फिर में बस उन्हे देखता ही रहा गया, क्योंकि दीदी ने उस समय अपने गोरे चिकने बदन पर सिर्फ़ टावल ही लपेटा हुआ था और उनके वो खुले हुए लंबे काले बाल बहुत सुंदर थे वो उस गोरे बदन की सुंदरता को कुछ ज्यादा ही बढ़ा रहे थे, इसलिए मेरी दीदी उस समय क्या मस्त लग रही थी। अब पहली बार अपनी दीदी का वो कामुक द्रश्य उनका आधा नंगा बदन देखकर मेरे अंदर एक झनझनाहट होने लगी थी और में बस उनके गोरे चिकने पैर और जांघो को ही देख रहा था, जिसके वजह से मेरे अंदर की जवानी अंगड़ाई लेने लगी थी।आप इस कहानी को एक हिंदी सेक्स स्टोरीस डॉट  कॉम पर पढ़ रहे हैं। दोस्तों उस द्रश्य को देखकर मेरा मुहं पूरा खुला ही रह गया और वो कब मुझे देखने लगी थी मुझे यह भी पता नहीं रहा, मेरी नजरे अपनी दीदी के बदन को अपनी खा जाने वाली नजरों से देख रही थी, क्योंकि मेरे साथ ऐसा सब पहली बार हो रहा था। फिर दीदी ने मुझे अपने पास बुलाया, तब जाकर मैंने उनकी आँखों में झांककर देखा और में शरमा सा गया और वो मेरी तरफ देखकर हंस रही थी। दोस्तों उसी समय मेरा लंड पूरा तनकर खड़ा हो चुका था और मेरी इच्छा हो रही थी कि में अभी अपनी दीदी की चुदाई कर दूँ और मेरे झटके देते हुए लंड ने मुझे बड़ा मजबूर किया, लेकिन मुझे बड़ा डर भी लग रहा था और इसलिए में चुप ही रहा।

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फिर में वापस कमरे से बाहर जाने लगा, लेकिन दीदी ने मुझे रोक दिया और वो मेरे लंड का उभार बहुत ध्यान से देखने लगी थी और वो मेरी हालत को एकदम ठीक तरह से समझकर अब हंसने लगी थी। अब वो बिल्कुल अंजान बनकर मुझसे पूछने लगी कि यह क्या है? मैंने कुछ भी नहीं बोला में चुप ही रहा और अब दीदी ने मुझे वहीं पर बैठने के लिए कहा। अब दीदी मेरे साथ मजाक करने लगी थी और वो मुझसे कहने लगी कि अब तो तुम बड़े हो गये हो और साथ ही तुम्हारा बहुत कुछ भी मुझे बड़ा नजर आ रहा है। अब में उनकी बात का मतलब समझकर शरमा रहा था और में वहीं पर बैठा था, तभी दीदी अब मेरे सामने ही अपने कपड़े पहनने लगी थी, दीदी ने वापस ही सिर्फ़ वहीं गाउन पहन लिया था और वो भी बिना ब्रा और पेंटी के, उसके बाद तैयार होकर मुन्नी को अपनी गोद में लेकर वो दोबारा उसको अपना दूध पिलाने लगी थी। अब में लगातार वो द्रश्य देख रहा था, जिसकी वजह से मेरा लंड तनकर खड़ा हो चुका था और पेंट के अंदर ही हल्के हल्के झटके भी देने लगा था। फिर दीदी ने मुझे अपने पास बुलाया और मुझसे पूछा कि क्या हुआ? में इस बार भी कुछ बोल नहीं पा रहा था, लेकिन वो मेरे चेहरे की तरफ देखकर हंसने लगी थी।

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अब दीदी ने मुझसे कहा कि तुम तो मुझे बहुत देर से अपनी इन गंदी नज़रो से देख रहे हो। अब में डरते हुए उनको कहने लगा कि नहीं दीदी ऐसा कुछ भी नहीं है जैसा आप समझ रही हो आप प्लीज मुझे माफ कर दे अगर आपको लगता है कि मैंने कोई भी गलती की है तो मेरी उस गलती को प्लीज नजरंदाज कर दो। फिर वो मुझसे कहने लगी कि अब तुम उसको बाहर निकालो जिसको तुम अपनी पेंट के अंदर छुपाए बैठे हो, में एक बार उसको देखना चाहती हूँ, उसी समय मैंने डरते हुए उनको ना बोल दिया। आप इस कहानी को एक हिंदी सेक्स स्टोरीस डॉट  कॉम पर पढ़ रहे हैं। अब वो मेरे ना कहने की वजह से गुस्सा हो गयी और वो मुझसे कहने लगी कि में तुम्हारी मम्मी को यह सब बोल दूँगी कि तुमने मुझे कैसे देखा और हो सकता है कि उनको कुछ ज्यादा झूठ भी बोलकर तुम्हे फंसा सकती हूँ। फिर में उनके मुहं से यह बात सुनकर बहुत डर गया और जल्दी से मैंने अपना खड़ा लंड पेंट बाहर निकाल लिया और में उनके सामने अपना मुहं नीचे करके खड़ा हो गया और अब तक मुन्नी सो चुकी थी। अब दीदी उसी हालत में मुन्नी को बिस्तर पर लेटाकर उनका एक बूब्स बाहर ही लटके मेरे पास आकर मेरा लंड अपने एक हाथ में लेकर उसको सहलाने लगी थी और वो मुझसे कहने लगी कि वैभव वाह तेरा तो बहुत ही बड़ा लंड है। दूर से इसका आकार बहुत छोटा नजर आ रहा था। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब भी में चुप ही रहा और वो मुझसे बोली कि भोड़सी के इतने दिनों तक तूने इसको कहाँ छुपा रखा था? वो उनकी बातों से बहुत खुश लग रही थी। अब मेरा भी थोड़ा सा डर कम हो गया और में भी शांत हो गया। वो मुझे पलंग पर बैठाकर मेरे लंड से खेलने लगी थी और मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर मेरे देखते ही देखते दीदी ने मेरा लंड अपने मुहं में ले लिया और वो उसको चूसने लगी थी और लगातार मेरे लंड को कभी अंदर और कभी पूरा बाहर निकालकर टोपे पर अपनी जीभ को घुमाकर चाटने लगी थी वो यह सब किसी अनुभवी रंडी की तरह कर रही थी। दोस्तों में उनके ऐसा करने की वजह से बहुत गरम हो रहा था और जब वो मेरा लंड अपने मुहं के अंदर बाहर करने लगी। में मज़े मस्ती की दूसरी दुनियां में जा चुका था। फिर में भी उनका सर पकड़कर मज़े लेने लगा था और बस तीन चार मिनट में ही में उनके मुहं में झड़ गया, क्योंकि वो मेरा पहला अनुभव था और फिर झड़ने के बाद में पलंग पर वैसे ही लेट गया। अब दीदी चाटकर चूसकर मेरा सारा वीर्य पी गयी और मेरे लंड को दीदी ने लोलीपोप की तरह चूसकर एकदम साफ कर दिया, वो पूरी मेहनत से उस काम को कर रही थी।
फिर थोड़ी देर के बाद हम दोनों एक दूसरे को पागलों की तरह प्यार कर रहे थे और फिर दीदी ने मुझे बताया कि पिछले पांच महीने से उन्होंने चुदाई के यह सब मज़े नहीं लिए है, इसलिए आज दीदी के सर पर अपनी चुदाई का भूत सवार हो गया था और अब उनको अपनी प्यासी चूत में मेरा लंड चाहिए था।

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अब दीदी ने बिल्कुल साफ शब्दों में मुझसे अपनी चुदाई करने के लिए कहा और में अपनी कामुक दीदी के मुहं से यह चुदाई के शब्द सुनकर बहुत खुश हो गया। अब में तुरंत उनके ऊपर चढ़कर उनके रसभरे गुलाबी होंठो को चूमने लगा था और वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी। उनको मेरे साथ यह सब करने में बहुत मज़ा आ रहा था। फिर मैंने कुछ देर मज़े लेने के बाद उनको बैठाकर उनका गाउन उतार दिया और आज पहली बार मैंने किसी लड़की की नंगी चूत को देखा था, जिसकी वजह से में बहुत चकित था और मेरा पूरा ध्यान उस समय बस दीदी की चूत पर ही था। दोस्तों मैंने देखा कि मेरी दीदी की चूत पर एक भी बाल नहीं था, मानो बस अभी ही वो अपनी चूत को मेरे लिए साफ करके आई थी।

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फिर दीदी ने मेरा हाथ अपनी तरफ खींचा तब जाकर में होश में आकर उनके पास गया और अब में दीदी को चूमने प्यार करने लगा था। अब में उनके बूब्स को मसलने और एक बूब्स को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा था और उस समय दीदी के बूब्स से दूध भी आ रहा था, इसलिए में उस दूध को बड़े मज़े से चूस चूसकर पी रहा था और दीदी बहुत गरम हो रही थी। अब मेरा लंड एक बार फिर से खड़ा हो चुका था, कुछ देर बाद हम दोनों 69 आसन में हो गये और में अपना मुँह उनकी चूत पर ले गया और उनकी चूत की भीनी भीनी खुशबू से में मदहोश हो रहा था। अब अपनी जीभ को उनकी चूत के होंठो पर रगड़कर में चूत के दाने को चाटने लगा था, जिसकी वजह से दीदी की चूत गीली होने साथ ही चिपचिपी भी हो चुकी थी। अब वो जोश में आकर मेरा लंड अपने मुहं में लेकर चूस रही थी और मेरा लंड तनकर पूरा खड़ा हो चुका था। अब में आगे बढ़कर उनकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा था और वो मेरे सर के बाल पकड़कर मेरी जीभ को और भी अंदर डालने लगी थी। फिर मैंने कुछ देर बाद खड़ा होकर अपनी एक उंगली को उनकी चूत में डाल दिया। उस दर्द मस्त की वजह से वो आहह उह्ह्ह्ह करने लगी थी।

अब में अपनी उंगली को अपनी दीदी की गरम चूत में लगातार अंदर बाहर करने लगा था, जिसकी वजह से वो बहुत जोश में आ रही थी और अब वो मुझे गंदी गंदी गालियाँ देने लगी थी ऊफ्फ्फ्फ़ बहनचोद साले कुत्ते तू अब मुझे ज्यादा मत तड़पा, प्लीज मेरे अच्छे भाई अब तू डाल भी दे अपना लंड मेरी इस प्यासी चूत में आह्ह्ह्ह अब तू मुझे मत तड़पा। फिर में अपनी दूसरी उंगली को भी चूत के अंदर डालकर ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा था, ऐसा करने में मुझे बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था। अब वो और भी ज़ोर से चिल्लाने लगी थी, जिसकी वजह से मुझे बहुत जोश आ रहा था और फिर मैंने उनकी चूत से अपनी उंगली को बाहर निकला और अपने मुहं में लेकर उसको चूसकर साफ किया। अब मैंने दीदी के होंठो पर एक चुम्मा किया और उसी समय दीदी ने मुझसे कहा कि वैभव प्लीज अब तू मेरी चूत को ठंडी कर दे, नहीं तो में मर ही जाउंगी। फिर मैंने जाकर तेल लिया और अपने लंड पर और उनकी चूत पर थोड़ा सा तेल लगाकर एकदम चिकना कर दिया। अब में उनके ऊपर चढ़ गया और में उनकी चूत के मुहं के पास अपने लंड को रखकर धीरे धीरे रगड़ने लगा था, जिसकी वजह से उनकी चूत बहुत गरम हो चुकी थी।

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अब में अपने लंड का टोपा दीदी की गरम चूत में डालने के लिए तैयार करने लगा था और दीदी ने मेरे लंड को अपने एक हाथ से पकड़कर चूत के छेद के पास रख दिया और मैंने उनका वो इशारा समझकर तुरंत ही धीरे से धक्का लगा दिया। अब वो इतने महीनों के बाद अपनी कसी चूत में मेरे मोटे सख्त लंड को महसूस करके दर्द की वजह से आह्ह्ह ऊह्ह्ह्हह करके मुझे गाली देने लगी। वो कहने लगी साले कुत्ते कमीने धीरे से कर बहनचोद मुझे दर्द होता है, इतने दिनों बाद मेरी चूत को किसी का लंड नसीब हुआ है, लेकिन मैंने और भी ज़ोर से अपना अगला झटका लगा दिया। अब मेरे उस तेज धक्के की वजह से मेरा आधा लंड मेरी दीदी की गीली चूत के अंदर चला गया, जिसकी वजह से वो सकपका गई और काँपने भी लगी थी, लेकिन में अब धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा था और वो आहे भर रही थी, क्योंकि बड़ा तेज दर्द हुआ था। फिर कुछ देर बाद मैंने एक और ज़ोर का धक्का लगा दिया, जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड उनकी चूत के अंदर चला गया और में ऐसे ही अपने लंड को रखकर उनके ऊपर लेटकर उनके होंठो को चूसकर मैंने उनकी चीखने की आवाज को बंद किया, लेकिन उस दर्द की वजह से उनकी आँखों से आंसू निकलने लगे थे।

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फिर में धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करने लगा था और वो आहह्ह्ह ऊह्ह्ह की आवाज़ कर रही थी और कुछ देर बाद जब उनका दर्द कम हुआ, तब वो भी मज़ा लेकर मेरे हर एक धक्के के साथ उछल उछलकर अपनी चुदाई के मज़े लेने लगी थी। अब मैंने भी उनका वो जोश देखकर अपने धक्को की रफ्तार को बढ़ा दिया और वो ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ लेते हुए चिल्लाने लगी आहहहह ऊह्ह्ह्ह हाँ और ज़ोर से धक्के मारो ऊह्ह्ह वाह मुझे अब बहुत मज़ा आ रहा है कहने लगी थी और थोड़ी ही देर के बाद वो झड़ गयी। अब मैंने भी अपनी रफ्तार को पहले से भी ज्यादा बढ़ा दिया और बस थोड़ी ही देर धक्के देने के बाद में भी उनकी चूत के अंदर ही झड़ गया और अब हम दोनों वैसे ही एक दूसरे से लिपटकर पड़े रहे और फिर एक दूसरे को चूमने चाटने लगे थे। फिर कुछ देर बाद दीदी ने मुझे अपने ऊपर से हटा दिया और वो उठकर खड़ी होकर वापस पलंग पर बैठ गयी और अब वो नीचे झुककर मेरे लंड को अपने मुहं में लेकर उसको चूसते हुए चाटकर साफ करने लगी थी। दोस्तों में पूरी तरह से थक चुका था और मेरा लंड अपनी जीभ से अच्छी तरह साफ करने के बाद दीदी ने अपनी चूत को मेरे मुहं के पास लाकर रख दिया और वो मुझसे उनकी चूत को चाटकर साफ करने के लिए कहने लगी।

फिर मैंने भी बिना देर किए दीदी की चूत का रस अपनी जीभ से चाटकर चूसकर साफ कर दिया और एकदम चमका दिया और अब हम दोनों थककर वहीं पर वैसे ही नंगे लेट गये। दोस्तों यह थी मेरी अपनी दीदी के साथ उनकी पहली बार चुदाई की सच्ची कहानी मुझे उम्मीद है कि सभी को यह जरुर पसंद आई होगी ।।
धन्यवाद …
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Monday, 12 February 2018

दिल्ली में रंडी बहन की चुदाई | Delhi mai Randi Behan kki Chudai - Hindi Sex Stories


दिल्ली में रंडी बहन की चुदाई | Delhi mai Randi Behan kki Chudai - Hindi Sex Stories

प्रेषक : दिनेश …


हैल्लो दोस्तों मेरा नाम दिनेश है, मेरा साफ रंग गठीला बदन जवान शरीर किसी भी लड़की को अंपनी तरफ आकर्षित करने के लिए बहुत अच्छा है, इसलिए मुझे बहुत सारी लड़कियाँ अपना बॉयफ्रेंड बनाने की इच्छा जरुर अपने मन में रखती थी। दोस्तों मुझे बचपन से ही सेक्स करना बहुत अच्छा लगता था और मैंने अपनी बहन की चुदाई करने के बाद बहुत बार कई लड़कियों के साथ चुदाई के मस्त मज़े लिए जिसके बाद मेरा मन ख़ुशी से झूम उठता है। अब में पिछले कुछ सालों से एक हिंदी सेक्स स्टोरीस डॉट कॉम  पर सेक्सी कहानियों को पढ़कर उनके मज़े लेने लगा हूँ, जिसकी वजह से मेरा मन खुश रहता है, क्योंकि यह सभी कहानी मुझे बड़ा उत्साहित किया करती है इनको पढ़कर मेरे मन जोश से भर जाता है। दोस्तों आज में आप सभी की सेवा में अपनी एक सच्ची घटना को लेकर आया हूँ जिसमें मैंने मेरे साथ रहने वाली मेरी चचेरी बहन के कहने पर ही उसके साथ मस्त मज़े लिए और सच कहता हूँ कि में उसके साथ यह सब करने के विचार बहुत दिनों से अपने मन में लिए था। दोस्तों मुझे मेरी बहन का गोरा बदन उसके उठे हुए बड़े आकार के बूब्स और वो गदराया हुआ कामुक जिस्म पागल किए था, लेकिन वो मेरी बहन थी इसलिए बस में उसके बारे में सोचकर ही रह जाता था मेरी उसके साथ कुछ भी करने की हिम्मत नहीं होती थी।

दोस्तों वैसे हम दोनों के साथ में रहने की वजह से उसके में बहुत खुलकर रहने लगा था और बहुत बार में काम करते समय उसके बूब्स को देख चुका था। फिर एक दिन भगवान ने शायद मेरे मन की बात को उनकर, उस घटना की वजह से हम दोनों बहुत पास आ गए और चुदाई के हमने मज़े लिए और अब ज्यादा बोर ना करते हुए में सीधे कहानी को सुनाना शुरू करता हूँ। दोस्तों यह घटना जो मेरे साथ आगरा में हुई मेरा नाम राज है, में 26 साल का हूँ और मेरी चचेरी बहन का नाम मीता है, वो 22 साल की है जवान सुंदर और उसके बूब्स के बारे में तो आप पूछो मत, क्योंकि वो बहुत ही सुंदर है एकदम गोरी उसके बाल बड़े लंबे काले है, उसकी लम्बाई करीब 5.5 है और उसके बूब्स का आकार 36-24-38 है और उसके बूब्स बड़े मस्त एकदम गोलमटोल है। दोस्तों यह घटना मेरे साथ तब घटी जब हम दोनों अपने घर से बाहर आगरा में एक ही कमरा में रहते थे, क्योंकि हमारे घर के आसपास कोई भी ऐसा कॉलेज नहीं था इसलिए हम दोनों को हमारी पढ़ाई की वजह से वहां पर रहना पड़ा। दोस्तों मैंने हम दोनों के कॉलेज से कुछ दूरी पर ही एक कमरा किराए से लिया हुआ था और उसमे हम दोनों ही रहते थे और मैंने अपने उस कमरे में पढ़ने के लिए कुछ गंदी सेक्सी कहानियों की किताबें भी रखी हुई थी।

शादी में बुलवाया चुदवाने के लिए |


फिर जब कभी भी मुझे मौका मिलता में अकेले में या फिर पढ़ाई करने के बहाने से उन सेक्स कहानियों के मज़े लेता था और उन कहानियों को पढ़कर मुझे बहुत अच्छा लगता था, लेकिन मेरे अंदर की आग उस काम को करके बढ़ती ही जा रही थी। एक दिन मेरी बहन मीता के हाथों में कमरे की सफाई करते समय वो किताब गलती से लग गयी, उस समय में वहां पर नहीं था। फिर उसने उन कहानियों को बहुत ध्यान से पढ़ा और इसलिए वो बहुत गरम हो चुकी थी, उसको मेरी आदतो और मेरी गंदी सोच के बारे में पता चला जिसकी वजह से उसका डर मुझसे यह बात खुलकर कहने की हिम्मत आ गई। दोस्तों अब में अपने लंड और मेरी बहन अपनी चूत की उत्तेजना की वजह से अपने आपे में नहीं रह सके। फिर वो जब में शाम को अपने कमरे पर पहुंचा तो मुझे उसके मेरे प्रति व्यहवार में बहुत बदलाव नजर आया वो मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी और उसके खिले चेहरे से मुझे उसकी खुशी का अंदाजा पूरी तरह से खुलकर मुझसे कहने लगी कि में तुम्हारी पत्नी बन जाती हूँ और तुम मुझे अपनी पत्नी समझकर मेरे साथ जमकर सेक्स करो। दोस्तों वो उस समय जींस शर्ट में थी और अब वो मुझसे कहने लगी कि चलो अब तुम शुरू हो जाओ और आज मुझे बहुत प्यार करो मेरे बदन की आग को बुझा दो।
दोस्तों इतना कहकर उसने मुझे चूमना प्यार करना शुरू कर दिया, मेरे होंठो को वो बुरी तरह से चूमने लगी थी, जिसकी वजह से कुछ देर बाद में भी जोश में आ गया। अब में भी उसको चूमने लगा था और मैंने उसको अपनी बाहों में दबाकर प्यार करना शुरू किया और वो भी मेरा साथ देने लगी थी।आप इस कहानी को एक हिंदी सेक्स स्टोरीस डॉट कॉम  पर पढ़ रहे हैं।

 फिर उसको मैंने खींचकर पलंग पर लेटा दिया और में उसके ऊपर आ गया और अब मैंने उसको चूमना शुरू कर दिया। फिर करीब दस मिनट तक में उसको चूमता ही रहा। फिर मैंने उसकी शर्ट को खोल दिया और उसके बाद मैंने उसकी ब्रा को भी खोल दिया और जैसे ही मैंने उसकी ब्रा को खोला, उसी समय उसके गोरे बड़े आकार के बूब्स उछलकर तुरंत बाहर आ गये। अब में चकित होकर बूब्स को देखकर एकदम पागलों की तरह उन दोनों बूब्स को दबाने लगा और मन ही मन में सोचने लगा कि कितने दिनों के बाद मुझे अपनी बहन के पूरे बूब्स वो भी बिना कपड़ो के नजर आए और मुझे बूब्स को पहली बार छूने के अलावा दबाने का भी मौका मिला था। फिर मैंने भूखे की तरह लपकते हुए उसकी निप्पल को अपने मुहं में भर लिया और अब में बूब्स को चूसने लगा और बूब्स को चूसते हुए ही उसकी जींस को उतारकर मैंने उसको अपने सामने पेंटी में कर दिया।

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अब मैंने अपने एक हाथ से छूकर देखा कि उसकी चूत अब तक बहुत गरम हो चुकी थी और जोश की वजह से उसकी पेंटी चूत के पास वाले हिस्से से गीली भी हो चुकी थी। फिर मैंने कुछ देर चूत को सहलाने के बाद उसकी पेंटी को उतारकर उसके दोनों पैरों को फैलाकर में अब चूत को चाटने लगा था और वो सिसकियाँ ले रही थी आह्ह्ह्ह आस्स्स्स्शहस। अब वो अपनी चूत को मेरी जीभ से चूसने चाटने के मज़े लेने के साथ ही जोश में आकर मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर उसको सहलाने के साथ ही खींच भी रही थी और वो लंड को कसकर दबा भी रही थी। फिर मैंने कुछ देर बाद मीता ने जोश में आकर अपनी कमर को ऊपर उठा लिया और वो मेरे तने हुए लंड को अपनी जांघो के बीच लेकर रगड़ने लगी थी और वो मेरी तरफ करवट लेकर लेट गयी, मेरे लंड को ठीक तरह से पकड़कर मज़े ले रही थी। अब उसके दोनों बूब्स मेरे मुँह के बिल्कुल पास थे और में उन्हे कसकर दबा रहा था, तभी अचानक से उसने अपने एक बूब्स को मेरे मुँह में डालते हुए मुझसे कहा कि तुम इनको अपने मुँह में लेकर चूसो और इनका पूरा रस पी जाओ। दोस्तों आप इस कहानी को एक हिंदी सेक्स स्टोरीस डॉट कॉम  पर पढ़ रहे हैं।

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फिर मैंने उसी समय उसके एक बूब्स मुँह में भर लिया और में ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा था, थोड़ी देर के लिए मैंने उसके बूब्स को अपने मुँह से निकालकर उसको कहा कि में हमेशा तुम्हारे कसे बूब्स को देखकर सोचता था और हैरान होता था और इनको छूने की मेरी बहुत इच्छा होती थी और दिल करता था कि इन्हे में अपने मुँह में लेकर इनको चूसने के मज़े लूँ और इनका रस पी जाऊं, लेकिन में डरता था कि पता नहीं तुम क्या सोचो और कहीं तुम मुझसे नाराज़ ना हो जाओ। फिर वो कहने लगी कि हाँ आज मुझे तुम्हारे मन की सभी बातें समझ आ रही है और अब तुम क्यों इतनी देर लगा रहे हो तुम्हे किसने मना किया। अब मैंने उसको कहा कि तुम नहीं जानती मीता कि तुमने मुझे और मेरे लंड को कितना परेशान किया है? फिर मीता ने कहा कि अच्छा तो आज तुम अपनी तमन्ना को पूरी कर लो जी भरकर दबाओ चूसो और मज़े लो में तो आज से पूरी की पूरी तुम्हारी हूँ जैसा चाहे तुम मेरे साथ वैसा ही करो। फिर क्या था? मीता की हरी झंडी को पकड़ में मीता के बूब्स पर टूट पड़ा।

अब मेरी जीभ उसके खड़े निप्पल को महसूस कर रहे थे। मैंने अपनी जीभ को मीता के उठे हुए खड़े निप्पल पर घुमाना शुरू किया और में उसके दोनों अनारों को कसकर पकड़े हुए था और में बारी बारी से उन्हे चूस रहा था। दोस्तों में जोश में आकर ऐसे कसकर बूब्स को दबा रहा था जैसे कि उन दोनों बूब्स का पूरा का पूरा रस आज ही निचोड़ लूँगा और मीता भी जोश में आकर मेरा पूरा साथ दे रही थी। अब उसके मुहं से ओह्ह्ह्हह आह्ह्ह्हह्ह स्सीईईईइ की आवाज़ निकल रही थी, मुझसे पूरी तरफ से सटे हुए वो मेरे लंड को बुरी तरह से मसल रही थी और मरोड़ रही थी और उसने अपने एक पैर को मेरी जांघ के ऊपर रख दिया और उसने मेरे लंड को अपनी दोनों जांघो के बीच रख लिया। अब मुझे उसकी गरम जाँघो के बीच एक मुलायम रेशमी एहसास हुआ और यह उसकी चूत थी, क्योंकि मीता ने पेंटी नहीं पहन रखी थी और मेरा लंड का टोपा उसकी झांटो में घूम रहा था। अब मेरा सब्र का बाँध टूट रहा था, में मीता से बोला कि मीता मुझे अब कुछ कुछ हो रहा और में आपे में नहीं हूँ प्लीज़ मुझे बताओ ना में अब क्या करूं? मीता कहने लगी कि करो ना मुझे चोदो ना फाड़ डालो मेरी चूत को अब तुम मेरी चुदाई करना शुरू करो।

मेरी गर्लफ्रेंड की भयानक चुदाई

अब में चुपचाप उसके चेहरे को देखते हुए बूब्स को मसलता रहा था और उसने अपना मुँह मेरे मुँह से बिल्कुल सटा दिया और फुस फुसाकर कहने लगी कि अब तुम अपनी मीता को चोदना शुरू करो और अब तुम्हे किसका इंतजार है? यह बात मुझसे कहते हुए मीता अपने एक हाथ से मेरे लंड को अपनी चूत के मुहं पर रखकर ठीक निशाने पर लगाकर अंदर जाने का रास्ता दिखा रही थी और फिर रास्ता मिलते ही मेरे लंड का टोपा एक ही धक्के में चूत के अंदर चला गया और इससे पहले की मीता संभले या अपना आसान बदले, मैंने दूसरा धक्का भी लगा दिया और अब मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी मखमल जैसी मुलायम चूत की जन्नत के अंदर चला गया। अब मीता उस दर्द की वजह से चिल्लाने लगी ओह्ह्ह्ह ऊउईईईई हाँ तुम ऐसे ही कुछ देर हिलना नहीं मुझे बड़ी तेज जलन हो रही है तुम्हारे लंड ने मुझे मार ही डाला ऊफ्फ्फ्फ़ मेरे राजा। दोस्तों मीता को बहुत दर्द हो रहा था, क्योंकि आज पहली बार जो वो इतना मोटा और लंबा लंड अपनी चूत में ले रही थी और में उसका दर्द देखकर अपना लंड उसकी चूत में डालकर कुछ देर चुपचाप लेटा ही रहा। फिर कुछ देर दर्द कम होने के बाद मीता की चूत फड़क रही थी और वो अंदर ही अंदर मेरे लंड को जकड़ रही थी और तेज सांसे लेने की वजह से उसके उठे हुए बूब्स बहुत तेज़ी से ऊपर नीचे हो रहे थे।आप इस कहानी को एक हिंदी सेक्स स्टोरीस डॉट कॉम  पर पढ़ रहे हैं।

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अब मैंने अपने एक हाथ को आगे बढ़ाकर उसके दोनों बूब्स को पकड़ लिया और फिर निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा था, जिसकी वजह से कुछ देर मीता को कुछ राहत मिली और उसने अपनी कमर को हिलाना शुरू कर दिया। अब मीता मुझसे कहने लगी ऊफ्फ्फ्फ़ आह्ह्ह्ह अब तुम मुझे चोदना शुरू करो और मैंने धक्के देने शुरू किए, उसकी चूत को चीरता हुआ मेरा पूरा का पूरा लंड अंदर चला गया। फिर मीता मुझसे कहने लगी अब तुम लंड को बाहर निकालो, लेकिन में अपने लंड को धीरे धीरे अपनी बहन की चूत के अंदर बाहर करने का काम वैसे ही कर रहा था। फिर मीता ने मुझे अपने धक्को की रफ्तार को तेज करने को कहा और मैंने अपनी रफ्तार को पहले से ज्यादा बढ़ा दिया और में बड़ी तेज़ी से अपने लंड को चूत के अंदर बाहर करने लगा था, जिसकी वजह से अब मीता को पूरी मस्ती आ रही थी और वो नीचे से अपनी कमर को उठा उठाकर मेरे हर एक धक्के का जवाब देने लगी थी। अब उसके रसीले बूब्स मेरी छाती पर रगड़ने लगे थे, उसने अपने गुलाबी होंठो को मेरे होंठ पर रख दिया और वो मेरे मुँह में अपनी जीभ को डालकर मज़े लेने लगी थी और अपनी चूत में मेरा लंड समाए हुए तेज़ी से ऊपर नीचे हो रहा था।

अब मुझे वो सब करके महसूस हो रहा था कि में जन्नत में पहुँच गया हूँ और जैसे ही वो झड़ने के करीब आ रही थी, इसलिए उसकी रफ्तार बढ़ती ही जा रही थी। अब पूरे कमरे में फच फच की आवाज़ गूँज रही थी में और में मीता के ऊपर लेटकर धनाधन धक्के देने लगा था और मीता ने अपने एक पैर को मेरी कमर पर रखकर मुझे जकड़ लिया और वो ज़ोर ज़ोर से अपने कूल्हों को उठा उठाकर चुदाई में साथ देने लगी थी। फिर में भी अब मीता के बूब्स को ज़ोर से मसलते हुए मस्त धक्के लगा रहा था और पूरा कमरा हमारी चुदाई की आवाज़ से भरा हुआ था। फिर मीता अपनी कमर को हिलाकर कूल्हों को उठा उठाकर चुदाई करवा रही थी और वो बोले जा रही थी हाँ ऊफ्फ मेरे राजा में मर गई ऊह्ह्ह्ह चोदो मेरे राजा शुरू करो चोदो मुझे हाँ ले लो मज़ा आज तुम मेरी जवानी का मज़ा और वो अपनी गांड को हिलाने लगी। अब मैंने लगातार 45 मिनट तक उसको धक्के देकर चोदा। में भी बोल रहा था ऊउफ़्फ़्फ़ हाँ ले मेरी रानी आह्ह्ह्ह मेरे लंड को अपनी चूत के अंदर आहह्ह्ह्ह ऊऊहह्ह्ह क्या जन्नत का मज़ा आह्ह्ह्ह। अब वो अपनी गांड को उठा उठाकर मेरा लंड अपनी चूत में ले रही थी और में भी पूरे जोश के साथ उसके बूब्स को मसल मसलकर अपनी रांड को चोदे जा रहा था।


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अब मीता जोश मज़े की वजह से मुझे ललकारकर कहने लगी थी, ऊफ्फ्फ हाँ लगाओ धक्के मेरे राजा हाँ ऐसे ही तुम मुझे चोदो वाह मुझे बड़ा मज़ा आ रहा है। फिर में जवाब देकर उसको कहने लगा हाँ यह ले मेरी रानी ले हाँ तू पूरा ले अपनी चूत में बुझा ले अपनी प्यास को और मेरे भी जोश को आज ठंडा कर दे। अब वो कहने लगी थी, हाँ ज़रा और ज़ोर से सरकाओ तुम अपना लंड मेरी चूत में मेरे राजा, हाँ मुझे यह अपने अंदर महसूस करके बड़ा अच्छा महसूस हो रहा है। फिर मैंने जोश में आकर तेज धक्के देते हुए उसको कहा कि हाँ यह ले मेरी रानी यह ले तू मेरा लंड यह तो बस तेरे लिए ही है। अब वो जोश में आकर कहने लगी, देखो मेरे राजा मेरी यह चूत तो अब तेरे लंड की दीवानी हो चुकी है हाँ और ज़ोर से और ज़ोर से आईईईई मेरे राजा में गई ऊऊईई काम से कहते हुए मेरी बहन ने मुझे कसकर अपनी बाहों में जकड़ लिया और उसकी चूत ने ज्वालामुखी का लावा छोड़ दिया। अब तक मेरा भी लंड वीर्य को छोड़ने ही वाला था, क्योंकि में करीब बीस मिनट से लगातार उसको मज़े देते हुए धक्के दे रहा था और में उसको कहने लगा हाँ अब में भी आया मेरी जान, मेरा भी अब निकलने वाला है। फिर उसको यह कहते हुए मैंने भी अपने लंड का वीर्य उसकी चूत की गहराईयों में तेज धक्के के साथ निकाल दिया और अब में हाँफते हुए उसकी छाती पर अपने सर को रखकर उसके बदन से कसकर चिपककर लेट गया।

दोस्तों यह थी मेरी अपनी बहन के साथ पहली सच्ची चुदाई की जबरदस्त मज़ेदार कहानी मुझे उम्मीद है कि सभी पढ़ने वालो को यह जरुर पसंद आएगी और इसके अलावा भी मेरे पास आप लोगों की सेवा में रखने के लिए कोई घटना हुई तो में उसको जरुर लिखकर तैयार करूंगा और अब मुझे जाने की आज्ञा दे।
धन्यवाद …


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Thursday, 11 January 2018

भैया के बॉस को अपने चूत देकर खुश किया नौकरी के लिए


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ये चुदाई की कहानियाँ तब की है जब में ग्रॅजुयेशन पास करके नौकरी ढूँढ रही थी.. मेरा फिगर 33-32-34 है और में दिखने में बहुत सुंदर और सेक्सी लगती हूँ और मेरे बूब्स बहुत सेक्सी और बड़े बड़े है। वैसे मेरे दोस्त कहते है कि में एक आईटम हूँ। अब में आपको स्टोरी सुनाती हूँ जो मेरे साथ घटी एक घटना है। दोस्तों मैंने अपनी पूरी पढ़ाई एक अच्छे कॉलेज से पास की और घर में पैसों की प्रॉब्लम्स की वजह से में आगे की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाई और मैंने एक अच्छी नौकरी ढूँढनी शुरू कर दी। फिर उन दिनों मेरा कज़िन अजीत हमारे घर आया। वो मुझसे उम्र में 2 साल बड़े है और उन्होंने अपना MBA पूरा किया है और उन्हें नयी नयी एक अच्छी सी नौकरी मिली थी और वो दिल्ली जा रहे थे। तभी मेरे घरवालों ने कहा कि वो मुझे भी अपने साथ ले जाए ताकि में एक बड़े शहर में अपने लिए एक अच्छी नौकरी ढूँढ सकूँ।
फिर में भी उनके साथ दिल्ली आ गयी और मैंने नौकरी ढूंढनी शुरू कर दी.. लेकिन बहुत कोशिश करने के बाद भी मुझे नौकरी नहीं मिली.. क्योंकि मेरी पड़ाई ज़्यादा अच्छी नहीं थी। फिर एक दिन में अपने भैया के घर पर बैठ कर सोच रही थी कि अब मुझे अपने घर चले जाना चाहिए उसी वक़्त डोर बेल बजी और मैंने दरवाज़ा खोला तो देखा कि भैया आए थे और साथ में उनका बॉस भी था.. उनकी उम्र कोई 35-40 साल के बीच की होगी और दिखने में ठीक था। भैया ने अंदर आते ही बोला कि ये मेरी छोटी बहन है और ये एक नौकरी ढूँढ रही है.. उनका बॉस मुझे घूर घूर कर देख रहा था। उसकी नज़र मेरे बूब्स पर ही अटकी थी। तभी मैंने देखा कि वो बार बार मुझे देखकर अपनी पेंट पर हाथ लगा रहा था और भैया अंदर अपने कंप्यूटर से कुछ प्रिंट आउट्स ले रहे थे। उन्होंने अंदर से ही आवाज़ दी और कहा कि हमारे लिए दो कप चाय बना दो। तभी में चाय बनाने किचन में चली गयी तभी उनका बॉस मेरे पीछे किचन में आ गया और उसने मेरी गांड को हल्के से छू दिया मैंने पीछे मुड़कर उसे घूर दिया वो घबरा कर बोले कि मुझे एक ग्लास पानी चाहिए.. मैंने उसे पानी दे दिया। फिर वो बाहर चला गया में अंदर किचन में ये सोच रही थी कि शायद ये मुझे कोई नौकरी दे दे और अगर ऐसा है तो उनको खुश करने में मेरा क्या जाता है? फिर मैंने चाय बनाकर बाहर जाने से पहले अपने टॉप के दो बटन खोल दिया ताकि जब में चाय देने के लिए नीचे झुकूं तो उसे मेरे बूब्स आसानी से साफ साफ नज़र आए और मैंने वैसा ही किया। जब मैंने चाय दी तो उसे मेरे बूब्स दिखे और में हल्का सा मुस्कुरा दी.. ये चुदाई कहानियाँ,रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। जिससे उसे ग्रीन सिग्नल मिल गया उसने बैठकर चाय पी। फिर मेरे भैया भी अपना काम खत्म करके आ गये। फिर वो दोनों बाहर निकल गये लेकिन जाते जाते मैंने फिर से उन्हे एक हल्की सी स्माईल दे दी। फिर दूसरे दिन सुबह सुबह भैया के ऑफीस जाने के एक घंटे के बाद भैया का फोन आया कि उन्हें कुछ काम से बाहर जाना होगा और आज मुझे इंटरव्यू के लिए अकेले ही जाना होगा और वो ऑफीस से गाड़ी भेज देंगे। तभी मैंने कहा कि आप कब तक वापस आओगे? तो उन्होंने कहा कि अगर काम जल्दी ही खत्म हो गया तो आज ही आ जाऊंगा। फिर मैंने इंटरव्यू के लिए एक सुंदर सी साड़ी निकाली और नहाकर पहन ली। इतने में डोर बेल बजी तभी मुझे लगा कि ड्राइवर होगा इसलिए मैंने दरवाज़ा खोला और मैंने देखा कि सामने भैया के बॉस खड़े है और उनके हाथ में एक पॅकेट था.. जिसमे शायद खाने की कोई चीज़ होगी। तभी मैंने उनसे पूछा कि आप यहाँ कैसे? भैया तो आज बाहर गये हुए है।

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बॉस : में इसलिए ही तो आया हूँ। में : क्या मतलब में समझी नहीं? बॉस : तुम अकेले इंटरव्यू देने जाओगी इसलिए मैंने सोचा कि में तुम्हे छोड़ दूँ और फिर मुझे कल से ही बहुत भूख लगी है इसलिए खाने को कुछ चीज़े ले ली आओ हम साथ में खाते है फिर इंटरव्यू देने चलेंगे। वैसे तुम्हे कैसा नौकरी चाहिए? में : कोई भी अभी मुझे नौकरी की बहुत ज़रूरत है। बॉस : अगर तुम चाहो तो में तुम्हे नौकरी दे सकता हूँ लेकिन पहले तुम्हे मुझे इंटरव्यू देना होगा। में : कौन सी नौकरी है? बॉस : में बहुत दिनों से एक पर्सनल सेक्रेटरी ढूँढ रहा हूँ और तुम तो बहुत होशियार, समझदार और सुंदर भी हो काश कि मेरी बीवी तुम्हारी तरह सुंदर होती। में : (मुस्कुराते हुए) क्या मुझे नौकरी मिल सकती है? बॉस : लेकिन तुम्हे पहले इंटरव्यू पास करना होगा.. क्या तुम तैयार हो? में : हाँ में तैयार हूँ लेकिन सेलेरी क्या होगी? बॉस : अगर तुम पास हो गयी तो बहुत अच्छी सेलेरी मिलेगी। में : हाँ में तैयार हूँ। बॉस : तो तुम यहाँ पर आकर सोफे पर बैठो। फिर वो मेरे पास में आकर बैठ गये और मेरे कंधे पर हाथ रखकर बोले कि तुम अपने बारे में कुछ बताओ। फिर में अपने बारे में बताने लगी तो वो बोले कि ये सब नहीं में जो पूछ रहा हूँ वो बताओ। ये चुदाई कहानियाँ,रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। मैंने उनसे पूछा क्या? बॉस : तुम ये बताओ कि तुम्हारा साईज़ क्या है? तभी में हैरान हो गयी.. लेकिन तब तक में समझ गयी थी कि वो मुझसे क्या चाहता है? में भी सोचने लगी कि अगर इन सब के बदले वो मुझे एक अच्छी सी सेलेरी वाली नौकरी दे दे तो मुझे क्या प्रॉब्लम है? और मैंने शरमाते हुए कह दिया कि 32. बॉस : वाउ अगला सवाल क्या तुम इस नौकरी के लिए कुछ भी कर सकती हो? में : हाँ सर में सब कुछ कर सकती हूँ। बॉस : तो फिर तुम जाओ और दरवाजा बंद कर दो। तभी मैंने उठकर दरवाज़ा बंद कर दिया और अंदर आ कर उसके सामने बैठ गयी। वो मेरे पास आ गया और पीछे से उसने मेरी पीठ पर एक किस कर दिया मैंने कहा कि ये क्या कर रहे हो? बॉस : वही कर रहा हूँ जो एक आदमी और एक औरत के बीच होता है और ये मत कहना की तुम ऐसा कुछ करना नहीं चाहती हो.. तुझे भी तो खुजली हो रही है। में : ये ग़लत है हम ऐसा नहीं कर सकते। बॉस : सही और ग़लत का फ़ैसला हम क्यों करे.. अभी तो वो करो जो हमे आज करना चाहिए।

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में : लेकिन सर कोई आ गया तो? और कहीं भैया को पता चल गया तो? बॉस : अरे तेरा भैया मेरा एक नौकर है ज़्यादा बोलेगा तो प्रमोशन देकर चुप करवा दूँगा। साला खुद लेकर आएगा तुझे चुदवाने के लिए। तू तो बस अब मेरी प्यास बुझा दे मेरी जान। साली में तो पहले दिन से ही तड़प रहा हूँ तुझे चोदने के लिए.. चल आज मेरी रांड बन जा। में : लेकिन सर ये सब कुछ बिल्कुल ग़लत है। फिर ये सब कहते कहते उसने मेरे होंठो पर अपने होंट रख दिया और वो पागलो की तरह मुझे चूमने लगा और पागलो की तरह मेरे कपड़े खुलवाने लगा। में और भी उसका साथ देने लगी। फिर मैंने धीरे से पूछा कि सर मेरी सेलेरी कितनी होगी? वो हंस कर बोला अगर आज में खुश हो गया तो 20-25 हजार रूपय तो दे ही दूँगा। लेकिन फिर तुझे हमेशा मेरी रांड बनकर रहना होगा.. बोलो मंजूर है? में : हाँ सर मुझे मंजूर है। बॉस : अब और मत तड़पा.. आ जाओ मेरी प्यास भुझा दो मेरी रानी और उन्होंने मुझे गोद में उठाकर बेड पर लेटा दिया। वो मेरे पूरे शरीर को चूम रहे थे और में उनका साथ पूरा पूरा दे रही थी.. धीरे धीरे उन्होंने मेरे सारे कपड़े निकाल दिए और मुझे पूरा नंगा कर दिया। में बिल्कुल नंगी उनके नीचे लेटी हुई थी और मैंने अपने दोनों हाथो से अपने बूब्स छुपा लिए। फिर उन्होंने मेरे दोनों हाथ हटाकर मेरे बूब्स जोर ज़ोर से चूसने लगे। ये चुदाई कहानियाँ,रियल हिंदी सेक्स स्टोरिज़ डॉट कॉम पर पड़ रहे है। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर उसने मेरी चूत पर अपना हाथ रखा और उसे मसलने लगा और थोड़ी देर बाद उन्होंने अपना अंडरवियर उतार कर मुझे अपना लंड दिखाया जो पहले से ही खड़ा था तभी मेरे तो होश ही उड़ गये। फिर उन्होंने अपना लंड मेरे मुहं में डाल दिया और खुद मेरी चूत चाटने लगा। में आह्ह्ह आह्ह्ह ओह्ह्ह की आवाजे निकाल रही थी। मुझे इतना मज़ा आ रहा था कि में बता नहीं सकती। तभी थोड़ी देर बाद में झड़ गयी और उन्होंने पूरा रस पी लिया। तभी उन्होंने कहा कि मेरी जान अभी तो तेरी चुदाई बाकी है चल तैयार हो जा अपनी चुदाई के लिए साली रांड आज तुझे मज़ा चखाता हूँ। आज तेरी सारी गर्मी निकालता हूँ और हाँ तुझे कभी कभी हमारे ग्राहकों के साथ भी सोना पड़ेगा। उनको भी अपनी चूत का रस पिलाना होगा.. साली तेरे बूब्स तो बड़े मस्त है। तू तो असली माल है कहाँ छुपकर बैठी थी और फिर वो मेरे ऊपर चड़ गये और मेरी चूत पर अपना लंड रख दिया और एक झटके से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया। तभी में ज़ोर से चिल्लाई और उन्होंने मेरा मुहं बंद कर दिया और थोड़ी देर बाद मुझे भी मज़ा आने लगा। में ज़ोर और ज़ोर और ज़ोर चिल्लाने लगी.. बॉस ने कहा कि साली तू तो बहुत बड़ी वाली रांड

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फिर उन्होंने स्पीड बढ़ाकर मेरी चुदाई शुरू की और उधर मेरी चूत चुदाई में व्यस्त थी.. लेकिन मुझे बहुत दर्द भी हो रहा था और वो बस चुदाई पर ध्यान दे रहे थे। उनकी स्पीड कम होने का नाम नहीं ले रही थी और वो आज मेरी चूत को फाड़ देना चाहते थे। फिर करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद हम लोग एक साथ झड़ गये। फिर उन्होंने मुझे कई बार चोदा और मेरी चूत को पूरा फाड़कर भोसड़ा बना दिया और फिर अपने एक फ्रेंड की कंपनी में नौकरी दिलाई और वहाँ पर उस फ्रेंड ने भी मेरा पूरा मज़ा लिया और वो दोनों मिलकर बारी बारी से मेरी चुदाई करते रहे और फिर ऐसे ही मेरी चुदाई के साथ साथ मेरी नौकरी भी चलती रही ।
पड़ोस वाला आदमी ने कुतिया बना के चोदा

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Saturday, 18 November 2017

Ek Behan ki atamktha pehli chudayi ki khani (sisters sex story) - gandi khania | Hindi Sex Story

My name is seema and i m from indore. Wese to hamara parmanent ghar indore se 75 km door hain lekin main aur mere dono bhai indore me ek kamre ka room rent par lekar rehte hain. I m 25 year old ham 2 bhai aur 1 sister haien mera 1 bhai mujh se 2 saal bada hai and 1 bhai mujh se chota hai 2 years.yeh baat jo mein app ko batlane ja rahiey hoon yeh aaj se 5 sall pele ki hai. Os waqat mery age 20 saal thi mera rang gora hain aur smart hoon. Meri boobs ka size us waqt b 30 tha jo ab 34 hai and my bade bhai ki age 22 thi. mein bcom 1st year mien thi. Aur bahi ne pmt ke paper deiy hove thiey. Woh dekhney mein boot bara lagta tha. Kuch aur bataney se pehley mien yeh bata doon k its true story hain. Mery bahi ka name rahul hai hamarey ghar mien total five person rehtey haien merey dad aik mnc mien haien aur mery mammy aik company main job karti hain.
Baat un dino ki hain jab main. Jab main abne bade bhai se chudwa chuki thi. Lekin apne chote bhai ke aa jane ke karan hamari chudai band ho gayi thi. Mere bade hain. Chote bhai se dar rahe the. Ki kahi wo ghar par mummy papa ko batla na de. Is karan wo sex nahi kar pa rahe the. Bade bhai ne mujh se kaha ki wo kisi tarha se chote bhai ko tayyar kar le to wo aasani se sex kar sakte hain. Main chote bhai se chudwane ki plan banane lagi ek din moka mill gaya mera chota bhai jab computer chala raha tha to meine nahane chali gai mujhe pata tha ki mera bha jaroor mujhe dekhega main naha kar kewal towel main hi bahar aa gai aur chote bhai ki pith ki taraf ki kapde badalne lagi chota bhai mujhe glass main se dekh raha tha. Uska lund khada ho gaya we bathroom me gaya aur meri bra aur panty ko hath me lekar muth marne laga. Main ne dekha ki ye sahi samay main main ne use aawaj di ki mujhe toilet jaana hain. Usne kaha ki wo naha raha hain. To maine kaha ki main toilet kar lon bas do min. Lagele. Us ne darwaza kholdiya
maine dekhan ki us ne towel lappet rakha hain. Lekin uska lund khada hain. Main uske samne hi camode par paint utar kar baith gai wo mujhe badi gor se dekhne laga bathroom karne ke baad main us ke paas aayi wo dono hathon se apne lund ko chupa raha tha. Mainne us se kaha ki tum kya chupa rahe ho. To us ne kaha ki khuch nahi, aap yeh kahani facebook desi kahaniyan page par padh rahe hain. maine uska towel pakad kar hata diya. Uska lund khada tha. Maine kaha ki ye kya chote tumhara lund to khada hain. Wo mujh se towel lene ki koshish karne laga. Tabhi maine towel bathroom ke bahar phek diya. We towel uthane ke liya doda to maine piche se jakar us se lipat gayi. Aur apne hathon main bhai ka lund pakad liya. Wo sidhe kada ho. Gaya maine uske lund ko pakad kar hilane lagi.
Ke muh se aaaaaahhaaa aaaaaahhaaa ki awaaze aane lagi. Phir main niche baith gayi aur bhai ka lund apne muhn main lekar chusne lagi. Uska lund bahut bada tha. Uske lund ka topa gulabi tha. Lund ka size karib 7'5 inch ka tha. Main mast hone lagi thi. Ab bhai. Ne mera t-shirt aur paint utar di. Main pur tarha se naggin thi. Bhai ne apna lund meri chut par laga kar ragadne laga. Mere muh se aaaaaahhaaa aaaaaahhaaa aaaaaaaaaaaaaaaa ,oooooooo wwwoooo ki awaz aa rahe thi. Bahut der tak ragadne ke baad ab main aaaahhhhhhhhh aaaaaaaaahhhhh karne lagi phir mera bhai commode par baith gaya aur mujh se bola ki main uske lund par aa
kar baith jaun. Main ne uska lund apni chut par lagaya itne main bathroom main pade pani ki wajah se mera pair fisal gaya aur bhai ka lund sedhe meri chut phadta huwa andar chala gaya. Mere muh se cheekh aaaaaaaaaaaaaaaa ,oooooooo nikal gayi. Main uthne ke koshish karne lagi to bhai ne meri kamar pakad kar phir se mujhe niche dabadiya main isi tarha se bhai ke lund ki sawari karne lagi. Mere muh se aaaaahhhhhhhhhh aaaaaaahhhhhhhhhhh aaaaaaahhhhhhhhhhh ooooohhhhhhhhhhh aaaaaahhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuummmmmmmm uuuuuuuuummm ki awaj nikalne lagi. Bhai ne meri dono pair pakad kar mujhe apne hathon main utha liya. Us ne apna lund bahar nahi nikala mera pura bhar bhai ke lund par tha. Bhai mujhe upar niche karne laga mujhe bada maza aa raha tha. Main bhi masti me aaaaahhhhhhhhhh
aaaaaaahhhhhhhhhhh aaaaaaahhhhhhhhhhh ooooohhhhhhhhhhh aaaaaahhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuummmmmmmm uuuuuuuuummm aaaaahhhhhhhhhh aaaaaaahhhhhhhhhhh aaaaaaahhhhhhhhhhh ooooohhhhhhhhhhh aaaaaahhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuummmmmmmm uuuuuuuuummm ki ajib hi awaj nikal rahi thi. Phir bhai ne mujhe niche utara aur mujhe washbasin se hath tika kar khade hone ko kaha main ghdi ban kar khadi ho gayi. Bhai ne apna lund meri chut par tikaya aur ek jhatke ke sath meri chut main daal diya. Main bhi masti me aaaaahhhhhhhhhh
aaaaaaahhhhhhhhhhh aaaaaaahhhhhhhhhhh ki awaz nikal gayi. Tabhi bhai ne kaha ki "dard kar raha hai kya?" to main ne ek ajib awaj me kaharte huye jabab diya " nahiiiiiiiiiiiiiiii aaaaahhhhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhh". Ab mein bhi masti main bhai ka saath dene lagi. Dhire dhire hamari speed badne lagi aur ek ek kar ke hamari choot ho gayi. Bhai ne apna sara maal meri choot main daal diya. Aur mujhe se lipat gaya. Main puri tarha se santusht ho chuki thi. Phir ham dono bhai behan ne snaan karne ke baad baith kar baatein karne lage..
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Sunday, 12 November 2017

थोड़ा ही घुसाउंगा बोला पर पूरा पेल दिया भाई ने - Gandi Khaniya

मेरा नाम पुष्पा है आज मैं आपके अपनी ज़िन्दगी की एक रियल कहानी सूना रही हु, ये कहानी मेरा अपना सगा भाई का नहीं है ये मेरे ममेरा भाई किशन के बारे में है. जिसने मेरी चूत में जोर से अपना लण्ड घुसा दिया था और मैं दर्द से बैचेन हो रही थी. पर हां थोड़े देर बाद मुझे भी बहूत मजा आया, मैं आज आपको पूरी वाकया बताउंगी की क्या क्या हुआ था उस रात को.
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मैं नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम की नियमित विजिटर हु, मुझे यहाँ पर कहानियां पढ़कर बहूत ही ज्यादा अच्छा लगता है. और हां एक बात और है मेरी सारी सहेलियां भी इस वेबसाइट को पढ़ती है. मुझे लगा की मैं आज अपनी मन की बात आपसे बता दू. मैं अभी 21 साल की हु, और कानपूर में पढाई करती हु, मेरा भाई 24 साल है. और वो कानपूर देहात में रहता है, मैं होस्टल में रहती हु, मेरा पढाई पढ़ने में ज्यादा तेज नहीं था इस वजह से वो अभी से ही पिताजी के काम में लग गया. मैं थोड़ी ज्यादा ही मॉडर्न हु, मैं हमेशा जीन्स में रहती हु, वो भी काफी टाइट, और मैं टॉप जो पहनती हु वो हमेशा मेरे नाभि से ऊपर रहती है. मेरा चूतड़ जब चलते हुए हिलता है तो कइयों को दीवाना बना देता है. मैं गोरी हु, साधना कट बाल कटा कर रहती हु, मैं ३४ बी साइज की ब्रा पहनती हु.  www.ahindisexstories.com

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बात आज से एक महीना पहले की है. जब मेरा भाई कानपूर आया था, मेरे घर से हरेक महीना कोई ना कोई आता है सामान वगैरह देने के लिए, पर एक बड़गड़ हो गई. मैं और मेरा भाई दोनों कहना कहकर वो अपने मोबाइल पे गेम खेलने लगा, और मैं भी नॉनवेज स्टोरी डॉट कॉम खोलकर पढ़ने लगी. रात के करीब १२ बज रहे थे. हम दोनों अलग अलग सोये थे, वो ऊपर सोया था और मैं जमीन पर विछावन पर सोई थी. अचानक रात को मेरे पेट में काफी दर्द सुरु गो गया, और काफी ज्यादा हो गया, मेरा भाई तुरंत बाहर गया ताकि कोई मेडिकल से कुछ दबाइयां ले आये पर कोई भी मेडिकल खुला नहीं था. वो आ गया वापस, मेरे आँख में आंसू थे, मुझे काफी दर्द हो रहा था, तभी मेरा भाई बोला बहन अगर तुम कहते हो तो मैं गरम सरसो का तेल पेट में लगा दू, अक्सर माँ तेल लगा देती थी पेट में जब भी कभी पेट में दर्द होता था. मुझे और कोई चारा नहीं था इस वजह से मैंने हां कह दिया. और तो तुरंत तेल गरम कर के ले आया.

रात में मैं स्कर्ट पहन राखी थी और टॉप स्लीवलेस, वो मैंने थोड़ा सा टॉप को ऊपर कर दी. वो मेरे पेट में तेल से मालिश करने लगा, करीब 10 मिनट बाद मेरा दर्द ख़तम हो गया और मुझे हलकी हलकी नींद आने लगी. अब दर्द के जगह में मर्द का हाथ मेरे शरीर को छू रहा था इस वजह से मुझे कुछ कुछ होने लगा. अचानक मेरा हाथ भाई के पेंट में सटा तो कड़ा सा कुछ लगा मैं समझ गई की भाई का लण्ड खड़ा हो गया है. वो मेरा टॉप को थोड़ा और ऊपर कर दिया और मेरे ब्रा को नीचे से छूने लगा. मुझे भी अच्छा लगने लगा. उसके बाद वो मेरे पैर में मालिश करने लगा और मेरा स्कर्ट जांघो के ऊपर तक कर दिया फिर वो मेरे जांघो को सहलाने लगा. और फिर अपना लण्ड निकाल लिया और हाथ में पकड़ कर हिलाने लगा. मैं हलके आँख से देख रही थी.
दोस्तों मैं सब समझ रही थी की ये रिश्ता पाक होता है, कभी मुझे लग रहा था, की मैं बाहों में भर लूँ, पर कभी लग रहा था भाई बहन का रिश्ता है ऐसा मैं कैसे कर सकती हु. तभी वो मेरे पेंटी को खोलने लगा. मैं नींद का बहाना कर दी. और उसने मेरी पेंटी को उतार दिया और सूंघने लगा. मैं हैरान थी की आखिर ये सूंघ क्यों रहा है. फिर वो मेरी पेंटी को अपने लण्ड में रगड़ने लगा और, आह आह आह करने लगा. फिर उसने मेरे स्कर्ट से झांक कर देखा मेरी चूत पे नजर जाते ही, उसके मुह से आवाज आई इससस, ओह्ह ओह्ह क्या चीज है. और वो फिर मेरे पैर को अलग अलग कर दिया और स्कर्ट को ऊपर कर दिया, अपना लण्ड निकाल कर हिलाने लगा. मैं समझ गई की अब तो ये चोदेगा, और अगर मैं नींद का बहाना करती रह गई तो काम खराब हो जायेगा मैं भी मजा नहीं ले पाऊँगी, और मैं जग गई. वो डरा नहीं, वो मुझे अपनी बहसि नजरों से देख रहा था मैंने कहा क्या कर रहे हो? उसने कहा, आज मुझे मत रोकना प्लीज, मुझे चोदना है. मैंने कहा नहीं नहीं ये नहीं हो सकता, तो वो कहने लगा क्यों नहीं हो सकता, मेरे घर की चीज को कोई और चोद सकता है और मैं नहीं. तो मैंने कहा कौन मेरे साथ क्या किया, वो वो कहने लगा. क्यों तुम ट्यूशन बाले सर से नहीं चुदवाई? मैं हैरान रह गई. की आखिर इसको कहा से पता चला, उसने कहा मैं सारा पोल खोल दूंगा, तुमने तो मामा जी से भी चुदवाया था. ओह्ह्ह माय गॉड. इसको तो मेरी रंगरेलियां के बारे में पता था.

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मैंने कहा ठीक है. आज मेरा मेंस (माहवारी) हुआ है. थोड़ा थोड़ा निकल रहा है. आज छोड दो कल ले लेना, तो उसने बोला ठीक है. पर थोड़ा तो घुसाने दो. पर मैं मना कर रही थी. और अंदर से आग भी लगी थी चुदने का. मैंने फिर कहह ठीक है थोड़ा सा घुसा लो. उसने कहा ठीक है. और फिर मेरे दोनों पैरों को अलग कर के उठा दिया और मेरे चूत पे अपना लण्ड रख कर जोर से धक्का मार दिया, दोस्तों मेरी तो चीख निकल गई थी. मेरी चूत फट गई, मैंने कहा मैंने तो कहा था ज्यादा मत डालना पर तुमने ऐसा क्यों किया, उसने कहा की तुम तो वही बात कर रही हो! शेर के सामने बकरी हो और शेर सूंघ कर छोड़ दे. और वो मुझे झटके दे दे के चोदने लगा, और मैं भी गांड उठा उठा को जोर जोर से नीचे से धक्के देने लगी. कमरे में फच फच की आवाज आ रही थी और मेरी आह आह उफ़ उफ़ आउच अहो अहो अहो आ आ आ उफ़ उफ़ उफ़ आ आ औ ऊ ओऊ उफ़ और जोर से और जोर से, और फिर क्या था दोस्तों, मुझे तनिक भी परवाह नहीं रहा मेरी माहवारी का और मैं कभी ऊपर होके कभी नीचे होके चुदवाने लगी. दोनों झाड़ जाते और फिर आधे घंटे में तैयार होके फिर एक दूसरे के होठ को किश करने लगते और वो चूचियां दबाते दबाते मुझे फिर से पेलने लगता. www.ahindisexstories.com
दोस्तों रात भर यही सब चलता रहा. सुबह जब उठी तो मैं ठीक से चल नहीं पा रही थी. मेरी चूत काफी सूज चुकी थी. पर रात का मजा कुछ और ही था.
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कुंवारी बुर की सील सगे भाई ने तेल लगाकर तोड़ी - Gandi Khaniya - Hindi Sex Story

मेरा नाम पूनम है, मेरी उम्र 19 साल और शरीर का साइज़ 38-36-38 है। मेरी मोटी गांड, गोल-गोल चूतड़ हैं, गुलाबी-गुलाबी होंठ.. गाल पर तिल.. और एकदम गोरा रंग है।
मेरे भाई का नाम रचित है, वो भी मेरी तरह खूबसूरत है।
बात उन दिनों की है.. जब मेरी पढ़ाई चल रही थी, मेरा भाई मुझको मेरे बाईक से कॉलेज पहुंचाने जाया करता था। मेरा कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं था.. ना मुझको ब्वॉयफ्रेंड बनाने का शौक था।
मेरी कालोनी के लड़के मुझको देखकर अपने लंड पर हाथ रख लेते थे और बोलते थे कि ये माल एक रात को मिल जाए तो पूरा चूस का चोद लें।
पर मैं उन लड़कों की बात को अनसुना करते हुए चुपचाप निकल जाया करती थी।
लेकिन बाद में मैं उनकी बातों को याद करके सोचती थी और इससे मेरे मन में सेक्स की इच्छा जागृत हो जाती थी।
मैं कभी-कभी सन्नी लियोनी की मूवी देखती हूँ। उस वक्त मैं सिर्फ अपने भाई के बारे में सोचती हूँ।
एक बार सन्डे के दिन में स्कूटी ले कर बाहर घूमने के लिए जा रही थी.. तो मेरा भाई बोला- कहाँ जा रही हो पूनम?
मैं बोली- कहीं नहीं.. बस यहीं पास में जा रही हूँ।
मेरा भाई बोला- मैं भी चलूँ?
मैं बोली- आ जाओ।
मेरा भाई मेरे पीछे बैठ गया। उस दिन मैंने ब्लैक कलर की स्कर्ट पहनी थी। मेरे भाई ने लोवर और टी-शर्ट पहनी हुई थी। मैंने स्कूटी स्टार्ट की और हम दोनों चल दिए। मैं स्कूटी तेज़ चला रही थी.. ब्रेकर पर ब्रेक लगाया तो मेरा भाई मुझसे सट गया और उसके लोवर से उसका लंड मेरी मोटी गांड से अच्छी तरह सट गया।
रचित का लंड एकदम टाईट खड़ा था। इस तरह से रगड़ने से उसका लंड मुझको बहुत अच्छा लगा।
फिर मेरा भाई मुझसे ऐसे ही सटा रहा। हम चलते रहे.. काफी दूर जाने के बाद भाई बोला- रूक जाओ।
मैंने स्कूटी को रोका और बोली- क्या हुआ?
वो बोला- कुछ नहीं.. सामने गोल-गप्पे वाला है.. चलो गोल-गप्पे खाते हैं।
मैं बोली- ठीक है।
हमने गोल-गप्पे खाए, भाई बोला- और क्या खाओगी पूनम?
मैं बोली- और कुछ नहीं..
मैं मन-मन बोली- और तो आपका लंड खाऊंगी।
भाई बोला- चल.. अब तू बैठ, स्कूटी मैं चलाता हूँ।
मैंने बोला- हाँ ठीक है।
मैं भाई के पीछे बैठ गई।
भाई भी तेज़ चलाने लगा, मैंने डरते-डरते उसके कंधे पर हाथ रख दिया।
भाई बोला- सही से पकड़ लो।
मैं बोली- हां ठीक है।
मैं और कस कर पकड़ कर बैठ गई, अब मेरी चूचियाँ भाई की पीठ से अच्छे से सट गईं। फिर मैंने अपना हाथ भाई के आगे कर के उनके पेट को पकड़ लिया।
भाई ने पूछा- मज़ा आ रहा है घूमने में?
मैं बोली- हां बहुत!
कुछ देर बाद हम घर पर पहुंच गए।
मैंने मम्मी के साथ खाना बनाने में हेल्प की। कुछ टाईम बाद हमने खाना खाया और सो गए। मेरा भाई मेरे पास वाले कमरे में सोता था।
रात 12 बजे मुझको कुछ आवाज़ें सुनाई दीं- अहह.. अह उम्म्ह… अहह… हय… याह… आहह.. पूनम मेरी जान.. आ जाओ.. मेरे लंड को चूसो.. खा जाओ.. मेरा लंड..
मैं धीरे से उठी और बाहर आकर देखा तो भाई का रूम खुला हुआ था, मैं अन्दर चली गई, मैंने देखा कि भाई अपना लंड हिला रहा था और मेरा नाम ले रहा था।
मेरी तो जैसे खुशी का ठिकाना नहीं रहा, मैं बोली- ये क्या कर रहे हो?मेरा भाई चौंक सा गया.. उसका चेहरा लाल हो गया और एकदम से लोवर ऊपर को करते हुए बोला- सॉरी सॉरी.. बहन सॉरी.. मम्मी पापा से नहीं बताना प्लीज़?
मैं बोली- नहीं बताऊंगी.. पर तुम ये क्या कर रहे थे?
वो जबाव देने की बजाए बोलने लगा- मैं तुमसे प्यार करता हूँ.. तुम्हारी जवानी को चूसना चाहता हूँ।
मैं बोली- तुमको ज़रा सी भी लज्जा नहीं आ रही?
वह चुप रहा..
मैं उसके बेड पर बैठ गई, मैं बोली- दुनिया क्या कहेगी?
वो बोला- दुनिया के सामने भाई-बहन और अकेले में पति-पत्नी रहेंगे।
मैं हँसने लगी तो वो भी मुस्कुरा दिया।
मैंने बोला- मेरे पति जी.. मुझको सोचने का टाईम दो।
वो बोले- ठीक है मेरी जान..
मैं बोली- अभी जान-वान कुछ नहीं..

मैं अपने कमरे में आ गई और खुशी से अपनी बुर में उंगली फेरते हुए सो गई।
सुबह जब मैं कॉलेज के लिए तैयार हुई, तो मैं बोली- रचित भाई.. मुझको कॉलेज छोड़ आओ!
वो बोला- ठीक है।
जब हम घर से निकल आए तो रचित बोला- क्या सोचा मेरी पत्नी ने?
मैं बोली- ठीक है.. आज रात को मैं तुम्हारी दुल्हन बनकर तुम्हारे कमरे में सुहागरात के लिए आऊंगी।
वो बोला- पक्का..! मुझे विश्वास नहीं हो रहा है.. क्या तुम सच में तैयार हो?
मैं बोली- मेरे पतिदेव मैं पक्का आऊँगी।
उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा, वो बोला- मेरी जान अपने पति के आगे हाथ डालो.. जैसे पत्नी बैठती है।
मैं बोली- ठीक है मेरे जानू!
मैं आगे हाथ डालकर बैठ गई।
कुछ ही देर में मैं कॉलेज पहुंच गई।
कॉलेज से जब छुट्टी हुई तो मैंने घर पर देखा कि मॉम-डैड घर पर नहीं हैं।
मैं बोली- रचित मॉम-डैड किधर हैं?
वो बोला- मौसी के घर पर गए हैं मेरी जान।
मैं बोली- सच..!
वो बोला- हाँ।
बस मैंने खाना खाया और मॉम की शादी का लहंगा-चुनरी पहन लिया।
मेरे भाई ने शेरवानी पहनी और हम दोनों बेडरूम में आ गए।
रचित ने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरे ऊपर लेट कर किस करने लगा।
मुझे मज़ा आ रहा था, मैं बोली- तुमने किसी और के साथ भी किया है?
रचित बोला- हाँ, गर्लफ्रेंड के साथ बहुत बार किया है।
मैं उसकी तरफ हैरानी से देखने लगी।
वो बोला- और तूने?
मैं बोली- नहीं।
वो बोला- अच्छा.. तो बस जैसे-जैसे मैं करूँ.. तुम करवाती रहना।
मैं बोली- ठीक है.. पर कुछ होगा तो नहीं?
वो बोला- कुछ भी नहीं होगा।
फिर उसने मुझे नंगी किया.. मैंने उसको नंगा किया। कुछ देर तक उसने मुझको चाटा-चूमा.. फिर अपना लंड मेरे हाथ में दे दिया।
वो बोला- मुँह में लो।

मैंने लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगी। कुछ ही पलों में हम दोनों 69 की पोजीशन में हो गए थे।
मैं बोली- बस भाई.. अब बर्दाश्त नहीं हो रहा है.. फाड़ दो मेरी बुर… चोद दो मुझको।
मेरे भाई ने अपने लंड पर तेल लगाया और अपना लंड मेरी बुर के मुँह पर रखकर हल्का सा दबाव डाला। उसका मोटा लंड मेरी बुर से फिसल गया। दोबारा में उसके लंड का सुपारा अन्दर घुस गया।
मेरी ज़ोर से चीख निकली- आहह.. आहह.. उहहह.. मर गई मॉम बचाओ..
भाई ने थोड़ा रूक कर दूसरा धक्का लगाया, मेरी बुर की झिल्ली ने खुलकर लंड को अन्दर ले लिया, मैं बहुत जोर-जोर से रो रही थी ‘निकालो.. निकालो.. दर्द हो रहा है.. आहह..’पर भाई ने मेरी एक ना सुनी और धक्के लगाता रहा, कुछ टाईम बाद मुझे भी मजा आने लगा।
अब भाई पेलता रहा.. कभी घोड़ी बनाकर, कभी लिटाकर, कभी लंड पर बैठा कर उसकी चुदाई चलती रही।
काफी देर चोदने के बाद रचित झड़ गया और उसने लंड का पूरा पानी मेरे मुँह में छोड़ दिया।
मैं नहीं झड़ी थी, मैं बोली- रचित मैं क्या करूँ?
रचित अपनी 3 उंगलियों पर तेल लगाकर मेरी बुर में पेलने लगा।
मुझे मजा आने लगा ‘फास्ट और फास्ट.. हाँ.. फाड़ दे अपनी बहन की बुर को..’
कुछ टाईम बाद मैं भी झड़ गई और हम नंगे थक कर सो गए। जब हमें होश आया तो मैं उठी। मैंने देखा कि बेड की चादर खून से पूरी खराब हो गई थी।
मैंने अपनी चिकनी बुर देखी.. मेरी बुर भी खून में लथपथ थी।
मैं रो पड़ी- रचित रचित उठो.. ये देखो खून?
रचित बोला- पागल.. रो क्यों रही हो मेरी जान.. पहली बार ऐसा होता है।
मैं बोली- कुछ होगा तो नहीं.. पक्का!
वो बोला- कुछ नहीं होगा।
शाम हो गई थी, रचित बोला- तुम थक गई हो मेरी जान.. मैं खाना होटल से लेकर आता हूँ।
रचित ने हाथ साबुन से धोए और कपड़े पहन कर जाने लगा।
मैं भी कपड़े पहनने लगी तो रचित बोला- मेरी जान आज तुम कपड़े नहीं पहनो.. मेरे सामने नंगी रहो सिर्फ ब्रा-पेंटी में।
मैं बोली- ओके।
मैंने दूसरी नई ब्रा-पेंटी पहन ली।
भाई खाना लेने चला गया, मैंने बेड की खून से खराब वाली चादर धो दी।
तभी एकदम से मैं एक बड़े शीशे के सामने आ गई.. जो हमारे घर में लगा था। मैंने अपना चिकना बदन देखा.. एकदम गोरा भूरा रंग.. मोटी गांड ब्लैक चड्डी में और भी ज्यादा मस्त लग रही थी। मैं आईने के सामने अपने आपको और अपनी जवानी को देख रही थी। साथ ही मैं अपने मम्मों से खेल रही थी।
तभी रचित आ गया ‘मेरी जान उतावली ना हो.. अभी पूरी रात बाकी है। बस तू खाना खा.. फिर सेक्स स्टार्ट करते हैं।’
ये सुनकर मैं रचित के गले से लग गई, भाई ने मुझे बांहों में ले लिया।
मैं बोली- मेरे पतिदेव.. तुम बहुत अच्छे हो.. पर अब रात को अपना लंड मेरी मोटी गांड गोल-गोल चूतड़ में भी डालना।
वो- ठीक है।
हम दोनों ने खाना खाया और कुछ देर बाद रचित बोला- चलो हो जाए शुरू?
मैं बोली- हां, पर अबकी बार मेरी गांड यहीं शीशे के सामने चोदो।
रचित बोला- ठीक है।
दोस्तो इसी तरह रचित ने मेरी ठुकाई की.. उसने पूरी रात मेरी चूत और गांड मारी और मेरा पूरा शरीर चूसा।
इस घटना को विस्तार में बताऊंगी। तो काफी लंबी हो जाएगी।
आपको मेरी कहानी अच्छी लगी या नहीं, मुझे ईमेल पर जवाब देते रहना।
मैं जल्दी ही दूसरी कहानी के साथ आऊंगी।
ओके बाए दोस्तो
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